Let the farmers give the cloud how are the irrigation now - किसानों को मेघ दे रहे दगा, अब कैसे हो सिंचाई DA Image

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किसानों को मेघ दे रहे दगा, अब कैसे हो सिंचाई

खरीफ की फसल पूरी तरह बारिश पर भी निर्भर रहती है। बारिश होने के साथ ही किसान खेतों में जुताई के साथ-साथ बिचड़ा डालने में जुट जाते हैं, लेकिन किसानों में मेघ के दगा देने से मायूसी है। अगर यही स्थिति रही तो एक बार फिर सारण जिला सूखे की चपेट में आ जायेगा। जिले के कई प्रखंड ऐसे भी हैं कि वहां अभी तक एक एमएम (मिली मीटर) भी बारिश नहीं हुई है। कृषि विभाग के अनुसार, प्री मानसून की बारिश होने के साथ ही जिले में खरीफ फसल की तैयारी शुरू हो जाती है। 15 जून से किसान अपनी खेतों में बिचड़ा डालने लगते हैं लेकिन अभी तक बारिश नहीं होने से बिचड़ा डालने में विलंब हो सकता है। इससे खरीफ की फसलों पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। मई माह में बारिश होती है तो खेतों की गर्मी निकलने लगती है और जब जून में बारिश शुरू होती है तो खेतों में नमी होने लगती है। सारण में 15 जून से मानसून शुरू हो जाता है। इसे देख किसान खेती में जुट जाते हैं।

जून माह में होना चाहिए न्यूनतम 137 एमएम बारिश

कृषि विभाग के अनुसार जून माह में 137.10 एमएम बारिश होनी चाहिये। जून के प्रथम सप्ताह यानी छह जून तक 27 एमएम बारिश होनी चाहिये थी, लेकिन एक एमएम भी बारिश नहीं हुई। 14 जून तक न्यनतम 63.98 एमएम बारिश होनी चाहिए, लेकिन 14 जून की शाम तक जिले में मात्र 9.54 एमएम बारिश हुई है। पिछले माह यानी मई में 45 एमएम बारिश होनी चाहिये, लेकिन इसके एवज में मात्र चार एमएम ही बारिश हो पायी थी।

जिले के तीन प्रखंडों में आजतक नहीं हुई बारिश

कृषि विभाग की रिपोर्ट को अगर सही माना जाये तो जिले के तीन ऐसे प्रखंड हैं, जहां आजतक एक एमएम भी बारिश नहीं हुई है। इसमें गड़खा, दिघवारा व सोनपुर प्रखंड हैं। जिले में सबसे अधिक बारिश मढ़ौरा प्रखंड में हुई है। इस प्रखंड में अब तक 37.20 एमएम बारिश हुई है। इसके बाद अमनौर में 24.80 एमएम व परसा में 21 एमएम बारिश हुई है जबकि सबसे कम बारिश 2.00 छपरा सदर प्रखंड में हुई है।

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