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कोर्ट कार्य का वकीलों ने किया बहिष्कार, सभी कार्य रहे ठप

के बाद वीरन पड़ा छपरा कोर्ट कैंपस पेज चार की लीड के साथ छपरा, नगर प्रतिनिधि। अपने दो वकील साथी की हत्या से आक्रोशित छपरा विधि मंडल के अधिवक्ताओं ने बुधवार को न्यायिक कार्य का बहिष्कार किया।...

कोर्ट कार्य का वकीलों ने किया बहिष्कार, सभी कार्य रहे ठप
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हिन्दुस्तान टीम,छपराWed, 12 Jun 2024 10:00 PM
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जमानत सहित अन्य कार्यों के लिए कोर्ट आए लोग वापस लौटे
अधिवक्ताओं ने कोई विपरीत आदेश पारित नहीं करने का किया था अनुरोध

फोटो 20- हत्या के बाद वीरन पड़ा छपरा कोर्ट कैंपस

पेज चार की लीड के साथ

छपरा, नगर प्रतिनिधि।

अपने दो वकील साथी की हत्या से आक्रोशित छपरा विधि मंडल के अधिवक्ताओं ने बुधवार को न्यायिक कार्य का बहिष्कार किया। अधिवक्ताओं का कहना था कि हत्यारों को जल्द गिरफ्तार किया जाए। बुधवार की सुबह कोर्ट खुलने के तुरंत बाद दो अधिवक्ताओं की हत्या की खबर जैसे ही छपरा विधि मंडल में पहुंची कि अधिवक्ताओं ने हत्या की निंदा करते हुए कोर्ट कार्य का बहिष्कार किया। न्यायिक कार्य नहीं होने से शहर सहित ग्रामीण क्षेत्र से आए लोगों को परेशानी हुई। रिविलगंज के रहने वाले सुरेश प्रसाद ने कहा कि पट्टीदार ने उनके ऊपर जानलेवा हमले का फर्जी मुकदमा दर्ज करा दिया है। कोर्ट में न्यायिक कार्य नहीं होने के कारण उन्हें काफी परेशानी हुई। पुलिस की गिरफ्तारी से बचने के लिए वे अपने एक रिश्तेदार के यहां किसी तरह गुजर बसर कर रहे हैं। कोर्ट का कार्य सामान्य तरीका से होता तो वे अपनी जमानत करा लेते। वहीं दाउदपुर के रहने वाले कयामुद्दीन ने बताया कि उनकी जमीन पर दबंगों ने कब्जा कर लिया है। पुलिस से गुहार लगाने के बाद भी प्राथमिकी दर्ज नहीं हो रही है। कुछ लोगों ने बताया कि कोर्ट में परिवाद दर्ज कराया जा सकता है, पर कोर्ट बंद रहने के कारण परिवाद दर्ज नहीं करा पाए हैं।

विपरीत आदेश पारित नहीं करने का अनुरोध

न्यायिक कार्य का बहिष्कार कर छपरा विधि मंडल के अधिवक्ताओं ने जिला जज ,सीजेएम, आयुक्त व जिलाधिकारी को एक पत्र भेजा था जिसमें कहा गया था कि उनके दो साथियों की निर्मम हत्या कर दी गई है। इसके खिलाफ छपरा कोर्ट के सभी अधिवक्ता बुधवार को कोर्ट कार्य का पूरी तरह से बहिष्कार करेंगे। ऐसे में अधिवक्ता की अनुपस्थिति या पैरवी के अभाव में कोई विपरीत आदेश पारित नहीं किया जाए।

सारण में पूर्व में भी वकीलों की जा चुकी है जान

कोर्ट आने के दौरान ही दो अधिवक्ताओं की कर दी गई थी हत्या

छपरा जेल से भी अधिवक्ता की हत्या की रची गई थी साजिश

छपरा, नगर प्रतिनिधि।दोहरे हत्याकांड के पूर्व में भी छपरा कोर्ट के कई अधिवक्ताओं की हत्या हो चुकी है। 13 जुलाई 2017 को अपराधियों ने दिनदहाड़े छपरा कोर्ट के अधिवक्ता रमेन्द्र शर्मा की गोली मार कर हत्या कर दी थी। अपराधियों ने गड़खा में अधिवक्ता रमेंद्र शर्मा को निशाना बनाते हुए पांच गोली मारी जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई थी। इस हत्याकांड में छपरा कोर्ट के ही अधिवक्ता समय तो 10 लोगों को नामजद आरोपित किया गया था। हत्याकांड के विरोध में वकीलों ने न्यायिक कार्य का बहिष्कार करते हुए छपरा एसपी कार्यालय के समक्ष भी प्रदर्शन किया था। बाद में पुलिस ने हत्या के कारणों खुलासा करते हुए बताया कि जमीन संबंधी विवाद में वकील की हत्या हुई थी। हत्या की साजिश छपरा जेल में रची गई थी। पुलिस ने हत्या में गिरफ्तार अपराधियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ की थी तो पता चला कि इस हत्याकांड को अंजाम दिलाने में छपरा कोर्ट के ही एक अधिवक्ता की अहम भूमिका रही है। अभी इस हत्याकांड क्या मुकदमा छपरा कोर्ट में चल रहा है। वहीं शहर के कटहरी बाग में भी एक अधिवक्ता हरेंद्र ठाकुर की ईट पत्थर से वार कर हत्या कर दी गई थी। वह कटहरी बाग स्थित अपने किराए के मकान से कोर्ट आने के लिए निकले थे तभी पुराने विवाद को लेकर ईंट पत्थर से वार कर उनकी निर्मम हत्या कर दी गई थी। छपरा कोर्ट कैंपस में भी एक वकील की दिनदहाड़े वकीलों के सामने ही गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड को अंजाम दिलाने में जिले के ही एक पूर्व विधायक का नाम सामने आया था। बताया जाता है कि छपरा कोर्ट के वकील सर्वेश्वर सिंह कोर्ट कैंपस स्थित एक फोटो स्टेट दुकान के समीप बैठे थे तभी अपराधियों ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी थी। हत्या का कारण यह बताया गया था कि छपरा कोर्ट में चल रहे एक हत्या के मुकदमे में उनकी गवाही होनी थी। गवाही से कुछ दिन पूर्व ही उनकी हत्या कर दी गई ताकि अपराधियों को सजा न मिल सके। इस हत्याकांड में पूर्व विधायक का नाम सामने आने से मामला हाई प्रोफाइल भी हो गया था।

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सारण समेत पूरे बिहार में कानून व्यवस्था ध्वस्त,लोग असुरक्षित: राजद

छपरा, एक संवाददाता। सारण समेत पूरे बिहार में कानून व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है। जंगल राज का डर दिखाकर देश व प्रदेश में राज्य करने वाले जदयू- भाजपा के लोग आये दिन हो रहे क्राइम पर अब ढिंढोरा नहीं पीट रहे हैं । उनकी नजर में अब बिहार में मंगल राज कायम है। सारण जिला राजद ने गिरती -विधि व्यवस्था व बढ़ रही हत्या,बैंकलूट, मोटर साइकिल लूट सहित अन्य घटनाओं पर चिंता जताते हुए वैशाखी पर चल रही बिहार सरकार के मुखिया मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से इस्तीफे की मांग की है। सारण जिला राष्ट्रीय जनता दल के प्रवक्ता हरेलाल यादव ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि अहले सुबह शहर से सटे मुफ्फसिल थाना क्षेत्र अंतर्गत मेंथवलिया गांव निवासी अधिवक्ता रामअयोध्या राय व उनके पुत्र सुनील कुमार राय को कोर्ट जाने के दौरान बीच सड़क पर अपराधियों द्वारा सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी। जिले में अपराधी पुलिस प्रशासन पर भारी पड़ रहे हैं । जिला पुलिस की कार्यशैली को संदेह के कठघरे में खड़ा करते हुए राजद प्रवक्ता ने कहा कि विगत कुछ दिनों पूर्व अमनौर प्रखंड के अपहर सेंट्रल बैंक की शाखा से दिनदहाड़े हथियार के बल पर अपराधियों ने सरेआम साढ़े दस लाख रुपये लूट लिया गया। बिहार में नीतीश ~भाजपा की सरकार में अपराधियों का मनोबल इतना बढ़ गया है कि डाक्टर, इंजीनियर, वकील, व्यवसायी और आम से लेकर खास लोग भी दहशत के साये में जी रहे हैं।

सीपीआई ने की दोहरे अधिवक्ता हत्या कांड की निन्दा

कानून व्यवस्था ध्वस्त हो जाने का लगाया आरोप

छपरा, एक संवाददाता। सीपीआई राज्य कार्यकारिणी के सदस्य सुरेंद्र सौरभ व सीपीआई सारण के जिला सचिव रामबाबू सिंह ने दोहरे अधिवक्ता हत्या कांड की कड़ी निन्दा की है। नेताओं ने सारण समेत पूरे बिहार में कानून व्यवस्था ध्वस्त होने का आरोप लगाया है।

सीपीआई नेताओं ने कहा है कि कानून व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। इसी का परिणाम है कि हत्या ,अपराध बैंक लूट के वारदात रोज हो रहे हैं। अपराधी इतने बेखौफ हो गए हैं कि ये दोनों पिता -पुत्र अधिवक्ता अपने न्यायिक कार्य को निबटाने के लिए प्रतिदिन की भांति बुधवार को भी कोर्ट जा रहे थे लेकिन दिन दहाड़े अपराधियों ने मुख्य सड़क पर गोली मारकर हत्या कर दी।

सीपीआई नेताओ ने अपराधियों की अविलंब गिरफ्तारी और मृतकों के परिजनों को पचास लाख रुपए का आर्थिक मुआवजा प्रदान करने की मांग की है। आशंका है कि इस घटना के पीछे जमीन विवाद हो सकता है। जिले मे जमीन खरीद बिक्री का अवैध धंधा जोर -शोर से चल रहा है और जिला प्रशासन के संरक्षण में बड़े बड़े भू माफिया इस धंधे में लगे हुए हैं। जमीन की अवैध खरीद बिक्री का धंधा एक बड़े उद्योग का रूप ले चुका है।

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