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किसानों के लिए प्रशिक्षण केन्द्र के  रूप में विकसित हो कृषि प्रदर्शनी

किसानों के लिए प्रशिक्षण केन्द्र के रूप में विकसित हो कृषि प्रदर्शनी

संक्षेप:

सोनपुर मेले में कृषि प्रदर्शनी की युद्ध स्तर पर चल रही है तैयारी अभी चल ही रही है। हरिहरक्षेत्र सोनपुर मेले के नखास में लगभग चार एकड़ क्षेत्र कृषि विभाग के लिए स्थायी तौर पर आवंटित है। इसमें राज्य...

Nov 12, 2025 09:37 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, छपरा
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सोनपुर मेले में कृषि प्रदर्शनी की युद्ध स्तर पर चल रही है तैयारी फोटो- 1 - हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेला के नखास स्थित कृषि प्रदर्शनी की चल रही तैयारी सोनपुर, संवाद सूत्र। कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर सरकारी स्तर पर लगने वाला एशिया प्रसिद्ध हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेला शुरू होने के तीन दिन बाद भी आर्ट एंड क्रॉप्ट ग्राम को छोड़कर सरकारी स्तर पर एक भी प्रदर्शनी अथवा स्टॉल बन कर तैयार नहीं हो सका है। हालांकि इन प्रदर्शनियों का निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। कृषि प्रदर्शनी की तैयारी भी अभी चल ही रही है। हरिहरक्षेत्र सोनपुर मेले के नखास में लगभग चार एकड़ क्षेत्र कृषि विभाग के लिए स्थायी तौर पर आवंटित है।

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इसमें राज्य सरकार का कृषि प्रदर्शनी क्षेत्र भी है जिसमें विभिन्न कृषि संस्थाओं, कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन, बीज कंपनियों, बागवानी बोर्ड, नारियल विकास बोर्ड, भूमि संरक्षण, ट्रैक्टर और अन्य कृषि यंत्र निर्माता कंपनियां,गन्ना विकास विभाग आदि की प्रदर्शनियां लगा करती हैं। कई फल- सब्जी उत्पादक व नर्सरी वाले भी यहां बिक्री स्टाल लगाते हैं। कृषि और पशुपालन के क्षेत्र में लगातार हो रहे नये- नये प्रयोगों और अनुसंधानों के बारे में भी यहां जानकारी दी जाती है। किसानों द्वारा बहुत पहले से एशिया फेम हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेले को राष्ट्रीय कृषि मेला घोषित करने की सरकार से मांग की जाती रही है। उनका मानना है कि मेले की कृषि प्रदर्शनी में स्थायी रूप से प्रशिक्षण केन्द्र खोले जाने से किसानों को कृषि की आधुनिकतम तकनीक से अवगत कराया जा सकेगा। इससे किसानों का कौशल विकास होगा, कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी और किसानों के जीवन स्तर में सुधार होगा। राज्य के सभी जिलों से किसानों का चयन कर यहां उनके लिए स्थायी तौर पर आवासीय प्रशिक्षण की व्यवस्था की जानी चाहिए। प्रगतिशील किसानों और किसान संगठनों का मानना है कि ऐतिहासिक, पौराणिक और धार्मिक महता के साथ ही पशु मेले के रूप में चर्चित रहे इस मेले के पुराने गौरव को वापस लौटाने के लिए इसे राष्ट्रीय कृषि मेले का दर्जा दिया जाना अनिवार्य है। उनका यह भी मानना है कि आज राज्य और केन्द्र सरकार भी कृषि को सर्वोच्च स्थान दे रही है। कृषि के विकास और किसानों के स्तर के सुधार के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं चलायी जा रही है। ऐसी स्थिति में किसानों और पशुपालकों को आधुनिक व वैज्ञानिक तकनीक से लैस तथा उन्हें नवीनतम जानकारियों से अवगत कराने के लिए मेले को राज्यस्तरीय प्रशिक्षण केन्द्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।