तिरंगे में लिपटा जवान का शरीर गांव पहुंचा, परिजन शोकाकुल
मांझी थाना क्षेत्र के चकिया गांव के निवासी थे जयप्रकाश काश यादव का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटा उनके पैतृक गांव पहुंचा। इस दौरान गांव का माहौल गमगीन हो गया और परिजनों की चीख-पुकार से मातम पसर गया।...

मांझी थाना क्षेत्र के चकिया गांव के निवासी थे जयप्रकाश राजौरी क्षेत्र में आतंकवाद विरोधी अभियान में ड्यूटी कर रहे थे 7 जम्मू कश्मीर में इलाज के दौरान मृत सेना का जवान का शव पहुँचा गांव। हजारों की भीड़ उमड़ी मांझी। मांझी थाना क्षेत्र के चकिया गांव में भारतीय सेना के जवान जयप्रकाश यादव का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटा उनके पैतृक गांव पहुंचा। इस दौरान गांव का माहौल गमगीन हो गया और परिजनों की चीख-पुकार से मातम पसर गया। जयप्रकाश यादव भारतीय सेना के 15 बिहार में तैनात थे और इन दिनों राजौरी क्षेत्र में आतंकवाद विरोधी अभियान में ड्यूटी कर रहे थे।
अभियान के दौरान अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। शुक्रवार को इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। इससे पहले दानापुर कैम्प में शव को गार्ड ऑफ ऑनर देकर उन्हें अंतिम सलामी दी गई। सोमवार को जब उनका पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, तो सैकड़ों की संख्या में युवा हाथों में तिरंगा लेकर "भारत माता की जय" और "फौजी जयप्रकाश यादव अमर रहे के नारे लगाते हुए अंतिम यात्रा में शामिल हुए। उनका अंतिम संस्कार सैन्य सम्मान के साथ मांझी के नागा बाबा घाट पर किया गया। मुखाग्नि छोटे भाई ओम प्रकाश यादव ने दी।इस दौरान सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर उन्हें अंतिम सलामी दी। गांव के लोगों ने जयप्रकाश की शहादत पर गर्व व्यक्त किया, लेकिन उनके असमय निधन को पूरे इलाके के लिए अपूरणीय क्षति बताया। वीर जवान की अंतिम विदाई ने सभी की आंखें नम कर दीं। शवयात्रा में छपरा के सदर एडीओ नितेश कुमार,एसडीपीओ सदर 2 राज कुमार,सीओ सौरभ अभिषेक,थानाध्यक्ष बिनोद कुमार,राजद नेता सुधांशु रंजन,राणा प्रताप सिंह,ई सौरभ सन्नी,रामनारायण यादव,धर्मेन्द्र सिंह समाज,राजू रुद्र यादव,उमाशंकर ओझा,तथा एनपी सिंह कुन्दन समेत हजारों लोग शामिल हुए। कमांडो की विशेष ट्रेनिंग भी प्राप्त की थी जयप्रकाश यादव वर्ष 2011 में 15 बिहार रेजिमेंट में भर्ती हुए थे। करीब छह वर्ष पूर्व उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) कमांडो की विशेष ट्रेनिंग भी प्राप्त की थी। वह अपने तीन भाइयों और दो बहनों में सबसे छोटे थे। परिवार पहले ही बड़े बेटे को सड़क हादसे में खो चुका है। उनके परिवार में उनकी पत्नी श्वेता देवी, दो वर्षीय पुत्र जस कुमार और पांच वर्षीय पुत्री नित्या कुमारी शामिल हैं। उनकी शादी वर्ष 2019 में सिवान जिले के बखरी गांव में हुई थी।
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