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छपरा

बिहार के स्कूलों की जीपीएस मैपिंग से अहम जानकारी गायब

छपरा। जितेन्द्र कुमार पांडेयPublished By: Malay Ojha
Fri, 18 Jun 2021 11:32 PM
बिहार के स्कूलों की जीपीएस मैपिंग से अहम जानकारी गायब

सारण समेत सूबे के सरकारी व गैर सरकारी स्कूलों की जीपीएस मैपिंग से अहम जानकारी गायब है। स्कूलों के नाम , लेटीट्यूड व लॉन्जीट्यूड के  अलावा बिहार के किसी भी व्यक्ति को घर बैठे स्कूलों  के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं मिल सकेगी। इसकी मूल वजह है एनआईसी के द्वारा वेबसाइट पर डाटा अपलोड नहीं करना। चार साल पहले बिहार शिक्षा परियोजना परिषद द्वारा स्कूलों की जीपीएस मैपिंग कराने की दिशा में कार्य किया गया था। भारत सरकार की ओर से जीपीएस मैपिंग के  तहत स्कूलों के स्थापित स्थल का अक्षांश व देशांतर डाटा मांगा गया था। इसके अलावा यू डायस डाटा भी मांगा गया था। बिहार के सभी स्कूलों के अक्षांश और देशांतर समेत अपडेट यू डायस डाटा केंद्र सरकार को भेज दिया गया पर एनआईसी ने स्कूलों के नाम , लेटीट्यूड व लॉन्जीट्यूड के  अलावा कोई भी विस्तृत जानकारी अपलोड नहीं की। इतना ही नहीं सूबे के कई स्कूलों का नाम तक छूट गया।  

गूगल पर सिर्फ लोकेशन, बिल्डिंग भी विलोपित

गूगल पर विद्यालयों का सिर्फ लोकेशन दिख रहा है। इसके अलावा किसी भी अहम डाटा से लोग वंचित हैं। मतलब साफ है कि अक्षांश व देशांतर के आधार पर लोकेशन दिखा गूगल पर जीपीएस मैपिंग की सरकार की योजना की महज औपचारिकता पूरी की गयी है।  गूगल की वेबसाइट पर कुछ स्कूलों को छोड़ कर सरकारी, गैर सरकारी व निजी विद्यालय के नाम व लोकेशन देखने के अलावा बिल्डिंग की तस्वीर तक  विलोपित है। ऐसी स्थिति में अपडेट जानकारी नहीं मिलने से डिजिटल इंडिया की गति को भी झटका लगा है।

 जीपीएस मैपिंग का क्या था उद्देश्य

शिक्षा विभाग की मानें तो जीपीएस मैपिंग का मुख्य उद्देश्य स्कूलों का अपग्रेडेशन था। मैपिंग का कार्य वर्ष 2017 में ही पूर्ण भी कर लिया गया । सरकारी स्कूलों को मॉडल रूप देते हुए जीपीएस व ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम को विकसित कर छात्रहित में विद्यालयों को बेहतर बनाना इसके अहम उद्देश्य थे। मसलन यदि किसी पंचायत या प्रखंड की आबादी अधिक है और स्कूल कम है तो वहां अधिक स्कूल खोले जा सकें।  जहां हाई स्कूल नहीं हैै वहां के प्राइमरी व मिडिल स्कूल अपग्रेड हो सकें।   इसके अलावा यदि प्लस टू स्कूल की जरूरत है तो इस सिस्टम व डाटा के जरिये ही यह आभास हो जाये कि सरकारी संसाधनों का कितना अधिक उपयोग किया जा सकता है। स्कूलों की ऑनलाइन मॉनिटरिंग कैसे की जा सकती है। डाटा उपलब्ध होने की स्थिति में अधिकारियों को कार्यालय में बैठे ही कई बिन्दुओं की जानकारी कम्प्यूटर के एक क्लिक से ही मिल सकती थी।

जीपीएस प्रणाली क्यों है जरूरी

-स्कूलों का लोकेशन पता करना आसान होना चाहिए

- संसार के किसी भी कोने से वांछित स्कूल की जानकारी ली जा सके

- प्राइमरी, मिडिल व हाई स्कूलों के अपग्रेडेशन में भी  मदद मिलेगी

 - स्कूलों की दूरी से नए स्कूल खोलने की राह आसान
 होगी

-  ऑनलाइन मॉनिटरिंग में मदद मिल सकती है

- विभागीय संसाधनों के उपयोग में भी मदद मिलेगी

- शैक्षणिक डाटा संग्रहण में मदद मिलेगी

- शैक्षणिक विकास की संभावनाओं के द्वार खुलेंगे
 
- परीक्षा की ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जा सकेगी।

- स्कूल तक के स्ट्रीट मैप तैयार करने में मदद मिलेगी

स्कूलों के क्या डाटा किया जाना था अपलोड

स्कूलों के उपलब्ध स्टाफ, बिल्डिंग, फर्नीचर, शैक्षणिक सुविधा, क्लास रूम, किचन, हेडमास्टर चेंबर, रैम्प, टॉयलेट, पेयजल, खेल का मैदान, बाउंड्रीवाल, साइंस लैब, लाइब्रेरी व अन्य इन्फ्रास्ट्रक्चर

बिहार शिक्षा परियोजना परिषद द्वारा स्कूलों की जीपीएस मैपिंग के  तहत स्कूलों के स्थापित स्थल का अक्षांश व देशांतर डाटा भेजा गया था। इसके अलावा यू डायस डाटा की भी मांग की गयी थी जिसे भारत सरकार को अपडेट जानकारी के साथ भेजा जा चुका है। एनआईसी को डाटा अपलोड करना था न कि बिहार शिक्षा परियोजना परिषद को। - रवि शंकर सिंह, राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी, बिहार शिक्षा परियोजना परिषद, पटना

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