छपरा होकर आने वाली ट्रेनों में नो रूम, प्रवासियों की बढ़ी परेशानी, दो दिन बचे हैं होली में
होली से पहले ट्रेनों की लंबी वेटिंग लिस्ट ने यात्रियों को चिंता में डाल दिया है। दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और बेंगलुरू से बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश की ओर आने वाली ट्रेनों में टिकट नहीं मिल रहा है। कई लोग निजी गाड़ियों से यात्रा कर रहे हैं। विशेष ट्रेनें चलाई जा रही हैं, लेकिन वेटिंग लिस्ट सैकड़ों में है।

31 मार्च तक सभी ट्रेनों की लंबी वेटिंग सभी श्रेणी में दिख रही स्पेशल ट्रेन की आस लगाए हैं होली में खासकर दिल्ली व मुंबई से आने वाले मुसाफिर टास्क छपरा ,हमारे संवाददाता । छपरा जंक्शन के आरक्षण केंद्र की दिन सोमवार को पड़ताल की गयी। होली में अभी दो दिन का समय बचा है, लेकिन ट्रेनों की स्थिति देखकर ऐसा नहीं लग रहा कि हालात सुधरने वाले हैं। देश के महानगरों ,मुंबई, दिल्ली, चेन्नई और बेंगलुरू से बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश की ओर आने वाली लगभग सभी प्रमुख ट्रेनों में लंबी वेटिंग चल रही है। खासकर छपरा होकर गुजरने वाली ट्रेनों में तो हालात और भी खराब हैं।
ट्रेनों में टिकट नहीं मिलने के कारण कई लोग लंबी दूरी की यात्रा सड़क मार्ग से अपनी निजी गाड़ियों से कर करके घर पर होली के अवसर पर पहुंच रहे हैं। रेलवे के एडवांस रिजर्वेशन पीरियड इस समय 60 दिनों का है। इसके बावजूद होली से पहले ही नहीं, बल्कि होली के एक सप्ताह बाद तक की लगभग सभी गाड़ियों में ‘नो रूम’ की स्थिति बनी हुई है। स्लीपर से लेकर एसी कोच तक, हर श्रेणी में वेटिंग लिस्ट सैकड़ों के आंकड़े को पार कर चुकी है। हालांकि होली स्पेशल ट्रेन बंगाल दिल्ली पंजाब मुंबई के लिए चलाई जा रही है। छपरा होकर आने वाली प्रमुख ट्रेनों की स्थिति छपरा जंक्शन उत्तर बिहार का एक बड़ा रेल जंक्शन है और यहां होकर दिल्ली, मुंबई, पंजाब और दक्षिण भारत से आने वाली कई महत्वपूर्ण ट्रेनें गुजरती हैं। इनमें प्रमुख रूप से बिहार संपर्क क्रांति सुपरफास्ट ट्रेन, वैशाली एक्सप्रेस, सारनाथ एक्सप्रेस, अमृतसर-छपरा एक्सप्रेस, स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस, लोकमान्य तिलक-छपरा एक्सप्रेस, मौर्य एक्सप्रेस, लिछवी एक्सप्रेस, गंगा कावेरी सुपरफास्ट, बलिया सियालदह एक्सप्रेस और पूर्वांचल एक्सप्रेस बाघ एक्सप्रेस साबरमती एक्सप्रेस व सुपरफास्ट तथा क्लोन स्पेशल शामिल है । प्रमुख ट्रेनों में स्लीपर और थर्ड एसी में वेटिंग 170 से 300 के बीच पहुंच चुकी है, जबकि सेकेंड एसी में भी 60 से 100 तक वेटिंग देखी जा रही है। महानगरों में काम करने वाले प्रवासी मजदूर और नौकरीपेशा लोग सबसे ज्यादा परेशान दिल्ली, मुंबई व बेंगलुरू जैसे शहरों में काम करने वाले प्रवासी मजदूर और नौकरीपेशा लोग सबसे ज्यादा परेशान हैं। होली उनके लिए सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि परिवार से मिलने का मौका है। लेकिन टिकट न मिलने के कारण यह खुशी चिंता में बदलती नजर आ रही है। गुजरात के आनंद में नौकरी करने वाले परमानंद साबरमती से उनको होली में घर आना था लेकिन घर के लोगों को फोन करके इन लोगों ने बताया कि टिकट नहीं मिलने की वजह से इस बार होली में नहीं आ पाएंगे । एनसीआर में प्राइवेट जॉब करने वाले छपरा शहर के भगवान बाजार के रहने वाले रवीश कुमार कहते हैं,मैंने जनवरी के आखिर में ही टिकट देखने की कोशिश की थी, तब भी वेटिंग थी। अब तो हालत यह है कि होली के बाद की तारीख में भी कन्फर्म टिकट नहीं मिल रहा था। हम पूरे परिवार अपने निजी गाड़ी से सड़क मार्ग से छपरा पहुंचे हैं l शहर से सटे मुकरेडा गांव के रहने वाले मनीष सिंह बताते हैं कि वह किसी तरह से रिजर्वेशन लेकर होली मनाने के लिए घर पहुंचे हैंl वहीं, चेन्नई में प्राइवेट कंपनी में काम करने वाले डोरीगंज के सुमन यादव का कहना है,हर साल होली पर घर जाता हूं, लेकिन इस बार पहले दिल्ली आए फिर दिल्ली से स्पेशल ट्रेन से छपरा पहुंच रहा हूंl टिकट का कोई भरोसा नहीं है। कई लोग तत्काल टिकट, एजेंट या स्पेशल ट्रेन की उम्मीद में थे लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिला तो वह अधिक रुपए खर्च करके हवाई यात्रा कर अपने घर पहुंचे।
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