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गोदा–रंगनाथ विवाह महोत्सव के साथ पोंगल पर्व का भव्य समापन

गोदा–रंगनाथ विवाह महोत्सव के साथ पोंगल पर्व का भव्य समापन

संक्षेप:

श्रीगजेन्द्र मोक्ष देवस्थानम में पोंगल पर्व का समापन 13 जनवरी को श्रीगोदा-रंगनाथ विवाह महोत्सव के साथ हुआ। इस धार्मिक अनुष्ठान में वैदिक विधि, मांगलिक गीत और शास्त्रीय परंपराओं का समावेश था। स्वामी लक्ष्मणाचार्य ने विवाह को मानव जीवन का आवश्यक संस्कार बताया। इस अवसर पर भक्तों के बीच प्रसाद वितरण किया गया।

Jan 13, 2026 09:37 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, छपरा
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श्रीगजेन्द्र मोक्ष देवस्थानम में वैदिक परंपरा, भक्ति और सांस्कृतिक चेतना का संगम फोटो सोनपुर । श्रीगजेन्द्र मोक्ष देवस्थानम में एक माह तक चले पोंगल पर्व का समापन मंगलवार, 13 जनवरी को श्रीगोदा-रंगनाथ विवाह महोत्सव के भव्य आयोजन के साथ श्रद्धा और उल्लास के वातावरण में संपन्न हुआ। वैदिक विधि-विधान, मांगलिक गीतों और शास्त्रीय परंपराओं के साथ आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति से सराबोर कर दिया। महोत्सव के दौरान महिलाओं ने विवाह से जुड़े पारंपरिक मंगल गीत गाकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। अनुष्ठान की शुरुआत पूजन, कलश स्थापना और अग्निदेव पूजन से हुई, जिसके बाद जयमाल, कन्यादान व विवाह की अन्य रस्में विधिवत रूप से संपन्न कराई गईं।

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इस अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए स्वामी लक्ष्मणाचार्य ने विवाह को मानव जीवन का अत्यंत आवश्यक संस्कार बताया। उन्होंने कहा कि “विवाह केवल सामाजिक बंधन नहीं, बल्कि एक यज्ञ है। यह सोलह संस्कारों में प्रमुख संस्कार है, जिसके बिना वंश परंपरा का संरक्षण संभव नहीं।” उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता के द्वितीय अध्याय का उल्लेख करते हुए वैदिक परंपराओं में विवाह की मर्यादा और सामाजिक संतुलन पर विस्तार से प्रकाश डाला। स्वामी लक्ष्मणाचार्य ने बताया कि यह विवाह महोत्सव दक्षिण भारत के श्रीविल्लिपुत्तूर नगर निवासी श्री विष्णुचित की पालिता पुत्री गोदा देवी (आण्डाल) और श्रीरंगम के अधिपति भगवान श्रीरंगनाथ-जो भगवान श्रीराम के अपरावतार माने जाते हैं-के दिव्य विवाह का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि गोदा देवी तुलसी वृक्ष से प्रकट हुई थीं और वे साक्षात् भूदेवी की अवतार थीं। श्रीवैष्णव परंपरा में खरमास को धनुर्मास कहा जाता है, जिसमें इस प्रकार के उत्सवों का विशेष महत्व है। कार्यक्रम में दिलीप झा, फूल देवी, सुरेश प्रसाद, अहिल्या देवी, अजीत सिंह, अनुराधा देवी, मीरा देवी, सुलेखा शुक्ला, गायत्री शुक्ला, अशोक कुमार, नंद किशोर तिवारी, गौरव झा, गोपाल झा, शिवकुमार झा, शिवनारायण शास्त्री, आनंद सिंह सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु व गणमान्य लोग उपस्थित रहे। महोत्सव के समापन पर भक्तों के बीच प्रसाद वितरण किया गया और पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक उल्लास का माहौल बना रहा।