मढ़ौरा व्यापार मंडल के गोदाम में ही सड़ गए लाखों के चावल,जांच में सामने आया मामला
ज पांच की लीड फोटो - 15 मढ़ौरा गोदाम में सोमवार को सड़े चावल की सफाई करती महिला मजदूर मढ़ौरा, एक संवाददाता। मढ़ौरा अनुमंडल कार्यालय के समीप स्थित व्यापार मंडल के गोदाम में ही लाखों के सीएमआर के चावल सड़...

एसडीओ के निर्देश पर अमनौर एसएफसी गोदाम से लौटाया गया करीब 50 टन चावल करीब 40 लाख रुपये के सरकारी चावल के सड़ने का अनुमान मढ़ौरा, एक संवाददाता। मढ़ौरा अनुमंडल कार्यालय के समीप स्थित व्यापार मंडल के गोदाम में ही लाखों के सीएमआर के चावल सड़ गए। एसडीओ की जांच में यह मामला सामने आया तो अमनौर एसएफएसी गोदाम से उसे लौटाया गया।। गोदाम में पड़े चावल में कीड़े रेंगते दिख रहे हैं और बोरे से तेज दुर्गंध उठ रही है। हैरानी की बात यह है कि इसी सड़े-गले चावल को जन वितरण प्रणाली के तहत गरीबों तक पहुंचाने की कोशिश की गई।
सूत्रों के मुताबिक, स्थानीय गोदाम प्रबंधक ने इस चावल को अमनौर स्थित एसएफसी गोदाम में आपूर्ति कर दी थी। हालांकि, वहां जांच के दौरान चावल की खराब गुणवत्ता उजागर हो गई। मामला सामने आते ही मढ़ौरा एसडीओ निधि राज ने तत्काल जांच कराई और सड़ा चावल वापस लौटाने का निर्देश दिया। एसडीओ निधि राज ने सख्त लहजे में कहा कि, जिस चावल को जानवर भी नहीं खा सके, उसे जन वितरण उपभोक्ताओं के लिए भेजना बेहद गंभीर मामला है। इसकी गहन जांच होगी और दोषियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। प्राप्त जानकारी के अनुसार, मढ़ौरा व्यापार मंडल के किराए के गोदाम में अब भी करीब दो हजार पैकेट सड़ा हुआ चावल मौजूद है। पीडीएस के जरिए खपाने की फिराक बताया जा रहा है कि गोदाम प्रबंधक इसे किसी तरह पीडीएस के जरिए खपाने की फिराक में थे, लेकिन एसडीओ के हस्तक्षेप से यह खेल उजागर हो गया। जानकार बताते हैं कि धान कुटाई और परिवहन सहित सीएमआर चावल की कीमत लगभग 4 हजार रुपये प्रति क्विंटल पड़ती है। इस हिसाब से गोदाम में सड़े पड़े चावल की कुल कीमत करीब 40 लाख रुपये आंकी जा रही है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि सरकारी खजाने को हुए इस भारी नुकसान की जिम्मेदारी आखिर किस पर तय होगी। स्थानीय सूत्रों का यह भी कहना है कि सीएमआर गोदामों में चावल का यह खेल लंबे समय से चल रहा है। पहले पैक्स के जरिए धान की खरीद होती है, फिर चावल अधिप्राप्ति के नाम पर सीएमआर गोदाम प्रबंधक मिलरों से मोटी रकम लेकर घटिया और खराब चावल स्वीकार कर लेते हैं। बाद में यही चावल एसएफसी गोदामों में भेज दिया जाता है और पीडीएस दुकानदारों की मदद से आम लोगों तक पहुंचा दिया जाता है। इनसेट अगर बंट जाता सड़ा चावल तो कई गरीब हो जाते बीमार मढ़ौरा। संवाददाता मढ़ौरा सीएमआर गोदाम से सड़ा हुआ चावल गैर जिम्मेदाराना ढंग से एसएससी गोदाम अमनौर को भेजा गया। यदि यह चावल अमनौर एसएससी गोदाम से जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) दुकानदारों के माध्यम से गरीब उपभोक्ताओं तक पहुंच जाता, तो कई लोगों के गंभीर रूप से बीमार होने की आशंका थी। गनीमत रही कि अमनौर गोदाम प्रबंधक की सतर्कता से इस चावल की गुणवत्ता पर सवाल उठाया गया। उनके आग्रह पर एसडीओ ने मामले की जांच की जिसके बाद सड़े हुए चावल को वापस मढ़ौरा सीएमआर गोदाम भेज दिया गया। समय रहते की गई इस कार्रवाई से एक बड़े हादसे को टाल दिया गया। सड़े चावल के सेवन से होने वाली बीमारियों के संबंध में पूछे जाने पर स्थानीय चिकित्सक डॉ बीके सिंह और डॉ विजय ने बताया कि ऐसा चावल खाने से पेचिश, उल्टी, पेट दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। गंभीर स्थिति में लीवर और किडनी पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इस घटना ने खाद्यान्न भंडारण और आपूर्ति व्यवस्था में लापरवाही की ओर इशारा किया है, जिसकी गहन जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई आवश्यक है। कोट मढ़ौरा गोदाम में लाखों रुपये का चावल सड़ने के मामले की जांच कराई जाएगी। दोषी व्यक्ति पर जिम्मेदारी तय होगी और सड़े हुए चावल को मिलरों को वापस किया जाएगा। - दीपक कुमार, जिला प्रबंधक, एसएफसी

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