सारण में गांगेय डॉल्फिन संरक्षण को लेकर विशेष अभियान शुरू

Newswrap हिन्दुस्तान, छपरा
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वायरल वीडियो के बाद अलर्ट मोड में वन विभाग न विभाग फोटो:3 दिघवारा प्रक्षेत्र में बुधवार को डॉल्फिन जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को जागरूक करते वन विभाग के कर्मी छपरा, एक संवाददाता। गंगा, गंडक और...

सारण में गांगेय डॉल्फिन संरक्षण को लेकर विशेष अभियान शुरू

वायरल वीडियो के बाद अलर्ट मोड में वन विभाग फोटो:3 दिघवारा प्रक्षेत्र में बुधवार को डॉल्फिन जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को जागरूक करते वन विभाग के कर्मी छपरा, एक संवाददाता। गंगा, गंडक और घाघरा नदियों के संगम क्षेत्र वाले सारण जिले में राष्ट्रीय जलीय जीव गांगेय डॉल्फिन (सोंस) की सुरक्षा और संरक्षण को लेकर सारण वन प्रमंडल ने विशेष अभियान शुरू किया है। हाल के दिनों में नदियों के जलस्तर में उतार-चढ़ाव, बढ़ती मानवीय गतिविधियों और अवैध जालों के कारण डॉल्फिनों के प्राकृतिक आवास पर खतरा बढ़ने के बाद वन विभाग ने विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो को लेकर विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए जांच शुरू कर दी है।

वायरल वीडियो पर वन विभाग सख्त

हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ है जिसे छपरा क्षेत्र का बताया जा रहा है। वीडियो में कुछ बच्चे और वयस्क नदी में एक जीवित गांगेय डॉल्फिन के शावक को हाथों में उठाकर हवा में लहराते और उसके साथ तस्वीरें लेते दिखाई दे रहे हैं। इस घटना को वन विभाग ने बेहद गंभीरता से लिया है। सारण वन प्रमंडल के अधिकारियों ने कहा कि यह कृत्य न केवल वन्यजीव कानूनों का उल्लंघन है, बल्कि जलीय जीवों के प्रति असंवेदनशीलता को दर्शाता है। विभाग ने वीडियो की सत्यता, स्थान और उसमें शामिल लोगों की पहचान के लिए स्थानीय वन अधिकारियों को जांच का निर्देश दिया है।

डॉल्फिन फंसने पर क्या करें

वन विभाग ने नागरिकों के लिए आपातकालीन सुरक्षा प्रोटोकॉल भी जारी किया है। विभाग ने अपील की है कि यदि कोई डॉल्फिन उथले पानी, चौर या किनारे पर फंसी दिखाई दे तो लोग घबराएं नहीं और भीड़ जमा न करें। शोर-शराबा और छेड़छाड़ से डॉल्फिन को अत्यधिक तनाव होता है। निर्देश में कहा गया है कि डॉल्फिन के थूथन, पेट और ब्लो-होल को कभी न छुएं। यदि जरूरत हो तो उसे धूप से बचाने के लिए गीले सूती कपड़े या जूट की बोरी से ढंका जा सकता है लेकिन सांस लेने वाला हिस्सा खुला रहना चाहिए। वन विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि बिना विशेषज्ञों की देखरेख के डॉल्फिन को खींचकर गहरे पानी में ले जाने या पानी से बाहर उठाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। ऐसी स्थिति में तुरंत स्थानीय वन कर्मियों या सारण वन प्रमंडल को सूचना देने की अपील की गई है।

डॉल्फिन मित्र नेटवर्क का विस्तार

डॉल्फिन संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने के लिए वन विभाग मांझी, डोरीगंज, रिविलगंज और दिघवारा सहित कई तटीय क्षेत्रों में “डॉल्फिन मित्र” नेटवर्क का विस्तार कर रहा है। इसके तहत स्थानीय नाविकों, मछुआरों और युवाओं को प्रशिक्षित कर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। साथ ही अवैध नायलॉन जालों के उपयोग पर भी निगरानी रखी जाएगी।

कानून के तहत सख्त सजा का प्रावधान

वन विभाग ने चेतावनी दी है कि गांगेय डॉल्फिन को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 के तहत सर्वोच्च संरक्षण प्राप्त है। इसे नुकसान पहुंचाना, पकड़ना, पानी से बाहर निकालना या इसके साथ वीडियो एवं रील बनाना गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसे मामलों में तीन से सात वर्ष तक की जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है।सारण वन प्रमंडल ने अभिभावकों, शिक्षकों और आम नागरिकों से अपील की है कि बच्चों को वन्यजीवों और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाएं तथा किसी भी अवैध गतिविधि या आपात स्थिति की सूचना तुरंत वन विभाग को दें।

सामान्य प्रश्न

वन विभाग ने डॉल्फिन के लिए क्या सुरक्षा प्रोटोकॉल जारी किया है?
वन विभाग ने नागरिकों के लिए आपातकालीन सुरक्षा प्रोटोकॉल जारी किया है, जिसमें डॉल्फिन को उथले पानी में फंसे देखने पर घबराने और भीड़ जमा न करने की अपील की गई है।
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