बिना अनुमति यूरिया-डीएपी की बिक्री पर सख्ती, प्रशासन अलर्ट

Newswrap हिन्दुस्तान, छपरा
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सारण जिले में खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए जिला प्रशासन सतर्क हो गया है। अब किसानों को यूरिया या डीएपी केवल प्रखंड कृषि पदाधिकारी की अनुमति पर ही दी जाएगी। सभी विक्रेताओं को किसान की आवश्यकता जांचने के निर्देश दिए गए हैं। अवैध भंडारण और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

बिना अनुमति यूरिया-डीएपी की बिक्री पर सख्ती, प्रशासन अलर्ट

छपरा, हिन्दुस्तान संवाददाता: सारण जिले में खाद की कालाबाजारी रोकने और किसानों के हक की उर्वरक उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। खासकर यूरिया और डीएपी की बिक्री पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। अब बिना संबंधित प्रखंड कृषि पदाधिकारी की अनुमति के किसी भी किसान को यूरिया या डीएपी नहीं दी जाएगी। जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव के निर्देश पर जिला कृषि पदाधिकारी मधुरेंद्र कुमार सिंह लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक सभी थोक व खुदरा विक्रेताओं को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि खाद की बिक्री से पहले किसान की वास्तविक आवश्यकता की जांच अनिवार्य रूप से करें।

प्रशासन को आशंका है कि कुछ लोग अधिक मात्रा में खाद लेकर भंडारण या जिले से बाहर ऊंचे दाम पर बेचने की कोशिश कर सकते हैं। इसे रोकने के लिए सख्त कदम उठाए गए हैं। अगर कोई दुकानदार बिना अनुमति अधिक मात्रा में यूरिया या डीएपी की बिक्री करता है, तो उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों द्वारा यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि जिले में उपलब्ध स्टॉक का सही वितरण हो और किसी भी स्तर पर कमी या गड़बड़ी न हो। उर्वरक स्थिति ( टन में): - यूरिया: उपलब्धता 10490.83, वितरण 1138.86, शेष 9351.97 - डीएपी: उपलब्धता 3444.80, वितरण 178.05, शेष 3266.75 - एनपीके: उपलब्धता 2669.00, वितरण 24.15, शेष 2644.85 - पोटाश: उपलब्धता 378.85, वितरण 10.75, शेष 368.10 - एसएसपी: उपलब्धता 655.85, वितरण 4.05, शेष 651.80 कोट: जिले में किसानों को समय पर और उचित मात्रा में खाद उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता है। किसी भी स्तर पर यूरिया और डीएपी की कालाबाजारी या अवैध भंडारण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सभी दुकानदारों को निर्देश दिया गया है कि बिना प्रखंड कृषि पदाधिकारी की अनुमति के खाद की बिक्री न करें और किसान की वास्तविक आवश्यकता की जांच के बाद ही वितरण करें। साथ ही, गेहूं कटनी के बाद फसल अवशेष को जलाने से पर्यावरण को नुकसान होता है, इसलिए किसान अवशेष को नहीं जलाएं बल्कि उसका समुचित उपयोग करें। मधुरेंद्र कुमार सिंह जिला कृषि पदाधिकारी ( छपरा से प्रवीण कुमार)

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