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हत्या के मामले में आरोपित को आजीवन कारावास

हत्या के मामले में आरोपित को आजीवन कारावास

संक्षेप:

छपरा कोर्ट ने हत्या के एक मामले में आरोपी सरोज को आजीवन कारावास की सजा सुनाई और 20 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया। मृतक की पत्नी ने 2010 में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोपी पर हत्या का आरोप था, जो पुराने जमीनी विवाद से संबंधित था।

Jan 13, 2026 09:37 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, छपरा
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कोर्ट ने 20 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया मृतक की पत्नी में दर्ज कराई थी प्राथमिकी छपरा, नगर प्रतिनिधि। छपरा कोर्ट ने हत्या के एक सनसनीखेज मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी को आजीवन कारावास की सजा दी है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश 13 श्रीकांत सिंह ने जनता बाजार थाना कांड से जुड़े इस मामले में मंगलवार को सजा के बिंदु पर सुनवाई पूरी करते हुए हरपुर कोठी निवासी सरोज को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 एवं 201 के तहत दोषी ठहराया। न्यायालय ने आरोपी को आजीवन कारावास के साथ-साथ 20 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।

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अर्थदंड का भुगतान नहीं करने की स्थिति में उसे अतिरिक्त छह माह का कारावास भुगतना होगा।अदालत में प्रस्तुत अभियोजन के अनुसार, इस कांड का अनुसंधान पूरा होने के बाद अनुसंधानकर्ता ने 31 जनवरी 2011 को अंतिम प्रपत्र न्यायालय में समर्पित किया था। इसके बाद मामले की नियमित सुनवाई चली। अभियोजन पक्ष की ओर से लोक अभियोजक सर्वजीत ओझा एवं सहायक लोक अभियोजक प्रिय रंजन सिन्हा ने सरकार का पक्ष मजबूती से रखा। न्यायालय के समक्ष अनुसंधानकर्ता, चिकित्सक सहित कुल नौ गवाहों की गवाही कराई गई, जिनके आधार पर आरोपी के खिलाफ आरोप प्रमाणित हुए। मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, मृतक गया की पत्नी माया देवी ने 13 सितंबर 2010 को जनता बाजार थाना में फर्द बयान दर्ज कराया था। सूचिका ने बताया था कि घटना के दिन उनके पति पोस्ट ऑफिस से रुपये निकालने के लिए घर से निकले थे, लेकिन देर रात तक वापस नहीं लौटे। परिजनों द्वारा काफी खोजबीन किए जाने के बावजूद उनका कोई पता नहीं चल सका।अगली सुबह गांव के लोगों ने डोर स्थान के सामने नदी में एक शव तैरने की सूचना दी। मौके पर पहुंचकर देखने पर शव की पहचान माया देवी के पति के रूप में हुई। सूचिका का आरोप था कि उनके पति द्वारा रुपये निकालने की जानकारी आरोपी को हो गई थी। इसी कारण आरोपी ने उनकी हत्या कर शव को नदी में फेंक दिया। मामले में घटना का कारण पुराना जमीनी विवाद भी बताया गया था।