शहर में पर्याप्त वेडिंग ज़ोन नहीं, आयोजन स्थलों की कमी से लोग परेशान

Oct 22, 2025 09:32 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, छपरा
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बोले ग ज़ोन और बड़े आयोजन स्थलों की कमी अब बड़ी समस्या बन गई है। शादियों के सीजन में बुकिंग को लेकर मारामारी की स्थिति रहती है। कई बार लोगों को शहर से बाहर या दूसरे थानों के इलाके में विवाह स्थल बुक...

शहर में पर्याप्त वेडिंग ज़ोन नहीं, आयोजन स्थलों की कमी से लोग परेशान

छपरा, एक संवाददाता। शहर में वेडिंग ज़ोन और बड़े आयोजन स्थलों की कमी अब बड़ी समस्या बन गई है। शादियों के सीजन में बुकिंग को लेकर मारामारी की स्थिति रहती है। कई बार लोगों को शहर से बाहर या दूसरे थानों के इलाके में विवाह स्थल बुक कराने पड़ते हैं। ऊंचे किराए और पार्किंग की अव्यवस्था से भी लोग त्रस्त हैं। कई मोहल्लों में सामुदायिक भवन तो हैं, लेकिन उनकी स्थिति जर्जर है या फिर रखरखाव के अभाव में उपयोग लायक नहीं बचे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर निगम को जल्द ही कुछ स्थायी वेडिंग ज़ोन विकसित करने चाहिए, जिससे आम लोगों को राहत मिल सके।

शहर में बढ़ती आबादी और सीमित संसाधनों के कारण हालात और बिगड़ रहे हैं। कई परिवारों को मजबूरन कार्यक्रम रद्द या स्थगित तक करने पड़ते हैं। यदि नगर प्रशासन इस ओर गंभीर पहल करे तो यह समस्या स्थायी रूप से सुलझ सकती है। बयान शादी-ब्याह के मौसम में हॉल और मैरिज गार्डन की इतनी कमी है कि महीनों पहले से बुकिंग करानी पड़ती है। मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए तो यह सबसे बड़ी मुश्किल बन गई है। कई बार तो तिथि बदलनी पड़ती है। प्रशासन अगर समय रहते ध्यान दे तो आम लोगों को राहत मिल सकती है। सुमित कुमार सिंह हर साल नगर निगम विकास के नाम पर बातें तो करता है, लेकिन शहर में एक ढंग का वेडिंग ज़ोन नहीं बन पाया है। निजी बिल्डरों ने तो कई जगह कब्जा कर लिया है। अगर ईमानदार योजना बने तो शहर में व्यवस्थित आयोजन संभव हो सकता है। सुबोध कुमार छपरा शहर के विस्तार के बावजूद सामुदायिक कार्यक्रमों के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। यह शहरी नियोजन की बड़ी चूक है। नगर निकाय को चाहिए कि हर वार्ड में सामुदायिक स्थल विकसित करे ताकि भीड़ और अव्यवस्था कम हो सके। राजा खान बारात और मेहमानों के वाहनों की पार्किंग सबसे बड़ी दिक्कत बन जाती है। सड़कों पर जाम और झगड़े आम बात हैं। अगर तय जोन हों तो ट्रैफिक व्यवस्था भी संभल जाएगी। कई बार एंबुलेंस तक फंस जाती है। रामनाथ राय लोगों को निजी प्लॉट किराए पर लेकर टेंट लगाना पड़ता है, जिससे खर्च बहुत बढ़ जाता है। सरकारी स्तर पर स्थायी व्यवस्था जरूरी है। कई गरीब परिवार तो मजबूर होकर शादी छोटे पैमाने पर करते हैं। यह सामाजिक असमानता को भी दिखाता है। तवरेज आलम पुराने सामुदायिक भवनों का हाल बेहद खराब है। कई जगह तो छत टपकती है और बिजली-पानी की व्यवस्था नहीं है। अगर इन्हें सुधार दिया जाए तो शहर के आधे आयोजन यहीं हो सकते हैं। सरकार को इसे प्राथमिकता देनी चाहिए। धीरज सागर शहर के बाहर बने कुछ हॉल तक पहुंचने में परेशानी होती है। बुजुर्ग और महिलाएं दूर जाने से कतराते हैं। रात में सड़क सुरक्षा का भी अभाव है। प्रशासन अगर जोनवार व्यवस्था करे तो यह समस्या खत्म हो सकती है। अभय कुमार नगर निगम को चाहिए कि शहर के चारों ओर अलग-अलग इलाकों में जोनवार वेडिंग स्थल विकसित करे। इससे हर इलाके के लोगों को आसानी होगी। इस योजना से ट्रैफिक और ध्वनि प्रदूषण दोनों पर नियंत्रण मिलेगा। बिट्टू कुमार हर शादी में ध्वनि और ट्रैफिक को लेकर शिकायत होती है, क्योंकि निर्धारित वेडिंग ज़ोन नहीं होने से नियंत्रण मुश्किल है। इससे लोगों में नाराजगी रहती है। यह स्थिति प्रशासन की लापरवाही को उजागर करती है। संजय राय अगर प्रशासन चाहे तो अनुपयोगी सरकारी जमीन पर वेडिंग ज़ोन बनाकर लोगों को बड़ी राहत दी जा सकती है। इससे रोजगार भी बढ़ेगा और शहर को बेहतर पहचान मिलेगी। ऐसी पहल से जनता का भरोसा भी बढ़ेगा। अजय शाह छोटे आयोजनों के लिए भी जगह नहीं मिलती। होटल या बैंक्वेट बुक करना आम आदमी के बजट से बाहर हो गया है। शहर में कई खुले स्थल हैं जिन्हें व्यवस्थित किया जा सकता है। इससे लोगों को विकल्प मिलेंगे। दशरथ राय नगर परिषद को यह समझना चाहिए कि आयोजन स्थल सिर्फ शादियों के लिए नहीं, सामाजिक मेलजोल के लिए भी जरूरी हैं। यहां सांस्कृतिक और शैक्षिक कार्यक्रम भी हो सकते हैं। इससे सामाजिक सौहार्द भी बढ़ेगा। मंगल राय हर मोहल्ले में सामुदायिक भवन हैं, लेकिन रखरखाव के नाम पर खानापूर्ति होती है। कोई निगरानी तंत्र नहीं है। अगर स्थायी प्रबंधन समिति बने तो स्थिति सुधर सकती है। जनता की भागीदारी जरूरी है। मानसिंह राय शहर में शादी सीजन के दौरान बिजली और पानी की मांग बढ़ जाती है, लेकिन बिखरी व्यवस्था इसे और कठिन बना देती है। अगर जोनवार वेडिंग स्थल हों तो इन संसाधनों की आपूर्ति भी योजनाबद्ध होगी। मनोज राय प्राइवेट वेडिंग हॉल वाले मनमाने किराए वसूलते हैं। कोई सरकारी दर तय नहीं है, जिससे आम जनता परेशान है। प्रशासन दर निर्धारण करे तो लोगों को राहत मिलेगी और पारदर्शिता भी आएगी। विकास कुमार बारातियों के ठहरने की उचित व्यवस्था नहीं होती। इससे शहर की छवि पर भी असर पड़ता है। अगर बहुउद्देशीय भवन बनाए जाएं तो यह बड़ी सुविधा साबित होगी। इससे स्थानीय व्यापार को भी लाभ होगा। संतोष शर्मा छपरा में कई बार शादी के आयोजन के कारण ट्रैफिक ठप हो जाता है। अगर तय वेडिंग ज़ोन हों तो यह समस्या खत्म हो सकती है। यह शहर के विकास का संकेत भी होगा और लोगों की सुविधा बढ़ेगी। अनिल कुमार नगर निगम अगर पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप में ऐसे ज़ोन बनवाए तो राजस्व भी बढ़ेगा और सुविधा भी होगी। कई शहरों में यह मॉडल सफल हुआ है। छपरा में भी इसे अपनाने की जरूरत है। महेश प्रसाद हर साल चुनावी वादों में सामुदायिक भवन और वेडिंग ज़ोन की बात आती है, लेकिन अमल नहीं होता। जनता अब ठोस कार्रवाई चाहती है। यह मुद्दा चुनाव में भी असर डाल सकता है। अरुण कुमार नागरिकों की तरफ से बार-बार मांग उठने के बावजूद अभी तक कोई ठोस योजना नहीं बनी। प्रशासन को अब गंभीरता दिखानी चाहिए। अगर समय रहते कदम न उठाए गए तो अव्यवस्था और बढ़ेगी। आशुतोष कुमार पांडे

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