Chapra News: धन-समृद्धि की प्राप्ति व अमंगल नाश के लिए पूजे गये नाग देवता

हिन्दुस्तान, छपरा
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Chapra News: जिले भर में नाग पंचमी सोमवार को मनाई गई। भक्तों ने नाग देवता की पूजा की और उनके आशीर्वाद की याचना की। इस अवसर पर घरों पर प्रतीक चिह्न बनाए गए और नाग देवता को दूध अर्पित किया गया। मन्दिर परिसर में भारी भीड़ उमड़ी, जहां लोग विशेष विधि से पूजा अर्चना कर रहे थे।

Chapra News: धन-समृद्धि की प्राप्ति व अमंगल नाश के लिए पूजे गये नाग देवता

Chapra News: जिले भर में आस्था के साथ घरों में हुई पूजा अभिमंत्रित गोबर व सरसों के साथ घरों पर बनाये गये प्रतीक चिह्न श्रीया, नाग और ब्रह्म अर्थात शिवलिंग स्वरूप की आराधना करना अति शुभ फलदायी फोटो-11 नागपंचमी पर बाबा गुप्तेश्वर नाथ महादेव मंदिर चकनूर में नाग देव की पूजा करती महिलाएं छपरा, हमारे प्रतिनिधि। धन-समृद्धि की प्राप्ति व अमंगल नाश के लिए नाग पंचमी सोमवार को मनाई गयी। जिले भर में श्रद्धालु भक्तों ने नाग देवता की पूजा की और उनसे आशीर्वाद मांगा। सावन की तीसरी सोमवारी और नागपंचमी एक ही दिन होने से इस बार विशेष संयोग बना। नाग देवता की पूजा व भगवान शिव का जलाभिषेक कर भक्तों ने आशीर्वाद मांगा।

अभिमंत्रित गोबर, बालू व सरसों के मिश्रण को घरों के दरवातों और अन्य स्थानों पर पवित्रता के साथ लगाया गया। सर्प देव का प्रतीक चिह्न बनाया गया। उनसे सर्पदंश से मुक्त रहने की याचना की गयी। सुबह में भक्तों ने घरों की सफाई की। फिर नाग देवता की पूजा पवित्र विधि-विधान से की। शिवजी का अभिषेक किया गया। कालसर्प शांति की प्रार्थना की गयी। नाग देवता को दूध अर्पित किया गया। उन्हें धान का लावा चढ़ाया गया। नाग देवता को समर्पित है दिवस यह पर्व नाग देवता को समर्पित है। इस दिन नागदेव की पूजा करने से कुंडली में राहु और केतु से संबंधित दोष दूर होते हैं। इस दिन कालसर्प योग की पूजा कराने से कालसर्प के दोष भी दूर होते हैं। धन समृद्धि के लिए भी नाग देवता की पूजा की जाती है। माना गया है की नाग देवता धन की देवी लक्ष्मी की रक्षा करते हैं। इस दिन श्रीया, नाग और ब्रह्म अर्थात शिवलिंग स्वरूप की आराधना करना अति शुभ फलदायी माना जाता है। आठ नागों की पूजा का है विधान नाग पंचमी पर आठ नाग देव की पूजा का विधान है। इनमें वासुकि, तक्षक, कालिया, मणिभद्रक, ऐरावत, धृतराष्ट्र, कार्कोटक और धनंजय नाम के आठ नाग देव शामिल हैं। ब्रह्मा के वरदान से जनमेजय के यज्ञ में सर्पों की रक्षा आस्तिक मुनि ने पंचमी के दिन ही की थी। इस लिए इसे नाग पंचमी कहा जाता है। वैसे प्रत्येक माह शुल्क पक्ष में पंचमी आती है। प्रत्येक पंचमी को बारह नाग जोड़ों की पूजा भी कई स्थानों पर होती है। चांदी की कटोरी में दूध भरकर उसमें स्वर्ण का सर्प रखकर दान करने अथवा बहते जल में प्रवाहित करने से सांप का भय, सर्पदंश से मुक्ति और कालसर्प के दोष आदि से मुक्ति मिली है। क्यों पिलाया जाता है नागों को दूध भविष्यपुराण के अनुसार, सागर मंथन के दौरान नागों ने अपनी माता की बात नहीं मानी थी जिसके चलते उन्हें श्राप मिला था। नागों को कहा गया था कि वो जनमेजय के यज्ञ में जलकर भस्म हो जाएंगे। घबराए हुए नाग ब्रह्माजी की शरण में पहुंच गए और उनसे मदद मांगने लगे। तब ब्रह्माजी ने कहा कि नागवंश में महात्मा जरत्कारू के पुत्र आस्तिक सभी नागों की रक्षा करेंगे। ब्रह्माजी ने यह उपाय पंचमी तिथि को ही बताया था। वहीं, आस्तिक मुनि ने सावन मास की पंचमी तिथि को नागों को यज्ञ में जलने से बचाया था। इन्होंने नागों के ऊपर दूध डालकर उन्हें बचाया था। उस समय मुनि ने कहा था कि जो भी पंचमी तिथि को नागों की पूजा करेगा उसे नागदंश से कोई डर नहीं रहेगा। मांझी के रामयादि बाबा मंदिर परिसर में जुटी भीड़ मांझी। मांझी प्रखण्ड के रसीदपुर में अवस्थित रामयादि बाबा मंदिर परिसर में नाग पंचमी के अवसर पर भारी भीड़ उमड़ी और हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा की पिंडी पर दूध व लावा का अभिषेक कर पीपल के पेड़ के नीचे पूजा अर्चना की। बताते चलें कि लगभग डेढ़ सौ वर्ष पूर्व उक्त मन्दिर की स्थापना की गई थी। मन्दिर परिसर के आसपास लगे मेले में उमड़ी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस द्वारा विशेष व्यवस्था की गई है। मेले में चाट, छोले, पकौड़े, जलेबी और सौंदर्य प्रसाधन के अलावा झूला विशेष आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। यहां के सम्बंध में एक किवदंती प्रसिद्ध है कि दशकों पूर्व स्थापित मन्दिर में सांप के काटने से अचेत व्यक्ति को श्रद्धा भाव से लाकर लिटा देने मात्र से ही वह चंगा हो जाता है। बुजुर्ग पृथ्वीनाथ शर्मा बताते हैं कि यहां के जानकार लोग पीपल के पत्ते को सर्प दंश से पीड़ित मरीज के कान में डालकर एक विशेष तकनीक से मरीज के शरीर में व्याप्त विष को नष्ट कर देते हैं। गांव के लोगों का कहना है कि अस्पताल में इलाज कराए बगैर यहां लाने पर ही मरीज ठीक हो सकता है।

सामान्य प्रश्न

✦नाग पंचमी कब मनाई गई?−
नाग पंचमी सोमवार को मनाई गई।
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