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गर्मी में पशुपालक की बढ़ी परेशानी, दुग्ध उत्पादन पर असर

मढौरा में दुधारू पशुओं का गर्मी के कारण दूध घटा के कारण दूध घटा पशुओं को नहलाने-धोने के लिए नदी तालाब में पानी नहीं गर्मी की वजह से 90 हजार लीटर की जगह 45 से 50 हजार लीटर दूध का प्रतिदिन हो रहा...

गर्मी में पशुपालक की बढ़ी परेशानी, दुग्ध उत्पादन पर असर
हिन्दुस्तान टीम,छपराSat, 11 May 2024 09:30 PM
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मढौरा में दुधारू पशुओं का गर्मी के कारण दूध घटा
पशुओं को नहलाने-धोने के लिए नदी तालाब में पानी नहीं

गर्मी की वजह से 90 हजार लीटर की जगह 45 से 50 हजार लीटर दूध का प्रतिदिन हो रहा उत्पादन

न्यूमेरिक

45 हजार दुधारू पशु हैं मढौरा में

90 हजार लीटर दूध का उत्पादन रोजाना

फोटो-14- मढौरा के वार्ड 13 में गर्मी के कारण परेशान दुधारू पशु

इंट्रो- गर्मी के मौसम में पशुपालकों की परेशानी बढ़ी है। दुग्ध उत्पादन पर भी असर पड़ा है। जिले के कई प्रखंडों में नदी-तालाब सूखने से पानी व हरे चारा की कमी हो गयी है। भूसा और चोकर पर ही पशुपालकों को निर्भर रहना पड़ रहा है। पशुओं में गर्मी के कारण बुखार व गलाघोंटू बीमारी का भी प्रकोप बढ़ा है।

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मढौरा, एक संवाददाता। भीषण गर्मी के कारण मढौरा में हजारों की संख्या में दुधारू पशुओं ने अपना दूध घटा दिया है। पशुपालकों के अनुसार अधिकांश दुधारु पशु इस गर्मी के कारण बेचैन हंै और खाना भी कम कर दिया है। इस कारण दूध पहले की तुलना में आधा घट गया है। पशुपालक चंदेश्वर राय ने बताया कि भीषण गर्मी के कारण उनकी गाय को बुखार हो गया और काफी इलाज के बाद वह ठीक हो पाई। इनके पास तीन-तीन दुधारू पशु हैं जिन्होंने गर्मी के कारण दूध का उत्पादन आधा कर दिया है। उन्होंने बताया कि मढौरा में अब कोई चरागाह नहीं बचा है और पशुओं को खिलाने के लिए हरा चारा भी उपलब्ध नहीं है । ऐसे में भूसा और चोकर पर ही पशुपालकों को निर्भर रहना पड़ रहा है। इस संबंध में पूछे जाने पर पशु चिकित्सक डॉ मुकेश कुमार ने बताया कि मढौरा में लगभग 45 हजार दुधारू पशु हैं। इनमें 19 हजार भैंस जबकि 26 हजार गाय प्रजाति के पशु शामिल हैं। इन लोगों के द्वारा प्रतिदिन मढौरा में लगभग 90 हजार लीटर दूध का उत्पादन किया जाता है। जो इस गर्मी के कारण घटकर अब लगभग 45 से 50 हजार लीटर के आसपास प्रतिदिन हो गया है। इससे पशुपालक काफी परेशान हैं। पशु चिकित्सक ने बताया कि गर्म हवाओं से बचने के लिए पशुओं को छायादार जगह पर बांधना चाहिए और इन्हें सुबह -शाम नहलाना धोना चाहिए। उधर पशुपालको का रोना है कि इस भीषण गर्मी के कारण नदी ,नाले, तालाब, पोखर सभी सुख गए हैं जिस कारण पशुओं को नहलाने-धोने में काफी दिक्कत आ रही है । यही कारण है कि इस गर्मी से दुधारू पशु काफी संख्या में बीमार हो रहे हैं।

तापमान बढ़ने से पशुपालकों के सामने चारे का संकट

फोटो- 17 परसा में दुधारू पशुओं को खिलाने के लिए चारा काटता पशुपालक

परसा,एक संवाददाता। अत्यधिक गर्मी और बढ़ रहे तापमान के कारण प्रखंड के इलाकों में पशुपालकों के सामने हरे चारे का संकट आ गया हैं। चारा नहीं मिलने से पशुपालक ज्यादा परेशान हैं।खेतों में भी हरी घास या कोई चरागाह नहीं है।ऐसी स्थिति में पशुपालकों को और दिक्कतें हो रही हैं। इक्के-दुक्के पशुपालकों ने दुधारू पशुओं को खिलाने के लिए नमी अथवा खलोड़ खेतों में सूडान प्रजाति की मसूरिया लगा दी है। शोभे परसा के पशुपालक शत्रुघ्न सिंह ने बताया कि तीन मवेशी हैं,जिसमें एक दुधारू पशु है। सभी पशुओं को खिलाने के लिए करीब ढाई कट्ठे में मसूरिया की खेती डेढ़ माह पहले की है। इन दिनों यह पौधा करीब तीन फीट का हो चुका है जो पशुओं के चारा के लिए बरदान साबित हो रहा है। वहीं शोभे परसा के पशुपालक जंग बहादुर सिंह उर्फ जंघा सिंह ने बताया कि नौ मवेशी हैं। पिछले साल करीब एक बीघे में सूडान मसूरिया की खेती चारे के लिए की। करीब आठ हजार रुपए खर्च भी हुए लेकिन आवारा पशुओं के चर जाने के कारण सभी चारे नष्ट भी हो गए। उन्होंने बताया कि इस बार सुपर नेपियर घास की खेती करने का मन बनाया हूं जो बारिश गिरने के साथ शुरू होगी।पचास दिनों में हरा चारा तैयार हो जाएगा जो दुधारू पशुओं के लिए फायदेमंद होगा। पशुपालक ने बताया कि मक्का वाले इलाकों में पशुपालक मक्के का हरा और सूखा पेड़ काटकर चारे तैयार करते हैं। चोकर का भाव 30-35रुपये प्रति किलोग्राम होने के कारण आर्थिक तंगी से जूझ रहे पशुपालकों को काफी समस्याएं हो रही हैं। अन्य पशुपालकों में खासकर हरपुर, बभनगंवा, अंजनी, मठिया, चेतन परसा, अन्याय सहित कई इलाकों में अधिकांश पशुपालक हैं जो मवेशियों को रखे हैं लेकिन चारे के संकट से जूझ रहे हैं। कई पशुपालकों में चंदू सिंह, शंभु सिंह, विजय सिंह, जीतू सिंह, सत्येन्द्र सिंह, धर्मदेव राय, मरई मियां, बृजमोहन सिंह, सुरजलाल यादव, मोती राय, दहारी राय, सुगन राय सहित कई ने बताया कि बउधा नहर के पास का कुछ इलाका जहां नमी है वहीं कुछ मवेशियों को खिलाने के दौरान फेटवन के रूप में घास मिल जाती है लेकिन तापमान अधिक होने से दुधारू सहित अन्य पशु भी गर्मी से हांफ रहे हैं जिस कारण उनका खुराक भी कम हो गया। पशुपालन पदाधिकारी डॉ.अदिति ने बताया कि इन दिनों पशुओं को पर्याप्त मात्रा में पानी पिलाने और उसे दोनो समय नहलाने के साथ-साथ धूप से बचाने की जरूरत है।

गर्मी के कारण पशुपालक हो रहे 'बे-चारा'

15 - गड़खा प्रखंड के एक गांव में मवेशी को खिलाता पशुपालक

गड़खा, एक संवाददाता। गर्मी के इस मौसम में पशु पालकों की परेशानी बढ़ गई है। पशुओं के चारे का संकट पैदा होने से वे परेशान हैं। उनका कहना है कि पशुओं का पेट ठीक से नहीं भर रहा है जिससे दूध कम होने लगा है। कई परेशान पशुपालक पशुओं को बेचने के बारे में सोचने लगे हैं। पशुपालकों की माने तो घरों पर ही भूसा, चोकर, पुआल और अन्य चारा खिलाकर इनका पेट पाला जा रहा है। इन दिनों चोकर का भाव 1280 से लेकर 1300 रुपये तक पहुंच गया है। खल्ली, चारा और अन्य पशु आहारों के भावों में भी बढ़ोत्तरी देखी जा रही है। ऐसे में चारे व चोकर के भाव में हुई बेतहाशा वृद्धि के कारण पशुपालक 'बे-चारा' हो गए हैं। मजबूरन पशुपालकों को जेब ढीली कर महंगी कीमत पर चोकर व अन्य पशु आहार खरीदने को मजबूर हैं। बिहारी राय, शिवपूजन राय, शिवकुमार राय, विशुनदेव राय, ऋषि राय, शिवप्रसाद राय, आदित्य राय व गांग लव राय ने बताया कि अब तो पशुओं को पालना कठिन होता जा रहा है। चोकर, चारा और अन्य पशु आहार इतना ज्यादा महंगा हो गया है कि उनका पेट भरना ही मुश्किल हो जाता है जबकि पशु को जितना खिलाओ उतना ही दूध मिलता है। वहीं गंडकी व मही नदी में पानी की कमी से भी पशु पालक काफ़ी परेशान हैं। मौसम के बदलते मिजाज, अंधाधुंध विकास और लोगों में नदियों के प्रति सोच और व्यवहार के कारण इन नदियों में पानी की कमी होने लगी है। इससे पशु पालकों के साथ-साथ नदी किनारे रहने वाले लोगों को रहन-सहन काफी बदल गया है।

उमस भरी गर्मी से पशुओं को हो रही बीमारी

16- तरैया में गलाघोटू बीमारी से पीड़ित पशु को टीकाकरण करते पशु चिकित्सक

तरैया, एक संवाददाता। प्रखंड में कड़ाके की गर्मी से पशुओं में गलाघोटू बीमारी का प्रकोप बढ़ा है। उक्त बीमारी से पशुओं के जबड़ा व मुंह में घाव व जख्म हो जा रहा है। इससे बीमार मवेशी को खाने पीने में परेशानी हो रही है। दुधारू पशुओं में दूध उत्पादन में कमी हो गई है। गर्मी के कारण हरा चारा नहीं मिल रहा है। साथ ही इस कड़ाके की गर्मी से प्रखंड के नदी तालाब भी सूखे पड़े हैं। पानी की समस्या उत्पन्न हो गई है। जो पशु चरागाह में जाता है उसे पानी पीने को नहीं मिल पा रहा है। तरैया पशु अस्पताल के चिकित्सक डॉ राहुल आनंद ने बताया कि जिस गांव में बीमारी सूचना मिल रही है उक्त गांव जाकर पीड़ित पशुओं को टीकाकरण कर उपचार किया जा रहा है।

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