
घिर आये हैं कारे बदरा, राधा बिना ना लागे मोरा जिया
सोनपुर मेले के तीसरे दिन बिहार के कलाकारों ने कजरी और गजल की शानदार प्रस्तुति दी। गायिका सप्तमिता चटर्जी ने अपने गीतों से दर्शकों का दिल जीत लिया। भोजपुरी गायक अरुण अलबेला और अन्य कलाकारों ने भी अपनी प्रस्तुतियों से माहौल को जीवंत बना दिया। अंत में नालंदा संगीत कला विकास संस्थान के कलाकारों ने लोक नृत्य का प्रदर्शन किया।
कजरी व गजल की प्रस्तुति से सजा सोनपुर मेला का मंच तीसरे दिन बिहार के कलाकारों ने दी शानदार प्रस्तुति नालंदा संगीत कला विकास संस्थान के कलाकारों ने किया मनमोहक नृत्य प्रदर्शन फोटो 25- सोनपुर मेले के मंच पर गीत प्रस्तुत करते गायक छपरा, हमारे प्रतिनिधि। विश्व प्रसिद्ध हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेला में मंगलवार को सांस्कृतिक मंच पर बिहार के कलाकारों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से दर्शकों का दिल जीत लिया। संगीत और नृत्य की गरमाहट ने पूरे मेला परिसर का माहौल जीवंत बना दिया। कार्यक्रम की शुरुआत पटना की सुप्रसिद्ध गायिका सप्तमिता चटर्जी की प्रस्तुति से हुई। घिर आये हैं कारे बदरा, राधा बिना ना लागे मोरा जिया जैसी कजरी की प्रस्तुति कर उन्होंने अपने स्वर साधना का परिचय दिया तो श्रोता भी झूम उठे।
गजल गायकी में भी उन्होंने वाहवाही बटोरी। जिस्म की बात नहीं थी उनके दिल तक जाना था, लंबी दूरी तय करने में वक्त तो लगता है, नये परिंदों को उड़ने में वक्त तो लगता है... जैसी गजल उन्होंने छेड़ी तो माहौल रूमानी हो गया। उन्होंने बंगाली, भोजपुरी और हिंदी गीतों की ऐसी मनमोहक श्रृंखला प्रस्तुत की कि दर्शक झूम उठे। सप्तमिता ने एक दर्जन से अधिक फिल्मी और सुगम संगीत गीत गाए, जिन पर तालियों की गूंज लगातार सुनाई देती रही। उनकी मधुर आवाज़ और लयात्मक प्रस्तुति ने हर श्रोता को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद सारण के लोकप्रिय भोजपुरी गायक अरुण अलबेला मंच पर आए। उनके आगमन के साथ ही दर्शकों में उत्साह और बढ़ गया। अलबेला ने भिखारी ठाकुर और महेंद्र मिश्रा जैसे लोकनायकों के अमर गीतों को अपने अनूठे अंदाज में प्रस्तुत किया। उनके लोकगीतों की प्रस्तुति पर श्रोताओं ने जमकर तालियां बजाईं। कार्यक्रम में रंजीत गिरि और आशीष कुमार (पटना) की प्रस्तुतियों ने भी समा बांध दिया। रंजीत गिरि ने भावपूर्ण गायन से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया, जबकि आशीष कुमार की सधी हुई गायकी ने कार्यक्रम को नई ऊंचाई दी। अंत में नालंदा संगीत कला विकास संस्थान के कलाकारों ने लोक नृत्यों की शानदार प्रस्तुति दी। एक घंटे तक चले नृत्य कार्यक्रम में बिहार की पारंपरिक लोकसंस्कृति की झलक देखने को मिली। कलाकारों ने झूमर, झूमटा और अन्य लोकनृत्य शैलियों में अपने प्रदर्शन से दर्शकों को रोमांचित कर दिया। कार्यक्रम का संचालन संजय भारद्वाज ने किया। उनके संचालन से कार्यक्रम में लय और आकर्षण बना रहा। इस अवसर पर जिलाधिकारी अमन समीर, अपर समाहर्ता (विधि व्यवस्था) प्रमोद पांडेय, एनडीसी रवि प्रकाश, जिला कला संस्कृति पदाधिकारी डॉ. विभा भारती सहित कई प्रशासनिक अधिकारी एवं गणमान्य लोग उपस्थित थे। श्रोताओं ने कहा कि संगीत और नृत्य की इस शाम ने दर्शकों को बिहार की समृद्ध लोक परंपरा और आधुनिक कला का अनोखा संगम दिखाया। ---

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