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बार-बेंच का गहराया विवाद, अध्यक्ष व महामंत्री ने छोड़ा पद

हिन्दुस्तान टीम,छपराNewswrap
Tue, 06 Jul 2021 08:10 PM
बार-बेंच का गहराया विवाद, अध्यक्ष व महामंत्री ने छोड़ा पद

छपरा। नगर प्रतिनिधि

छपरा विधि मंडल कैंपस में हो रहे भवन निर्माण को लेकर कोर्ट प्रशासन व विधिमंडल के आमने-सामने होने से बार-बेंच के बीच विवाद गहरा गया है। कोर्ट प्रशासन ने भवन निर्माण के कार्यों पर रोक लगायी तो विधि मंडल के अध्यक्ष व महामंत्री ने पद से त्यागपत्र दे दिया। इस घटना क्रम के बाद से टकराव और बढ़ गया है। विधि मंडल की दलील है कि कोर्ट प्रशासन को भवन निर्माण के कार्यों पर रोक लगाने का कोई भी अधिकार नहीं है। विधिमंडल अपनी जमीन पर विधान पार्षद के ऐच्छिक कोष से 10 लाख रुपये से भवन का निर्माण करा रहा है। मंगलवार को कार्यसमिति की अहम बैठक हुई। बैठक में भवन निर्माण के कार्यों में आए गतिरोध व न्यायपालिका के हस्तक्षेप पर विस्तार से चर्चा की गई। चर्चा में यह बात सामने आयी कि स्टेट बार काउंसिल भी छपरा के अधिवक्ताओं के हितों की सुरक्षा करने में पूरी तरह से असफल रहा है। ऐसे में सभी पदाधिकारी व सदस्य अपने पद से त्यागपत्र दे रहे हैं। त्यागपत्र की जानकारी स्टेट बार को दी गई। कार्यसमिति की बैठक के बाद विधि मंडल के अध्यक्ष अवधेश्वर सहाय व महामंत्री रवि रंजन प्रसाद सिंह ने संयुक्त रूप से प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि छपरा विधि मंडल के अधिवक्ताओं की समस्याओं के समाधान के लिए पांच अधिवक्ताओं का एक शिष्टमंडल पूर्व न्यायाधीश दिनेश कुमार सिंह व स्टेट बार काउंसिल के अध्यक्ष रमाकांत शर्मा से भी मिला था और गतिरोध को समाप्त कराने का अनुरोध किया गया था। पूर्व न्यायाधीश दिनेश कुमार सिंह ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन भी दिया था कि अधिवक्ताओं के हित में जो भी नियम अनुकूल मदद की आवश्यकता होगी वह उनके स्तर पर जरूर होगा। महामंत्री ने कहा कि विधि मंडल के पश्चिमी दीवार से सटे शेड को को हटाकर विधान पार्षद वीरेंद्र नारायण यादव के कोष से दस लाख की लागत से एक भवन बनाया जा रहा था, जिस पर जिला जज ने आपत्ति प्रकट की और उनके भेजे गए प्रतिवेदन के आधार पर उच्च न्यायालय ने भी निर्माण कार्य को रोक दिया। इसको लेकर 28 -29 मार्च को छपरा विधिमंडल के आह्वान पर कोर्ट कार्य का भी बहिष्कार अधिवक्ताओं ने किया था। महामंत्री ने कहा कि छपरा विधिमंडल को अलग से जमीन आवंटित की गई है। पूर्व जिला जज नवनीत कुमार पांडेय के पत्र के अनुसार भी छपरा विधि मंडल का स्वतंत्र अस्तित्व है। महामंत्री ने बताया कि स्टेट बार काउंसिल भी छपरा बार काउंसिल को सहयोग नहीं कर रहा है। इसके कारण भवन निर्माण के लिए आवंटित लगभग चार करोड़ रुपये डूबने की स्थिति में है। उन्होंने कहा कि चार करोड़ रुपए डूबने के कारण विधि मंडल को अपूरणीय क्षति होगी। अध्यक्ष अवधेश्वर सहाय ने भी स्टेट बार काउंसिल के सदस्यों के सहयोग नहीं मिलने की बात पुरजोर तरीके से उठाई। प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल छपरा बार काउंसिल के अन्य सदस्यों ने भी एक स्वर से कहा कि विधिमंडल को कमजोर करने का भी प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को भी विवाद के बारे में जानकारी दी गई है। इस्तीफा देने वालों में निर्मल कुमार श्रीवास्तव, सुनील कुमार, शैलेंद्र कुमार सिंह, शशिकांत पाठक, प्रकाश चंद्र वर्मा,किशोर कुमार सिंह, अखिलेश कुमार सिंह, सुरेंद्र बहादुर पांडेय, सुनील कुमार सिंह, निर्मल कुमार, मदनजीत शरण, मदन मोहन सिंह, बबुआनन्द द्विवेदी, बालमुकुंद चौहान, मंजू कुमारी, उर्मिलेश कुमार व अन्य शामिल है। वही कोट प्रशासन का गाना है कि भवन निर्माण का कार्य नियम के विपरीत हो रहा था पटना हाई कोर्ट से दिशा निर्देश के आलोक में निर्माण कार्य को रोका गया है।

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