धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष प्रदाता तीर्थ है : प्रिया किशोरी

Newswrap हिन्दुस्तान, छपरा
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सदर प्रखंड के मुसेपुर में आयोजित पांच दिवसीय शिव परिवार प्राण-प्रतिष्ठा सह रूद्र महायज्ञ में अयोध्या से आई कथावाचिका सुश्री प्रिया किशोरी जी ने राम कथा का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि राम कथा सुनने से मानसिक शांति, पवित्रता और आध्यात्मिक ज्ञान मिलता है। यज्ञ में भक्तों की भक्ति और सामाजिक एकत्रीकरण का महत्व भी बताया गया।

धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष प्रदाता तीर्थ है : प्रिया किशोरी

फोटो- 2- सदर प्रखंड के मुसेपुर में आयोजित पांच दिवसीय शिव परिवार प्राण-प्रतिष्ठा सह रूद्र महायज्ञ महायज्ञ में रामकथा सुनाती अयोध्या से आई कथावाचिका सुश्री प्रिया किशोरी जी डोरीगंज। एक संवाददाता मुसेपुर ग्राम स्थित मनसा मां शिव मंदिर के प्रांगण में कथावाचिका सुश्री प्रिया किशोरी जी ने राम कथा का महात्मय बताते हुए कहा कि राम कथा सुनने से मन को शांति ,मानसिक पवित्रता और आध्यात्मिक ज्ञान की प्राप्ति होती है| यह कथा मनुष्यों के भय, दुखों और अज्ञानता को दूर करती है, वहीं जीवन में मर्यादा भक्ति और सद्गुणों का संचार करती है। इससे प्रभु की असीम कृपा प्राप्त होती है।

एक बार त्रेता जुग माही। शम्भु गए कुंभज ऋषि पाही। एक बार त्रेतायुग में शंकर भगवान अपनी अर्धांगिनी सती को लेकर के अगस्त मुनि के आश्रम गए| अगस्त मुनि शंकर भगवान मां सती को देखकर नाचने लगे। मुनि अगस्त शंकर भगवान को श्रेष्ठ आसन पर बैठा कर चरणों का पूजन करते हैं और प्रभु को राम जी की कथा का पान करवाते हैं। इस पावन भूमि पर भारत की कथावाचिका अयोध्या से आई प्रिया किशोरी जी ,तबला वादक -धर्मराज जी, पैड वादक - रवि शास्त्री जी, कीबोर्ड पर- मुन्ना जी , भजन व्यास - जसपाल जग्गी जी ,सुशील कुमार और मुख्य आचार्य शिव कुमार पांडे जी ने यज्ञ का अनुष्ठान किया है। यज्ञ स्थल पर आए भक्तजनों के बीच सोमवार को अपने प्रवचन में प्रिया किशोरी जी ने कहा कि भारत की संस्कृति का आधार यज्ञ है। इसमें देव पूजन, दान और सामाजिक एकत्रीकरण तीन कार्य प्रमुख होते हैं। देव-ऋषियों के आह्वान व आहुति के साथ ही यज्ञ स्थल पर होने वाले संत समागम की ज्ञानाग्नि में अविद्या व अज्ञानता रूपी अंधकार का भी नाश होता है। यज्ञ के तीसरे दिन मंगलवार को भक्तों के बीच कथावाचिका- सुश्री प्रिया किशोरी जी ने कहा कि भारत की शक्ति का आधार ब्रह्मविद्या है। ब्रह्मविद्या से ही सारी अर्थकारी व अपरा विद्याएं उत्पन्न हैं। सच्चे हृदय वाले भक्त भी इस तीर्थ की शक्ति का अनुभव करते हैं। आधुनिक काल में तीर्थों की कथा पर संदेह करते हुए उससे सम्बंधित प्रमाण मांगने का फैशन चल पड़ा है। भगवान श्रीराम के आविर्भाव और अभ्युदय की कथा की साक्षी धर्मनगरी चिरांद के गर्भ से बहुत से ऐसे पुरातात्विक प्रमाण मिले हैं जो इस परम तीर्थ की कथा को सत्य सिद्ध करते हैं। यहां के संतों व बुद्धिजीवियों ने उन प्रमाणों के आधार पर इस परमतीर्थ की गरिमा को पुनर्स्थापित करने का प्रयास शुरू कर दिया है लेकिन, यह कार्य और संकल्प संतों की साधना और विद्वतजनों के सतत प्रयास से ही पूर्ण हो सकता है।

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