Chapra News: वेतन के इंतजार में नवनियुक्त लिपिक, डीएम कार्यालय के समक्ष किया प्रदर्शन
Chapra News: सारण जिले के नव नियुक्त विद्यालय लिपिक पिछले आठ माह से वेतन के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने सोमवार को कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया और जिला पदाधिकारी से हस्तक्षेप की मांग की। लिपिकों का कहना है कि समय पर वेतन नहीं मिलने से उन्हें गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।

Chapra News: आठ माह से वेतन लंबित, आर्थिक संकट में नवनियुक्त विद्यालय लिपिक प्रदर्शनकारी नव नियुक्त लिपिकों ने जिला पदाधिकारी से पहल की मांग की फोटो 5 सोमवार को अपनी मांगों के समर्थन में कलेक्ट्रेट में डीएम कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन करते शिक्षा विभाग के नव नियुक्त लिपिक छपरा, नगर प्रतिनिधि। आठ माह से अधिक समय से वेतन लंबित रहने के कारण आर्थिक संकट से जूझ रहे सारण जिले के नवनियुक्त विद्यालय लिपिक सोमवार को कलेक्ट्रेट पहुंच गए। करीब एक वर्ष से विद्यालयों में सेवा देने के बावजूद नियमित वेतन नहीं मिलने से आक्रोशित लिपिकों ने डीएम कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन कर अपनी मांगों को रखा। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सेवा में योगदान देने के बाद वे पूरी निष्ठा और ईमानदारी से अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं, लेकिन समय पर वेतन नहीं मिलने से उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। किसी को एक-दो तो किसी को तीन-चार माह का ही भुगतान
नव नियुक्त विद्यालय लिपिकों की समस्या
प्रदर्शन में शामिल लिपिकों ने बताया कि जिले के विभिन्न विद्यालयों में योगदान दिए उन्हें लगभग एक वर्ष पूरा होने वाला है। इसके बावजूद वेतन भुगतान की स्थिति संतोषजनक नहीं है। किसी कर्मचारी को महज एक-दो माह का वेतन मिला है तो किसी को तीन-चार माह का भुगतान किया गया है। वहीं, अधिकांश नवनियुक्त विद्यालय लिपिकों का आठ माह से अधिक का वेतन अब भी लंबित है। लिपिकों का कहना था कि लंबे समय तक वेतन नहीं मिलने से उनके परिवार की आर्थिक स्थिति लगातार प्रभावित हो रही है। किराया, बच्चों की पढ़ाई और घर खर्च चलाना मुश्किल
आर्थिक दबाव और मानसिक तनाव
लिपिकों ने कहा कि वेतन नहीं मिलने से घर-परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। मकान का किराया, बच्चों की पढ़ाई, राशन, इलाज और दैनिक जरूरतों से जुड़े खर्चों का भुगतान करना कठिन हो रहा है। कई कर्मचारी परिवार की मूलभूत जरूरतों को पूरा करने के लिए भी आर्थिक परेशानी का सामना कर रहे हैं। समय पर वेतन नहीं मिलने से मानसिक तनाव भी बढ़ रहा है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि नियमित नौकरी करने के बावजूद वेतन के लिए इस तरह परेशान होना उनके लिए बेहद पीड़ादायक स्थिति है। नियमावली में वेतनमान का प्रावधान, नियमित वेतन भी नहीं प्रदर्शन में शामिल लिपिकों ने कहा कि संबंधित नियमावली में वेतनमान दिए जाने का स्पष्ट प्रावधान है। लेकिन वर्तमान स्थिति यह है कि वेतनमान तो दूर, नियमित मासिक वेतन का भुगतान भी नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि लगभग एक वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद भी यदि आठ-आठ माह का वेतन लंबित रहें तो कर्मचारियों के लिए आर्थिक स्थिति संभालना बेहद कठिन हो जाता है। नवनियुक्त विद्यालय लिपिकों ने जिला पदाधिकारी से पूरे मामले में मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए हस्तक्षेप करने की मांग की। उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देकर सभी लंबित बकाया वेतन की शीघ्र निकासी और भुगतान सुनिश्चित कराने का अनुरोध किया। लिपिकों ने इस संबंध में जिला पदाधिकारी कार्यालय को लिखित आवेदन भी सौंपा। आवेदन के माध्यम से उन्होंने कहा कि लंबे समय से लंबित वेतन का भुगतान होने से आर्थिक संकट से गुजर रहे कर्मचारियों और उनके परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी। प्रदर्शन में विवेक कुमार सिंह, शुभम कुमार सिंह, ऋषभ कुमार सिंह, आशुतोष कुमार सिंह, आदित्य कुमार, मयंक मनी, अमन कुमार सिंह, दिनेश कुमार, मयंक कुमार, अमरेश पाठक सहित अन्य नवनियुक्त विद्यालय लिपिक शामिल थे।


