भिखारी ठाकुर व्यक्ति नहीं, एक विचार हैं : राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान
राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि भिखारी ठाकुर एक व्यक्ति नहीं बल्कि एक विचार हैं। उन्होंने कई सामाजिक कुरुतियों पर प्रहार करते हुए समाज को जागरुक किया।

भोजपुरी के युगपुरुष और लोक कलाकार भिखारी ठाकुर की जयंती पर उनकी जन्मस्थली कुतुबपुर दियारा में गुरुवार को आयोजित समारोह में राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि यह संसार एक वृक्ष के समान है, जिस पर काव्य रूपी अमृत फल लगते हैं। संगति और संस्कृति रूपी फल उस वृक्ष को और अधिक सुशोभित करते हैं। साहित्य और कला ही मानव जीवन को सार्थक बनाते हैं।
उन्होंने कहा कि भिखारी ठाकुर का साहित्य और रंगकर्म इतना व्यापक और गहन है कि वह कला की सामाजिक सार्थकता को सिद्ध करता है। उपनिषदों का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि जब कला लोकजीवन से जुड़ती है, तब वह केवल मनोरंजन नहीं करती, बल्कि समाज का मार्गदर्शन भी करती है।
राज्यपाल ने कहा कि आज हम यहां एक ऐसे महान लोक कलाकार, समाज सुधारक और भोजपुरी के युगपुरुष के सम्मान में एकत्र हुए हैं, जिनका नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है—भोजपुरी के शेक्सपियर भिखारी ठाकुर। उन्होंने न केवल बिहार या देश में, बल्कि पूरे विश्व में भोजपुरी भाषा और संस्कृति को पहचान दिलाई। यह हम सभी के लिए गर्व की बात है।”
उन्होंने कहा कि 18 दिसंबर 1887 को सारण जिले के तत्कालीन दुर्गम और सुविधाविहीन कुतुबपुर दियारा गांव में जन्मा एक साधारण परिवार
का बालक अपनी कला और साहित्य के बल पर असाधारण ऊंचाइयों तक पहुंचा। भिखारी ठाकुर ने अपने नाटकों और गीतों के माध्यम से समाज के उन अंधेरे कोनों में रोशनी पहुंचाई, जहां तक कोई पहुंचने का साहस नहीं करता था।
राज्यपाल ने कहा कि जिस दौर में देश गुलामी की जंजीरों में जकड़ा था, उस समय महात्मा गांधी ने अहिंसा को अपना हथियार बनाया, वहीं भिखारी ठाकुर ने अपने नाटक और लोकगीतों को सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बनाया। उन्होंने नशाखोरी, बेमेल विवाह, स्त्रियों की दुर्दशा और बेटी बेचने जैसी कुरीतियों पर प्रहार कर समाज को जागरूक किया। उनकी लेखनी और रंगमंच ने घर-घर में सामाजिक चेतना जगाई।
उन्होंने कहा कि विश्वप्रसिद्ध साहित्यकार राहुल सांकृत्यायन ने भिखारी ठाकुर को ‘भोजपुरी का अनगढ़ हीरा’ कहा, जबकि जगदीश चंद्र माथुर ने उन्हें ‘भरतमुनि की परंपरा का कलाकार’ बताया। भिखारी ठाकुर केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक विचार हैं, जो भोजपुरी साहित्य और लोकसंस्कृति के माध्यम से निरंतर जीवित है। समारोह के अंत में राज्यपाल ने कहा कि सामाजिक न्याय, लोकभाषा और लोकसंस्कृति के प्रति भिखारी ठाकुर का योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।
(छपरा, हमारे प्रतिनिधि)

लेखक के बारे में
Jayesh Jetawatजयेश जेतावत बिहार में राजनीतिक, सामाजिक और आपराधिक घटनाओं पर गहराई से नजर रखते हैं। बीते 10 सालों से स्थानीय मुद्दों को कवर कर रहे हैं। बिहार में पर्यटन एवं इंफ्रास्ट्रक्चर के मुद्दे पर भी गहरी पकड़ रखते हैं। जयेश मूलरूप से मेवाड़ क्षेत्र (राजस्थान) के रहने वाले हैं और लाइव हिन्दुस्तान में 4 साल से बिहार टीम का हिस्सा हैं। इससे पहले ईटीवी भारत, इंडिया न्यूज, वे2न्यूज और टाइम्स ऑफ इंडिया में विभिन्न पदों पर काम कर चुके हैं। समाचार लेखन के अलावा साहित्यिक पठन-लेखन में रुचि है।
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