Hindi NewsBihar NewsCBI will investigate all digital arrest cases in Bihar Patna has the highest number of cases
बिहार के सारे डिजिटल अरेस्ट मामलों की जांच CBI करेगी; पटना में सबसे ज्यादा केस

बिहार के सारे डिजिटल अरेस्ट मामलों की जांच CBI करेगी; पटना में सबसे ज्यादा केस

संक्षेप:

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राज्य के सभी साइबर व पुलिस थानों से डिजिटल अरेस्ट केस का ब्योरा मांगा गया है। दरअसल, डिजिटल अरेस्ट के ज्यादातर मामलों में साइबर ठग सीबीआई, ईडी का भय दिखा कर ही पीड़ितों को बंधक बनाते हैं, फिर डरा-धमकाकर बड़ी राशि अपने खाते में ट्रांसफर करा लेते हैं।

Dec 11, 2025 10:54 pm ISTsandeep हिन्दुस्तान ब्यूरो, पटना
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बिहार के साइबर और पुलिस थानों में दर्ज डिजिटल अरेस्ट के सभी मामलों की जांच अब सीबीआई करेगी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर यह सभी मामले सीबीआई को स्थानांतरित किए जायेंगे। साइबर अपराध से जुड़े मामलों की नोडल आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) इसको लेकर तैयारी में जुटी है। ईओयू के मुताबिक बिहार में इस साल डिजिटल अरेस्ट के 100 से अधिक मामले दर्ज हुए हैं। इनमें आधे मामले सिर्फ राजधानी पटना में घटित हुए। ईओयू सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राज्य के सभी साइबर व पुलिस थानों से डिजिटल अरेस्ट केस का ब्योरा मांगा गया है।

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दरअसल, डिजिटल अरेस्ट के ज्यादातर मामलों में साइबर ठग प्रवर्तन एजेंसियों (सीबीआई, ईडी आदि) का भय दिखा कर ही पीड़ितों को बंधक बनाते हैं, फिर डरा-धमकाकर बड़ी राशि अपने खाते में ट्रांसफर करा लेते हैं। जांच में इनके देशव्यापी संगठित गिरोह की आशंका को देखते हुए ही उच्चतम न्यायालय ने सीबीआई को इस नेटवर्क को तोड़ने की जिम्मेवारी सौंपी है।

डिजिटल अरेस्ट से जुड़े केसों की अब तक हुई जांच में बैंकों को भी संदेह के घेरे में रखा गया है। ऐसे मामलों में अधिकतम उन्हीं लोगों को निशाना बनाया गया है, जिनके बैंक खाते में बड़ी रकम देखी गयी। इसके साथ ही साइबर ठगों के बैंक खाते में ट्रांसफर हुई बड़ी राशि को रोकने की भी कोई व्यवस्था नहीं मिली। उदाहरण के रूप में पिछले साल पटना विवि की सेवानिवृत्त महिला प्रोफेसर को मनी लांड्रिंग केस में गिरफ्तारी का भय दिखा कर तीन करोड़ रुपये से अधिक की ठगी कर ली गयी। ऐसे में बैंक से जुड़े कर्मियों की साठगांठ की आशंका को ध्यान में रखते हुए जांच का दायरा बढ़ा है।

सूत्रों के मुताबिक आरबीआई के स्तर पर साइबर ठगों के बैंक खातों की पहचान कर अपराध की कमाई को फ्रीज करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग व्यवस्था लागू करने पर विचार किया जा रहा है। डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी का नया तरीका है। इन मामलों में ठग खुद को कानून प्रवर्तन अधिकारी बताकर लोगों को ऑडियो या वीडियो कॉल करके डराते हैं और उन्हें उनके घर में डिजिटल तौर पर बंधक बना लेते हैं। फिर कार्रवाई का भय दिखा कर उनके बैंक खातों से बड़ी राशि ट्रांसफर करा ली जाती है।

सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे मामलों पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा था कि डिजिटल अरेस्ट ठगी की जांच अब सीबीआई करेगी। यह जांच अन्य किसी घोटाले से अलग और प्राथमिकता के आधार पर की जाएगी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली खंडपीठ ने सीबीआई को इन मामलों में बैंकरों की भूमिका की जांच के भी निर्देश दिए हैं।