
सृजन घोटाला: CBI फिर से खंगाल रही कागजात, 101 करोड़ की हेराफेरी में बैंक खातों की बन रही लिस्ट
बता दें कि जिला परिषद के खाते से गायब 101.78 करोड़ राशि के मामले में लिपिक राकेश कुमार यादव (पूर्व नाजिर) को बर्खास्त किया जा चुका है। राकेश घोटाले में जेल भी गए थे। जेल से निकलने के बाद विभागीय कार्यवाही में राकेश को दोषी ठहराते हुए सेवामुक्त किया गया।
बिहार के चर्चित सृजन घोटाले में सीबीआई ने फिर से कागजातों को खंगालना शुरू कर दिया हैै। भागलपुर में जिला परिषद के खाते से 101 करोड़ 78 लाख रुपये की अवैध निकासी के मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने फिर से जांच शुरू की है। पटना स्थित सीबीआई कार्यालय में पिछले तीन दिनों से तमाम खातों की विवरणी से क्रॉस वेरिफिकेशन किया जा रहा है। सीबीआई से मांगी गई जानकारी और महत्वपूर्ण दस्तावेज के साथ पिछले तीन दिनों से जिला परिषद के अपर मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी (एसीईओ) पटना में हैं। किस खाते से कितनी राशि घोटालेबाजों ने किस बैंक के जरिए सेंधमारी की थी, इसकी विवरणी तैयार हो रही है। इस मामले में सीबीआई ने चार्जशीट भी दाखिल कर दी है। अब दोबारा क्यों जांच की जा रही है? इस सवाल का जवाब जिला परिषद के कर्मियों को भी नहीं है।
जानकारी के मुताबिक, महालेखाकार की ऑडिट रिपोर्ट पर भी काफी देर तक मंथन किया गया। महालेखाकार की टीम ने 18 दिसंबर 2021 को तमाम खातों की जांच की थी। टीम ने पांच से 10 साल पुराने कागजातों और रजिस्टर की जांच की थी। ऑडिट अफसरों ने पिछले 10 सालों में मदवार सरेंडर किये फंड की सूची भी मांगी थी। जो फंड लैप्स कर गया है, उसकी लिस्ट भी मांगी थी। टीम ने घोटाले में फंसे जिला परिषद कर्मियों द्वारा डील की गई योजनाओं की फाइल के साथ-साथ पिछले 10 साल में किस-किस कर्मियों ने कौन सी फाइलें डील की थीं, इसकी रिपोर्ट भी मांगी थी।
लिपिक को किया गया है बर्खास्त
बता दें कि जिला परिषद के खाते से गायब 101.78 करोड़ राशि के मामले में लिपिक राकेश कुमार यादव (पूर्व नाजिर) को बर्खास्त किया जा चुका है। राकेश घोटाले में जेल भी गए थे। जेल से निकलने के बाद विभागीय कार्यवाही में राकेश को दोषी ठहराते हुए सेवामुक्त किया गया। करीब तीन साल पहले हुई कार्यवाही के बाद सेवानिवृत्ति लाभ से भी राकेश वंचित हैं।





