सोवां गांव में कायम है होली मनाने का अनोखा रिवाज
पैगाम पैगाम होली के दिन मांसाहार से दूर रहते हैं गांव के लोग एक ही स्थान पर पूरे गांव के लोग खेलते हैं होली कृष्णाब्रह्म, निज प्रतिनिधि। रंगोत्सव एवं आनंदोत्सव का आध्यत्मिक पर्व होली भाईचारे के साथ...

पैगाम होली के दिन मांसाहार से दूर रहते हैं गांव के लोग एक ही स्थान पर पूरे गांव के लोग खेलते हैं होली कृष्णाब्रह्म, निज प्रतिनिधि। रंगोत्सव एवं आनंदोत्सव का आध्यत्मिक पर्व होली भाईचारे के साथ समाज में शांति का पैगाम देता है। इस दिन आम से खास लोग आपसी कटुता भुलाकर जमकर खुशियां मनाते हैं। बुढ़े-बुजुर्गों के साथ नौजवान, नन्हें-मुन्ने बच्चे एवं महिलाएं भी एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर होली का जश्न मनाती हैं। देखा जाय तो होली उमंग एवं उत्साह का ही त्योहार है। परन्तु, क्षेत्र का सोवां एक ऐसा गांव है, जहां होली मनाने का अनोखा रिवाज सदियों से कायम है।
पूरे गांव के लोग पर्व के दिन मांसाहारी भोजन से परहेज करते हैं। सोवां गांव में होली के दिन अद्भूत नजारा देखने को मिलता है। दोपहर तक रंगों से होली खेलने के बाद सभी लोग नए कपड़े पहन गांव के पूरब स्थित पौराणिक बाबा भूवरनाथ शिव मंदिर में अबीर चढ़ाते हैं। उसके बाद एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर लोग आपस में गले मिलते हैं। ग्रामीणों की जुटी भीड़ के चलते मंदिर के पास का नजारा बहुत ही वृहंगम व मनोरम होता है। सबसे खास बात यह है कि होली के दिन ग्रामीण मांसाहार का सेवन नहीं करते हैं, बल्कि घर में बने पुआ-पुरी जैसे पारंपरिक पकवान खाते और खिलाते हैं। स्थानीय रूदल यादव, विकास सिंह, उपेन्द्र साह, अनिल कुशवाहा आदि ने बताया कि गांव के पूर्वजों द्वारा शुरू की गई यह प्रथा हमारी सभ्यता और संस्कृति को मजबूती प्रदान करती है। साथ ही लोगों को एक सूत्र में पिरोकर भाईचारे के साथ प्रेम पूर्वक जीवन जीने की सीख भी देती है।
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