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गंगा किनारे स्थित समाधि स्थल पर मनाई गई त्रिदंडी स्वामी की पुण्यतिथि

पेज चार की लीड ------------ महान संत दर्शन-पूजन के लिए बिहार के अलावा झारखंड, यूपी, एमपी, राजस्थान और अन्य राज्यों से भी कई शिष्य समाधि स्थल पहुंचे थे चरित्रवन समाधि स्थल पर दर्शन-पूजन को पहुंचे...

गंगा किनारे स्थित समाधि स्थल पर मनाई गई त्रिदंडी स्वामी की पुण्यतिथि
हिन्दुस्तान टीम,बक्सरThu, 07 Dec 2023 09:30 PM
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महान संत

दर्शन-पूजन के लिए बिहार के अलावा झारखंड, यूपी, एमपी, राजस्थान और अन्य राज्यों से भी कई शिष्य समाधि स्थल पहुंचे थे

चरित्रवन समाधि स्थल पर दर्शन-पूजन को पहुंचे शिष्य

दर्शन-पूजन के बाद हजारों लोगों ने किया प्रसाद ग्रहण

02 दिसंबर 99 को स्वामी जी ने लौकिक देह का त्याग किया था

फोटो संख्या 05 कैप्शन - चरित्रवन स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर में जीयर स्वामी जी महराज के साथ शाहाबाद रेंज के डीआईजी नवीनचन्द्र झा।

फोटो संख्या 09 कैप्शन- चरित्रवन स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर में स्थापित त्रिदंडी स्वामी जी महाराज की मूर्ति।

फोटो संख्या 10 कैप्शन- गुरूवार को चरित्रवन में कथा कहते जीयर स्वामी जी महाराज।

फोटो संख्या 12 कैप्शन-गुरुवार को चरित्रवन स्थित समाधि स्थल पर जुटी श्रद्धालुओं की भीड़।

बक्सर, हिन्दुस्तान संवाददाता। भारतीय ऋषि परंपरा के ध्वजवाहक और महान संत साकेतवासी त्रिदंडी स्वामी जी महाराज की पुण्यतिथि गुरुवार को मनाई गई। जिला मुख्यालय के चरित्रवन में गंगा किनारे स्थित समाधि स्थल पर उनके शिष्यों की काफी भीड़ जुटी।

बताया जाता है कि भारत के महान संत त्रिदंडी स्वामी जी महाराज का जन्म इसी जिले के राजपुर थाने के सिसराढ़ गांव में 1905 में हुआ था। बचपन में ही इनका झुकाव आध्यात्म की ओर हो गया। कुछ ही समय बाद ये शास्त्रों में पारंगत हो गए। एक ऋषि सरीखा जीवन बिताते हुए उन्होंने सनातन धर्म की रक्षा के लिए जो किया, उसकी अकथ कहानी है। उन्हें शेषावतार माना गया। बाद में तो उनकी ख्याति देश से बाहर विदेशों तक फैल गई। उनके शिष्यों की तादाद करोड़ों में है। 2 दिसंबर 1999 को स्वामी जी ने लौकिक देह का त्याग किया था और चरित्रवन में गंगा किनारे समाधि ली थी। उसी जगह पर बाद में भव्य मंदिर बनाया गया। इस मंदिर में उनकी प्रतिमा स्थापित है और चरण-पादुका रखी है। गुरुवार को पुण्यतिथि होने के चलते समाधि स्थल पर दर्शन-पूजन के लिए काफी संख्या में लोग जुटे। उनके सबसे प्रिय शिष्य जीयर स्वामी जी महाराज की मौजूदगी में पूजन का कार्यक्रम आयोजित हुआ। महिलाएं काफी संख्या में मौजूद रही। वहीं दर्शन-पूजन के लिए बिहार के अलावा झारखंड, यूपी, एमपी, राजस्थान और अन्य राज्यों से भी कई शिष्य समाधि स्थल पहुंचे थे। सभी ने चरण पादुका पूजन के बाद प्रसाद ग्रहण किया।

शाहाबाद के डीआईजी भी पहुंचे दर्शन के लिए

शाहाबाद रेंज के डीआईजी नवीन चंद्र झा भी गुरुवार को त्रिदंडी स्वामी समाधि स्थल पर पहुंचे। उन्होंने भी स्वामी जी की समाधि का दर्शन-पूजन किया। साथ ही प्रसाद ग्रहण किया। इस बीच सदर एसडीपीओ धीरज कुमार के नेतृत्व में टाउन और औद्योगिक थानों की पुलिस मौजूद रही।

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घर में माता-पिता का सम्मान करना चाहिए

प्रवचन

त्रिदंडी स्वामी महराज की पुण्यतिथि मनाई गई

सनातन धर्म में संत दर्शन का काफी महत्व है

बक्सर, निज संवाददाता। नगर के चरित्रवन स्थित श्रीत्रिदंडी देव समाधि स्थल पर श्रीलक्ष्मीप्रपन्न जीयर स्वामीजी के सानिध्य में त्रिदंडी स्वामी की पुण्यतिथि मनाई गई। पुण्यतिथि समारोह में शामिल होने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आए थे। बड़े स्वामीजी के सम्मान में श्रीलक्ष्मी नारायण मंदिर में भी पूजा-अर्चना कर सैकड़ों लोगों के बीच प्रसाद वितरण किया गया। पुण्यतिथि कार्यक्रम को लेकर सुबह से ही लोगों का पहुंचना शुरू हो गया। लोगों ने पहले गंगा स्नान किया। इसके बाद बड़े स्वामीजी का दर्शन किया। तत्पश्चात्, जीयर स्वामी का दर्शन कर प्रसाद ग्रहण किया। इस अवसर पर जीयर स्वामीजी महाराज ने कहा कि पूरे देश में बड़े स्वामीजी के लाखों भक्त हैं। जो चरित्रवन समाधि स्थल पर उनका दर्शन करने आते रहते हैं। वे तपोनिष्ठ सन्त थे। जीयर स्वामीजी ने कहा कि सनातन धर्म में संत दर्शन का काफी महत्व है। अगर जिंदगी में सच्चे संत का आगमन हो गया तो जीवन का अंधकार खत्म होकर प्रकाश की ओर चल पड़ा है। घर में माता-पिता का सम्मान करना चाहिए। मीडिया प्रभारी अखिलेश बाबा ने बताया कि सभी कार्यक्रम श्रीअयोध्यानाथ स्वामी की देखरेख में संपन्न हुआ।

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पंचकोस समापन के बाद हुआ भंडारा और विदाई समारोह का आयोजन

बक्सर। पंचकोस परिक्रमा यात्रा समाप्त होने के बाद शहर के स्टेशन रोड स्थित बसांव मठिया में गुरुवार को भंडारा और विदाई समारोह का आयोजन किया। मठ के लोगों की मौजूदगी में साधु-संतों के साथ ही पंचकोसी यात्रियों ने प्रसाद ग्रहण किया। इसके उपरांत वहां पहुंचे सभी साधु-संतों की विदाई की गई।

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देश की दशा-दिशा बदलने सकता है बिहार : स्वामी राजनारायणाचार्य

प्रवचन

नसाबंदी की तारीफ करते हुए गोहत्या रोकने की कही बात

राज्य में सामाजिक वैमनस्यता फैलाने के प्रवृति की निंदा

बक्सर, संवाद सूत्र। पंचकोसी परिक्रमा व महान संत श्रीत्रिदंडी स्वामीजी महाराज की पुण्यतिथि में शामिल होने के लिए यहां विशेष रूप से पधारे देवरिया बालाजी मंदिर के पीठाधीश्वर व राष्ट्रीय चिंतक जगतगुरु रामानुजाचार्य स्वामी राजनारायणाचार्य ने कहा कि बिहार विश्व का सबसे पुराना गणराज्य रहा है। देश की दशा व दिशा बदलने की ताकत यहां की जनता में है। बिहार की धरती से महात्मा गौतम बुद्ध ने विश्व को अहिंसा का संदेश दिया था। लेकिन, वर्तमान समय में बिहार में ही सर्वाधिक गोवंश की हत्या हो रही है। राज्य में लागू शराबबंदी की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि जातीय आधारित कुत्सित राजनीति से ऊपर उठकर जिस प्रकार से बिहार सरकार ने नसाबंदी की है। उसी प्रकार गोहत्या पर भी पाबंदी लगाकर बिहार को बचाया जा सकता है। राज्य में जिस तरह से सामाजिक वैमनस्यता फैलाया जा रहा है। उसे कलंक बताते हुए स्वामी जी ने कहा कि जातीय जनगणना जैसे कार्य राज्य के सामाजिक ढांचे को कमजोर कर सकता है। इनके अनुसार भारत जाति के बजाय योग्यता में विश्वास रखता है।

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