फिसलकर तीनों युवक एक एक करके गहराई में चले गए
रामरेखा घाटरामरेखा घाट रामरेखा घाट पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम का अभाव दो की मौत ने घाट को चीख-पुकार में तब्दील कर दिया फोटो संख्या 24 कैप्शन - रविवार को रामरेखा घाट पर गंगा नदी में डूबने से हुई मौत...

रामरेखा घाट रामरेखा घाट पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम का अभाव दो की मौत ने घाट को चीख-पुकार में तब्दील कर दिया फोटो संख्या 24 कैप्शन - रविवार को रामरेखा घाट पर गंगा नदी में डूबने से हुई मौत के बाद रोती बिलखती मृतक के घर की महिलाएं। फोटो संख्या 25 कैप्शन - रविवार को रामरेखा घाट पर गंगा नदी में डूबने से हुई मौत के बाद शव निकालते परिजन व जुटी भीड़। बक्सर, हमारे संवाददाता। रामरेखा घाट पर पिछले दो दिनों से मुंडन के कारण भीड़-भाड़ व भक्ति गीतों में डूबा हुआ था। लेकिन, रविवार को दो युवकों की मौत ने अचानक घाट को चीख-पुकार में तब्दील कर दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक घाट की सीढ़ियों के पास पानी अधिक गहरा था। स्नान करने के दौरान नीचे की ओर फिसलकर तीनों युवक एक एक करके गहराई में चले गए और डूबने लगे। जानकारी के अनुसार अचानक संतुलन बिगड़ने से तीनों गहरे पानी में चले गए और खुद को संभाल नहीं सके। किसी तरह से एक युवक बाहर निकलने में सफल रहा। इसके बाद उसने शोर मचाना शुरू किया। जिसपर पानी में डूबे दो युवकों को बचाने के लिए सिविल लाइन पंजाबी मोहल्ला निवासी नरेश भर के पुत्र संजू राजभर गंगा में कूद पड़ा जिसने एक को तो बचा लिया लेकिन दूसरे को बचाने के चक्कर में खुद जान गंवा बैठा। मौके पर मौजूद लोगों ने तत्काल इस घटना की जानकारी टाउन पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही टाउन थाना की पुलिस मौके पर पहुंची और स्थानीय गोताखोरों की मदद से दोनों को बचाने का अभियान शुरू किया। कुछ देर के बाद दोनों की लाश गंगा से निकली। संजू राजभर की शादी पांच वर्ष पूर्व सोनी देवी से हुई थी। उसे दो बेटे व एक बेटी है। पड़ोसियों का कहना है कि सोनी देवी कुछ दिव्यांग है। हालांकि वह घरेलु सभी कार्य निपटा लेती है। इस हादसे के बाद 80 वर्षीय नरेश राजभर पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। अपने बेटे के शव को देखकर वह फफक-फफक कर रो रहे है। पत्नी सोनी देवी बार-बार बेहोश हो रही है। घाट की सीढ़ियों के पास अचानक गहराई संजू राजभर के बच्चे घर पहुंचे अपने पिता के शव को बार-बार उठाकर होली के लिए रंग खरीदने की बात कह रहे है। स्थानीय लोगों का कहना है कि रामरेखा घाट पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। घाट की कुछ सीढ़ियों के पास अचानक गहराई बढ़ जाती है, जिससे अनजान लोग हादसे का शिकार हो जाते हैं। घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि घाट पर चेतावनी बोर्ड, बैरिकेडिंग और नियमित निगरानी की व्यवस्था की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। इस त्रासदी ने एक बार फिर गंगा घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। मछली पकड़ने या स्नान के लिए जाने वाले लोगों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। जरा सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।
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