टमाटर का भाव गिरने से किसानों को हो रही आर्थक क्षति
डुमरांव और सिमरी क्षेत्र में टमाटर की खेती में बंपर पैदावार होने के बावजूद किसानों को उचित दाम नहीं मिल रहा है। थोक मूल्य 4 रुपये प्रति किलो है, जबकि खुदरा 8 रुपये है। किसानों का कहना है कि अक्टूबर और नवंबर में बारिश के कारण भाव गिर गए हैं। सरकार से सहायता की मांग की जा रही है।

खेती-किसानी टमाटर थोक मूल्य में बिक रहा 4 रुपये प्रति किलो, खुदरा भाव 8 रुपये किलो टमाटर का पैदवार हुआ है बंपर, लेकिन ऑफ सीजन से नहीं मिल रहा है भाव फोटो संख्या- 12, कैप्सन- रविवार को डुमरांव में खेत से टमाटर को तोड़ते महिला-पुरूष किसान। डुमरांव, निज संवाददाता। अनुमंडल क्षेत्र का डुमरांव और सिमरी प्रखंड टमाटर की खेती के लिए प्रसिद्ध माना जाता है। यहां प्रदेश के विभिन्न हिस्सों के साथ झारखंड और पश्चिम बंगाल के व्यापारी भी खरीदारी करने आते हैं। इस वर्ष टमाटर की खेती समय पर नहीं हुई, जिससे किसानों को उचित भाव नहीं मिला। किसान गणेश कुमार व पंडित चौधरी मालगुजारी पर टमाटर की खेती किए हैं।
उनका कहना है कि भाव ठीक नहीं होने से इस साल घाटा लग गया है। उन्होंने इसका मुख्य कारण अक्टूबर व नवंबर महीने में हुई बारिश को बताया। किसानों ने बताया कि बाहर से आने वाले व्यापारी अच्छे दामों में खरीदारी कर बिहार ही नहीं, बल्कि झारखंड और पश्चिम बंगाल ले जाकर बिक्री करते हैं। अक्टूबर और नवंबर महीने में टमाटर का भाव तेज रहता है, जिससे दाम अच्छे मिलते हैं। वर्तमान समय में इसकी थोक बिक्री 4 रुपये प्रति किलो है, जिससे किसानों का लागत भी नहीं निकल पा रहा है। शुरूआत में जो भाव मिलता है, वह पूरे साल की भरपाई कर देता है। व्यापारी उस समय खेतों में आकर मूल्य तय कर खरीदारी करते हैं, जिससे किसानों को उचित दाम मिल जाता है। वर्तमान में टमाटर तोड़कर रख देने के बाद व्यापारियों का इंतजार करना पड़ता है। अगर, कोई व्यापारी नहीं पहुंचा तो उसे लोकल के बाजार में बिक्री के लिए ले जाना पड़ता है। टमाटर की खेती करने वाले किसानों की मांग है कि मौसम से हुई क्षति को देखते हुए किसानों को सरकार की तरफ से सहयोग मिलना चाहिए, जिससे उन्हें अपने परिवार का पालन-पोषण करने में परेशानी न हो।
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