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नहरों में पानी नहीं आने से धान के बिचड़े पर संकट

विकट समस्या पानी के अभाव में अधिकांश हिस्सों में नहीं पड़े धान के बिचड़े खेती की शुरुआत में पटवन की समस्या से किसानों में मायूसी फ़ोटो संख्या 01 कैप्शन - नावानगर में सुखी पड़ी सिकरौल रजवाहा। नावानगर,...

नहरों में पानी नहीं आने से धान के बिचड़े पर संकट
हिन्दुस्तान टीम,बक्सरMon, 17 Jun 2024 08:45 PM
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विकट समस्या
पानी के अभाव में अधिकांश हिस्सों में नहीं पड़े धान के बिचड़े

खेती की शुरुआत में पटवन की समस्या से किसानों में मायूसी

फ़ोटो संख्या 01 कैप्शन - नावानगर में सुखी पड़ी सिकरौल रजवाहा।

नावानगर, एक संवाददाता। मौसम की बेरुखी का सबसे अधिक असर खरीफ की खेती पर पड़ा है। प्रखंड के अधिकतर हिस्सों में अब तक धान के बिचड़े नहीं लगाए गए हैं। जिससे धान के उत्पादन के प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। अधिक उपज के लिए किसान मीनी मंसूरी व कतरनी प्रभेद के धान की खेती करते है। जिसके लिए आमतौर पर किसान रोहिणी नक्षत्र में 25 मई से बिचड़ा डालना शुरू कर देते हैं। पर इस साल पानी की कमी से रोहिणी नक्षत्र की कौन कहे, मृगशिरा नक्षत्र भी समाप्त होने वाला है। लेकिन, प्रखंड के नहर क्षेत्र में अभी भी धान के बिचड़े नहीं डाले जा सके हैं।

नहरों में पानी नहीं आने से अब खेती पिछड़ने का भय सता रहा है। किसानों को अब बारिश का इंतजार है। भदार गांव के किसान श्याम बिहारी सिंह ने बताया कि पहले नहरों में 25 मई तक पानी आ जाता था। जो 1 जून तक निर्धारित किया गया है। लेकिन, विभाग की बेरुखी से निर्धारित अवधि के 18 दिन बाद भी नहरों में पानी नहीं आया। किसानों ने बताया कि नहरी क्षेत्र में बोरिंग नहीं रहने से समस्या गंभीर हो गई है।

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नहर में पानी छोड़ने के लिए डिमांड भेजा गया है। लेकिन, बराज में पानी की कमी से अब तक पानी नहीं छोड़ा गया। अगले दो-तीन दिनों में पानी आने के संभावना है।

आशीष कुमार, सहायक अभियंता, सिंचाई विभाग, सिकरौल डिविजन

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