
मन ही मोक्ष और बंधन का साधन : रत्नेश महाराज दास
बक्सर में राम जानकी आश्रम में आयोजित कार्यक्रम में रत्नेश महाराज दासजी ने भक्ति भावना के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि मन का अहम बंधन है और ठाकुरजी के चरणों में शरण लेने से सभी दुख समाप्त हो जाते हैं। कार्यक्रम में पूज्य मामाजी महाराज का शोडीशोपचार स्नान पूजन भी किया गया।
प्रवचन भक्ति भावना मिथिला वासियों से सीखनी चाहिए: संत महाराज के श्रीविग्रह का शोडीशोपचार स्नान श्रृंगार पूजन फोटो संख्या- 19, कैप्सन- बुधवार को राम जानकी आश्रम में आयोजित कार्यक्रम में भाग लेते राजाराम बाबा व अन्य। बक्सर, हमारे संवाददाता। मन ही मोक्ष और बंधन का साधन है। जब मन का अहम ही मैल है। अंहकार ही बंधन है। लेकिन जिस दिन मन में यह भाव आ जाता है कि सबकुछ ठाकुरजी है। उन्हीं के श्रीचरणों से इस जीवन का उद्धार होगा। उसी दिन सभी दुखों का अंत हो जाता है। उक्त बातें श्रीराम जानकी आश्रम में कथा वाचन के दौरान रत्नेश महाराज दासजी ने कहीं।
जो शांत हो, निष्काम हो, करूण हदय का हो। वहीं ईश्वर का भक्त है। ऐसे व्यक्ति की रक्षा ईश्वर करते है। भगवान के चरणों के चार चिन्ह होते है। उनका ध्यान करना चाहिए। कथा वाचन के दौरान उन्होंने कहा कि भक्ति भावना मिथिला वासियों से सीखनी चाहिए। सारे कष्ट नष्ट हो जाते है। इस दौरान उन्होंने ध्रुव प्रह्लाद की कथा विस्तार पूर्वक सुनाई। उन्होंने कथा के दौरान कहा कि दोष युक्त व्यक्ति को कोई स्वीकार नहीं करता है। उसे ईश्वर स्वीकार करते है। वहीं बुधवार को प्रातः काल मन्दिर में पूज्य मामाजी महाराज के श्रीविग्रह का शोडीशोपचार स्नान श्रृंगार पूजन हुआ। पूज्य गुरुदेव मामाजी महाराज की देखरेख में रचित पदों का संगीतमय गायन और संगीतमय भजनों गायन के साथ उनकी स्मृतियों का विस्तार से वर्णन भी किया गयाl कार्यक्रम का संचालन स्वयं महंत राजाराम शरणजी महाराज ने किया। अनेक संत महंतों ने अपने अपने भाव पूज्य मामाजी महाराज के स्मृति में व्यक्त किये l

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