Hindi NewsBihar NewsBuxar NewsShreemad Bhagwat Katha Krishna Leela and Rukmini-Krishna Wedding Inspire Devotees
रासलीला भक्ति और आत्मा का परम मिलन

रासलीला भक्ति और आत्मा का परम मिलन

संक्षेप:

श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन, आचार्य रणधीर ओझा ने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन किया। कथा में रुक्मिणी-श्रीकृष्ण विवाह को प्रेम, धैर्य और आस्था का प्रतीक बताया गया। हजारों श्रद्धालु भाव-विभोर होकर...

Sep 09, 2025 08:46 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, बक्सर
share Share
Follow Us on

प्रवचन श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन कृष्ण लीला सुन भाव-विभोर रुक्मिणी-श्रीकृष्ण विवाह धैर्य, आस्था और संकल्प का प्रतीक फोटो संख्या-27, कैप्सन- मंगलवार को मठिया मोहल्ले में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा में प्रवचन सुनतीं महिलाएं। बक्सर, निज संवाददाता। नगर के सिविल लाइंस स्थित साईं उत्सव वाटिका में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन दिव्य, भावमय और आध्यात्मिक रहा। आचार्य रणधीर ओझा ने भगवान श्रीकृष्ण की अनुपम लीलाओं का वर्णन करते हुए श्रोताओं को ऐसे आध्यात्मिक संसार में प्रवेश कराया। जहां भक्त और भगवान एकाकार हो जाते हैं। आचार्य ने कहा कि रासलीला भक्ति और आत्मा का परम मिलन है। कहा कि रासलीला केवल एक नृत्य नहीं, बल्कि परमात्मा और जीवात्मा के मिलन की लीलामयी अभिव्यक्ति है।

LiveHindustan को अपना पसंदीदा Google न्यूज़ सोर्स बनाएं – यहां क्लिक करें।

गोपियों द्वारा श्रीकृष्ण से किया गया निस्वार्थ प्रेम और उनका पूर्ण समर्पण प्रतीक है कि जब भक्त अपने अहंकार, इच्छाओं और सांसारिक बंधनों को त्याग कर केवल ईश्वर की ओर उन्मुख होता है, तो वह रासलीला में भागीदार बनता है। आचार्य ने आगे रुक्मिणी विवाह प्रसंग का वर्णन किया। कहा कि यह प्रेम, धैर्य और आस्था की अमर कथा है। रुक्मिणी-श्रीकृष्ण विवाह केवल प्रेम का नहीं, बल्कि धैर्य, आस्था और संकल्प का प्रतीक है। कथा स्थल पर हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे। महिला-पुरुष, युवा-बुज़ुर्ग सभी श्रीकृष्ण की लीलाओं को सुनकर भाव-विभोर हो उठे। कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने कीर्तन में भी भाग लिया।