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व्यथा कथा: आफत बनकर आयी मौत,बेटे के श्राद्ध के पहले उठी पिता की अर्थी

हिन्दुस्तान टीम,बक्सरPublished By: Newswrap
Tue, 15 Jun 2021 11:00 AM
व्यथा कथा: आफत बनकर आयी मौत,बेटे के श्राद्ध के पहले उठी पिता की अर्थी

डुमरांव। अजय कुमार सिंह

कोरोना का कहर नचाप गांव के एक परिवार आफत बनकर इस कदर टूटा कि कमाऊ बेटे के श्राद्ध से पहले ही वृद्ध पिता की अर्थी उठ गयी। महज बारह दिनों के भीतर दो लोगों की मौत से जहां परिवार का सपना बिखर गया। वहीं मौत ने गांव के हर वर्ग और समुदाय को झकझोर दिया।दो परिजनों को खोने का सदमा झेल रहा परिवार अब जिंदा रहने के लिए हर दिन जिंदगी से संघर्ष कर रहा है।अभी तक सरकार की ओर से इस परिवार को किसी तरह की आर्थिक सहायता नहीं मिली है।

आर्थिक बदलाव के लिए गया था दुबई

डुमरांव अनुमंडल के चौगाई प्रखंड स्थित नचाप गांव निवासी राम योगी यादव की माली हालत ठीक नहीं थी।परिवार के आर्थिक बदलाव के लिए रामयोगी का पुत्र नंद लाल यादव (32वर्ष) दुबई जाने का फैसला लिया। नंद लाल चाहता था कि उसके पास उतने पैसे जरूर रहे,जिससे दो बच्चों को अच्छी तालिम के साथ परिवार को बेहतर जीवन दे सके। दो साथ दुबई में रहने के बाद नंदलाल वापस गांव आकर खेती में जुट गया। पिता-पुत्र की मेहनत से परिवार का दिन अच्छे से गुजरने लगा।

कोरोना ने परिवार की छीन ली खुशियां

कोरोना का दूसरा लहर चरम पर चल रहा था। कोरोना से बचाव को लेकर नचाप गांव अभी संभल ही रहा था कि नंद लाल यादव चपेट में आ गया। बुखार और सांस में तकलीफ होने पर परिवार के लोगों ने जब जांच कराया,तो नंद लाल कोरोना पॉजिटिव पाया गया। पटना में इलाज चल रहा था। लेकिन हालत बिगड़ती चली गयी। फिर 18 अप्रैल को नंद लाल कोरोना से जीवन की जंग हार गया।कोरोना ने पहले बहू दुलारी देवी का सुहाग उजाडा।बेटे का अंतिम संस्कार कर पिता रामयोगी यादव श्राद्ध की तैयारी में था। तभी दशकर्म के दिन रामयोगी की तबीयत खराब हो गयी। इलाज के लिए बक्सर लाया गया। लेकिन दो दिनों के संघर्ष के बाद पिता ने भी दम तोड दिया। 65 वर्षीय रामयोगी के मौत के साथ 68 वर्षीय गुलाबों देवी का सुहाग उजड़ गया।

सदमे में डूब गया परिवार

बेटे के श्राद्ध से पहले पिता की अर्थी उठते पूरा परिवार सदमे में डूब गया। इस परिवार के दुख से गांव मातम में डूब गया।कमाऊ पूत और पति को खोने के कारण गुलाबों देवी सुधबुध खो बैठी थी। पैर पर खडा होने के पहले ही प्रदूमन कुमार और उपमन्यु कुमार के सिर से पिता-दादा का साया हट गया।किस्मत ने इस परिवार के साथ ऐसा खेल खेला कि बच्चे चहकना भूल गये है।

छूट गयी बेटे की पढाई, टूटा दुखो का पहाड़

एक साथ दो मौत से नचाप के इस परिवार पर दुखों का पहाड टूट पडा है। मृतक नंदलाल चाहता था कि उसके दोनों बेटे पढकर लिखकर परिवार का सहारा बने ।प्रदुमन आरा में रहकर पढाई करता था। जबकि दूसरा भाई गांव के स्कूल में पढ रहा था।इंटर करने के बाद प्रदुमन ने आगे की पढाई जारी रखी थी। लेकिन पिता और दादा की मौत के कारण उसकी पढाई छूट गयी। कोरोना ने इस परिवार की खुशियों और उम्मीदों को खाक में मिला दिया है।पति की मौत के बाद दुलारी देवी जीवन संघर्षों से घिर गया है।गांव में जमीन नहीं है कि जिससे दो वक्त की रोटी मिल जाय।कोरोना ने इस परिवार को पूरी तरह बेवश और लाचार बना दिया है। चौगाई सीओ बद्री प्रसाद गुप्ता का कहना है कि मृतक परिवार की ओर से आवेदन मिलने पर आपदा के तहत भुगतान हेतु अनुशंसा भेज दिया जाएगा।

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