छह माह में बनना था बाल विज्ञान केंद्र, दो वर्ष बाद भी अधूरा
बाल विज्ञान केंद्र के सौंदर्यीकरण का कार्य दो विभागों की खींचतान के कारण अधूरा पड़ा है। भवन निर्माण विभाग का कहना है कि कार्य लगभग 80 प्रतिशत पूरा हो चुका है, लेकिन वन विभाग की दखलंदाजी से शेष कार्य नहीं हो पा रहा है। कुल लागत 01 करोड़ 30 लाख से अधिक है।

पेज तीन की लीड ---------- उदासीनता डिजाइन के अनुसार बाल विज्ञान केंद्र परिसर के प्रवेश द्वार को मनोरम व आकर्षक लुक देने के लिए ऊंचे व खूबसूरत गेट का होगा निर्माण गेट में प्रवेश करते ही भवन के समीप गार्ड रूम और टिकट काउंटर 01 करोड़ 30 लाख से बनाया जा रहा आधुनिक व तकनीकी रूप से उन्नत बाल विज्ञान केंद्र फोटो संख्या-13 , कैप्सन- शहर के स्टेशन रोड स्थित कमलदह पार्क परिसर स्थित बाल विज्ञान केंद्र। बक्सर, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। शहर के स्टेशन रोड स्थित कमलदह पार्क परिसर स्थित ‘बाल विज्ञान केंद्र’ के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण का कार्य दो विभागों की खींचतान के कारण अधूरा पड़ा है। मार्च 2024 में इसके सौन्दर्यीकरण का कार्य शुरू हुआ था। छह माह में कार्य पूरा करने का लक्ष्य था, लेकिन दो साल बीतने के बाद भी बाल विज्ञान केंद्र का काम अधूरा है।
कार्य की प्रगति
इधर, भवन निर्माण विभाग का कहना है कि उनके द्वारा सौंदर्यीकरण का कार्य लगभग 80 प्रतिशत कार्य पूरा कर लिया गया है। लेकिन वन विभाग की दखलंदाजी की वजह से शेष कार्य अब तक पूरा नहीं किया जा सका है। भवन निर्माण के सहायक अभियंता नीतेश कुमार का कहना है कि बाल विज्ञान केंद्र के सौंदर्यीकरण को लेकर भवन निर्माण विभाग की ओर से आर्किटेक्ट डिजाइन और स्टीमेट बनाया गया है। उसी के आधार पर संबंधित एजेंसी कार्य करा रही है। अअब लगभग कार्य पूर्ण होने को है तो वन विभाग रोड़े अटका रहा है। इसी वजह से कार्य बंद है। भवन निर्माण से मिली जानकारी के अनुसार लगभग 01 करोड़ 30 लाख 65 हजार 774 रुपये की लागत से बाल विज्ञान केंद्र को आधुनिक व तकनीकी भवन के रूप में संवारना है। इसकी संशोधित तकनीकी स्वीकृत राशि 01 करोड़ 49 लाख 53 हजार 100 रुपये थी। इसके लिए ‘एलाइट बिजनेस ग्रुप’ एंजेंसी का चयन किया गया। भवन निर्माण विभाग के आर्किटेक्ट डिजाइन के अनुसार बाल विज्ञान केंद्र परिसर के प्रवेश द्वार को मनोरम व आकर्षक लुक देने के लिए ऊंचे व खूबसूरत गेट का निर्माण कराया जाना है। वहीं गेट में प्रवेश करते ही भवन के समीप गार्ड रूम और टिकट काउंटर बनेगा। ऐसे में यहां आने वाले टिकट लेकर बाल विज्ञान केंद्र का भ्रमण कर सकेंगे। यहां जिले के विद्यार्थी विज्ञान के रहस्यों को आसानी से समझ सकेंगे।
कैफे और लाइब्रेरी
कैफे काउंटर, एस्ट्रॉनोमी लैब व कैफे रूम प्रथम तल पर बुक कैफे लॉबी, कैफे काउंटर, एस्ट्रॉनोमी लैब, कैफे रूम बनाया गया है। खास बात यह है कि पार्क फेस की तरफ शीशे की बाउंड्री की जायेगी, जिससे कैफेटेरिया में बैठने वाले लोगों को पार्क के मनारेम दृश्य का आनंद मिल सके। इसके अलावा दूसरे तल पर आधुनिक लाइब्रेरी तैयार की गई है। यहां 50 विद्यार्थियों के एक साथ बैठने और अध्ययन करने की व्यवस्था उपलब्ध रहेगी। खास बात यह है कि इस तल पर डिजिटल म्यूजियम और साइंस लॉबी रहेगी। डिजिटल स्क्रीन पर विज्ञान से संबंधित सिद्धांतों को मॉडल के रूप में प्रदर्शित किया जाएगा। यहां बता दें कि इस भवन को 3-डी मोड में तैयार करना है। कार्य योजना के अनुसार बाल विज्ञान भवन ‘जी-प्लस टू’ होगा। इसके टॉप पर लगे वॉच टावर को बदलकर डिजिटल वॉच लगाया जाएगा।
बाल विज्ञान केंद्र की विशेषताएँ
50 छात्रों के बैठने की क्षमता का चाइल्ड एक्जीविशन भू-तल पर 50 छात्रों के एक साथ बैठने की क्षमता का चाइल्ड एक्जीविशन बनाया जाना है। साथ ही इसके अगल-बगल गैलरी रहेगी, जहां स्पेस, साइंस और शिक्षा से संबंधित विषयों व उनके सिद्धांतों को प्रोजेक्टर के माध्यम से वीडियो के रूप में विद्यार्थियों के बीच दिखाया जाएगा। भू-तल पर ही दो प्रदर्शनी रूम होंगे, जिसमें विज्ञान के मूलभूत सिद्धांतों को मॉडल के रूप में विद्यार्थियों के बीच प्रदर्शित किया जाएगा। एस्ट्रोनॉमी और स्पेस साइंस को डिजिटल पैनल के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा, जो पटना के तारामंडल की तरह दिखेगा और विद्यार्थी विज्ञान के हर पहलू को डिजिटली समझ सकेंगे। बाल विज्ञान केंद्र से विद्यार्थियों के अंदर वर्तमान परिवेश में विज्ञान से संबंधित अपनी अभिरूचि के अनुरूप विज्ञान के तर्कसंगत सिद्धांतों को मॉडल के रूप में आत्मसात करने में सहायता प्राप्त होगी।
वन विभाग का स्टेटमेंट
वन विभाग का कोई लेना-देना नहीं सौंदर्यीकरण कार्य से वन प्रमंडल बक्सर के रेंजर सुरेश कुमार सिंह का कहना है कि बाल विज्ञान केंद्र भवन के सौंदर्यीकरण कार्य से वन विभाग का कोई लेना-देना नहीं है। उक्त भवन उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। कार्य बंद होने का कोई अन्य कारण हो सकता है। वहीं भवन प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता ई. रूपेश कुमार ने बताया कि वन विभाग के साथ समन्वय बनाने को लेकर कदम उठाया जाएगा। संबंधित एजेंसी का भुगतान भी अटका है, जिसका आवंटन उपलब्ध कराने के लिए विभाग को पत्र लिखा गया है। राशि का भुगतान होते ही कार्य शुरु कर दिया जाएगा।
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