
ठंड से बचाव के लिए सफाई मजदूरों को नहीं मिले गर्म कपड़े
पेज चार की लीड, पटना का प्लान, पड़ताल पेज चार की लीड, पटना का प्लान, पड़ताल ------ उपेक्षित शहर को स्वच्छ रखने में जुटे रहने वाले सफाई मजदूरों को शरीर को गर्म रखने वाले ऊनी कपड़े अबतक मुहैया नहीं...
पेज चार की लीड, पटना का प्लान, पड़ताल ------ उपेक्षित शहर को स्वच्छ रखने में जुटे रहने वाले सफाई मजदूरों को शरीर को गर्म रखने वाले ऊनी कपड़े अबतक मुहैया नहीं कराएं गए हैं खुद के स्वेटर, शॉल और ऊनी वस्त्रों के सहारे नगर परिषद के सफाई मजदूर कपड़े उपलब्ध कराने के बावजूद ड्रेस कोड में नहीं आते सफाईकर्मी- एजेंसी 10 डिग्री से भी नीचे पहुंच गया हैं यहां का तापमान फोटो संख्या 28 कैप्शन - गुरुवार को ठंड के बीच सिविल लाइन में कूड़ा उठाते नगर परिषद के सफाईकर्मी। बक्सर, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। शहर में इन दिनों कड़ाके की ठंड पड़ रही है।
आलम यह है कि यहां का तापमान 10 डिग्री से भी नीचे पहुंच गया है। एक तरफ जहां शहर के अधिकांश लोग सुबह-सुबह अपने-अपने घरों में कंबल व रजाई ओढ़कर दुबके रहते है। वहीं दूसरी तरफ नगर परिषद के सफाई मजदूर बफीर्ली हवाओं व कुंहासों के बीच शहर की गली-मुहल्ले व सड़कों को चकाचक करने में जुटे रहते है। इनमें से कहीं कोई झाडू लगाते दिख जाता है, तो वहीं कोई कचरा उठाव करते मिल जाता है। लेकिन विडंबना यह है कि इतनी ठंड के बीच शहर को स्वच्छ रखने में जुटे रहने वाले सफाई मजदूरों को शरीर को गर्म रखने वाले ऊनी कपड़े अबतक मुहैया नहीं कराएं गए है। गुरूवार की सुबह जब आपके अपने ‘हिन्दुस्तान’ ने कड़ाके की ठंड में रोज सुबह शहर की सड़कों की सफाई करने वाले मजदूरों का हाल जानने के लिए पड़ताल की। इस दौरान पाया कि जितने भी सफाई मजदूर साफ-सफाई में लगे थे। वे सभी ऑफिसियल ड्रेस कोड के बजाय स्वयं के स्वेटर, शॉल व ऊनी वस्त्रों के सहारे सफाई अभियान में लगे थे। जैसे-तैसे गर्म कपड़ों का जुगाड़ करके काम कई मजदूरों ने नाम नहीं छापने के शर्त पर बताया कि उनको ठंड से बचाव के लिए अबतक ना तो सफाई एजेंसी के तरफ से कोई सुविधाएं दी गई है और ना हीं नगर परिषद की ओर से। बताया कि वे स्वयं जैसे-तैसे गर्म कपड़ों का जुगाड़ करके काम चला रहे है। एक ओर ना तो उन्हें निर्धारित पारिश्रमिक मिलता है और ना हीं ठंड से बचाव के लिए अबतक कपड़े मिले है। ऐसे में उन्हें कड़ाके के ठंड के बीच कार्य करना मजबूरी बना हुआ है। ऊपर से काम पर नहीं आने से वेतन में कटौती भी कर दी जाती है। सफाई एजेंसी सूत्रों ने बताया कि सफाई मजदूरों को समुचित ड्रेस उपलब्ध कराएं गए है। लेकिन हालात यह है कि कोई भी सफाईकर्मी इसे पहनता नहीं है। नप के स्वच्छता अधिकारी रवि सिंह का कहना है कि बीते अप्रैल महीने में ही सभी सफाई मजदूरों को ट्रैक सूट, जूता, ग्लब्स, मास्क सहित समुचित ड्रेस का वितरण किया गया था। कया कहते हैं ईओ ईओ मनीष कुमार ने बताया कि शहर की साफ-सफाई की जिम्मेदारी संबंधित एजेंसी को दी गई है। इसीलिए एजेंसी का यह दायित्व बनता है कि सफाई मजदूरों को ठंड से बचाव के लिए गर्म कपड़े मुहैया कराएं। ऐसा नहीं करने पर एजेंसी पर कार्रवाई की जाएगी।

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