सुलह से विवाद का निपटारा का प्रभावी तरीका
13 सितंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन होगा। सचिव नेहा दयाल ने बताया कि सुलह एक प्रभावी और गोपनीय तरीका है जिससे विवादों का निपटारा किया जा सकता है। इस प्रक्रिया से समय और लागत की बचत होती है, और...

लाभ उठाएं 13 सितंबर यानी आज होगा राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन राष्ट्रीय लोक अदालत में अधिक से अधिक संख्या में सभी पहुंचे फोटो संख्या- 25, कैप्सन- शुक्रवार को विधिक सेवा प्राधिकार भवन में लोक अदालत की तैयारी को लेकर बैठक करती विधि सेवा प्राधिकार की सचिव नेहा दयाल। बक्सर, विधि संवाददाता। सुलह से विवाद का निपटारा का एक प्रभावी, गोपनीय और स्वैच्छिक तरीका है। जिसमें समय और लागत दोनों की बचत होती है। यह प्रक्रिया न केवल न्यायालयों पर मुकदमों का बोझ कम करती है, बल्कि पक्षों के आपसी संबंधों को भी बनाए रखने में सहायक होती है। जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव नेहा दयाल ने शुक्रवार को बताया कि सुलह में किसी भी प्रकार का निर्णय थोपने के बजाय, एक निष्पक्ष मध्यस्थ पक्षों के बीच बातचीत और सहयोग को प्रोत्साहित करता है।
ताकि, दोनों पक्ष एक स्वीकार्य और स्थायी समाधान तक पहुंच सकें। लोगों से अपील करते हुये कहा कि 13 सितंबर को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत में अधिक से अधिक संख्या में भाग लें और अपने लंबित मामलों का समाधान सुलह प्रक्रिया के माध्यम से कराएं। यह न केवल वादकारियों के लिए फायदेमंद होगा, बल्कि न्यायालयों का बोझ भी कम करेगा। बताया कि लोक अदालत में अब तक 50 मामलों का निपटारा सुलह के माध्यम से किया जा चुका है। इससे संबंधित पक्षों को शीघ्र न्याय मिल पाया है। सचिव नेहा दयाल ने कहा कि अक्सर देखा जाता है कि वर्षों तक मामले अदालतों में लंबित रहते हैं। जिससे न केवल समय और पैसे की बर्बादी होती है, बल्कि दोनों पक्षों के बीच रिश्तों में भी खटास आ जाती है। जबकि, सुलह की प्रक्रिया में दोनों पक्षों को सामान अवसर मिलता है और आपसी सहमति से विवाद का हल खोजा जाता है।
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