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इनसे सीखें : खून की बूंद से लोगों के जीवन में खुशहाली ला रहे प्रियेश कुमार

हिन्दुस्तान टीम,बक्सरPublished By: Newswrap
Sun, 01 Aug 2021 11:00 AM
इनसे सीखें : खून की बूंद से लोगों के जीवन में खुशहाली ला रहे प्रियेश कुमार

बक्सर। नीरज पाठक

जीना क्या अपने लिए, जबतक हम दूसरों के होठों पर खुशहाली नहीं ला पाए तो अपनी जिंदगी का क्या मतलब- यह कहना है यहां के सत्यदेवगंज निवासी प्रियेश कुमार का जो अपनी छोटी उम्र में ही 64 बार खून दान कर दर्जनों जिंदगी को बचा सके हैं। अपने खून दान की कहानी को बताते हुए रोन लगते हैं और कहते हैं कि जब किसी की जान खून की कमी से चली जाएगी, यह सुनता हूं तो दिल रोने लगता है। कहीं न कहीं से खून का इंतजाम करता हूं। और अगर खून का इंतजाम नहीं हो पाता है तो यह नहीं देखता कि खून दिए तीन माह हुए है कि नहीं अगर किसी की जान बचानी है तो अपनी जान की बाजी लगाकर खून दे देता हूं।

वर्ष 2011 से लगातार दान कर रहे खून

प्रियेश का ब्लड ग्रुप ओ पॉजिटिव है। उन्होंने रक्तदान की शुरूआत 2011 से की है। पहली बार जब खून देकर किसी की जान बचाए तो इनको काफी खुशी हुई , उसके बाद से लगातार वे खून दान करने लगे। अबतक 64 बार वे रक्तदान किए हैं लेकिन 56 बार रक्तदान करने का ही इनका प्रमाण पत्र मिल पाया है। क्योंकि अन्य बार इन्होंने चुपके से तीन महीने पूरे होने के पहले ही दान रक्तदान कर दिए हैं। कोरोना काल में रक्त की कमी होने पर उनको बार- बार प्रशासन की ओर से भी फोन किया जाता था तब वे अपनी टीम से मिलकर रक्तदान कराते रहे। उन्होंने इस दौरान कई बच्चों की भी जान बचाई है। कइ्र बार इन्होंने बगल के यूपी के जिले मऊ, गाजीपुर, इलाहाबाद भी जाकर रक्तदान कर चुके हैं।

थैलिसिमिया से पीड़ित 11 बच्चों को उपलब्ध कराते खून

प्रियेश बताते हैं कि बक्सर जिले मे कुल 11 बच्चे ऐसे हैं , जिनको बराबर खून की जरूरत जिंदा रहने और स्वस्थ होने के लिए पड़ती है। कभी - कभी हालत ऐसी हो जाती है कि ब्लड बैंक में खून ही नहीं रहता है , ऐसे में इन बच्चों के अभिभावक फेरे मे पड़ जाते हैं। अभी हाल ही में ऐसी ही बीमारी से ग्रसित एक बच्चे के पिता को खून की जरूरत थी तो उन्होने अपना खून दान किया। वे कई संगठनों से मिलकर रक्तदान भी कराते रहते हैं। ताकि , ब्लड बैंक में खन की कमी नहीं हो।

कोट

रेडक्रॉस की ओर से संचालित ब्लड बैंक में खून की कमी होने पर प्रियेश ने अक्सर सहयोग किया है। वे अबतक 56 बार खून दान कर चुके है। इसके लिए उनको प्रमाण पत्र दिया गया है। हर तीन माह पर वे खून दान करते हैं। उन्होंने एक रक्तदाता समूह भी बना रखा है। इससे काफी सहायता मिलती है।

- डॉ. श्रवण तिवारी, सचिव रेडक्रॉस ।

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