
भारतीय भाषाओं की विविधता का रंग बिखेरेंगे छात्र, स्कूलों में मनेगा भाषा उत्सव
गुरुवार को डुमरांव में भारतीय भाषा उत्सव का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम में छात्र कथा, कविता और संवाद के माध्यम से विभिन्न भारतीय भाषाओं का परिचय देंगे। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने इसे महाकवि सुब्रमण्यम भारती की जयंती पर मनाने का निर्देश दिया है, जिससे सांस्कृतिक संवेदनशीलता और बहुभाषी दक्षता को बढ़ावा मिलेगा।
युवा के लिए ---------- आज कथा, कविता व संवाद की बहुभाषी प्रस्तुतियों से सजेगा कार्यक्रम सांस्कृतिक संवेदनशीलता और बहुभाषी दक्षता को मजबूत करेगा फोटो संख्या- 15, कैप्सन- बुधवार को नंदन मध्य विद्यालय में चेतना सत्र के दौरान भाषा उत्सव में शामिल होने की शपथ लेते बच्चे। डुमरांव, संवाद सूत्र। प्रखंड के सभी सरकारी स्कूलों में गुरुवार को भारतीय भाषा उत्सव उत्साहपूर्वक मनाया जाएगा। भारतीय भाषाओं की समृद्ध विरासत और बहुलता को सम्मान देने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम में छात्रों द्वारा कथा, कविता और संवाद की रंगारंग प्रस्तुतियां दी जाएंगी। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने देशभर के स्कूलों को महाकवि सुब्रमण्यम भारती की जयंती 11 दिसंबर को भारतीय भाषा उत्सव के रूप में मनाने का निर्देश दिया है।

प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी सुधांशु कुमार ने बताया कि छात्रों की पढ़ाई के साथ-साथ सांस्कृतिक विकास को भी शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है। इसी उद्देश्य से सरकार द्वारा अलग-अलग कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों को अभिव्यक्ति, संवाद और रचनात्मकता में कुशल बनाने का प्रयास किया जा रहा है। कहा कि अनेक भाषाएं, एक भावना की थीम पर होने वाला यह उत्सव बच्चों में भाषाई समझ, सांस्कृतिक संवेदनशीलता और बहुभाषी दक्षता को मजबूत करेगा। कार्यक्रम के दौरान छात्र अपने घर, क्षेत्र और देश में बोली जाने वाली भाषाओं का परिचय देंगे। किसी क्षेत्र की बोली, मिथक, कथा या लोकगीत आधारित प्रस्तुतियों के माध्यम से बच्चे न केवल अपनी मातृभाषा बल्कि अन्य भारतीय भाषाओं से भी परिचित होंगे। इससे आपसी भाषाई सम्मान, विविधता की समझ और संस्कृति के प्रति जुड़ाव में वृद्धि होगी। बताया कि मातृभाषा आधारित शिक्षा बच्चों की सीखने की क्षमता को मजबूत करती है और भाषा के माध्यम से बच्चे अपने परिवेश और सांस्कृतिक जड़ों से गहराई से जुड़ते हैं। यही कारण है कि इस कार्यक्रम के जरिये बहुभाषी सीख को स्कूल के वातावरण में स्वाभाविक रूप से बढ़ावा दिया जा रहा है। विद्यालयों में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में नाट्य प्रस्तुति, समूह वाचन, लोककथा वाचन, कविता पाठ, संवाद आधारित गतिविधियां और विभिन्न भाषाओं में गीत शामिल होंगे। बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए शिक्षक भी विभिन्न भाषाओं के साहित्य, लेखकों और सांस्कृतिक विरासत पर प्रकाश डालेंगे। उत्सव का उद्देश्य केवल भाषाओं का परिचय कराना नहीं, बल्कि बच्चों में आत्मविश्वास, अभिव्यक्ति क्षमता और सांस्कृतिक एकता की भावना को मजबूत करना है। शिक्षा विभाग को उम्मीद है कि कार्यक्रम से छात्रों में भाषा और संस्कृति के प्रति नई ऊर्जा और उत्साह पैदा होगा, जो आगे चलकर उनके समग्र विकास में सहायक सिद्ध होगा।

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