
भाषाओं के रंग में रंगे सरकारी स्कूल, मनाया भारतीय भाषा उत्सव
गुरुवार को डुमरांव के सरकारी स्कूलों में भारतीय भाषा उत्सव मनाया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में भाषाई समझ और सांस्कृतिक संवेदनशीलता को बढ़ावा देना था। छात्रों ने विभिन्न भाषाओं में कथा, कविता और संवाद प्रस्तुत किए। शिक्षकों ने मातृभाषा आधारित शिक्षा के महत्व पर जोर दिया और बच्चों को बहुभाषी कौशल अपनाने के लिए प्रेरित किया।
युवा के लिए --------- उमंग कथा, कविता और संवाद की बहुभाषी प्रस्तुतियों से सजे कार्यक्रम मातृभाषा व देशभर में बोली जाने वाली भाषाओं का परिचय दिया फोटो संख्या- 14, कैप्सन- गुरुवार को मध्य विद्यालय पुराना भोजपुर मठिया में भाषा उत्सव मनाते बच्चे। डुमरांव, संवाद सूत्र। स्थानीय प्रखंड के सभी सरकारी स्कूलों में गुरुवार को भारतीय भाषा उत्सव उत्साह और सांस्कृतिक उमंग के साथ मनाया गया। महाकवि सुब्रमण्यम भारती की जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में भाषाई समझ, सांस्कृतिक संवेदनशीलता और बहुभाषी दक्षता को बढ़ावा देना था। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के निर्देश पर आयोजित उत्सव में छात्रों ने अलग-अलग भारतीय भाषाओं में अपनी कला, अभिव्यक्ति और रचनात्मकता का शानदार प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम की शुरुआत स्कूलों में अनेक भाषाएं, एक भावना थीम के साथ हुई, जिसके तहत बच्चों ने कथा, कविता और संवाद की जीवंत प्रस्तुतियां दीं। कई स्कूलों में छात्रों ने अपनी-अपनी मातृभाषा के साथ-साथ देशभर में बोली जाने वाली भाषाओं का परिचय दिया। बंगाली, मैथिली, भोजपुरी, उर्दू, हिन्दी, तमिल, तेलुगु और मराठी सहित कई भाषाओं में प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को बहुरंगी बना दिया। शिक्षकों ने बताया कि मातृभाषा आधारित शिक्षा बच्चों की समझ को मजबूत बनाती है और उन्हें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़े रखती है। इसी भावना के साथ कार्यक्रम में लोककथाओं, लोकगीतों और क्षेत्रीय कविताओं का पाठ किया गया, जिससे छात्रों में न केवल भाषाई जागरूकता बढ़ी बल्कि भारतीय संस्कृति की विविधता को समझने का अवसर भी मिला। प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी सुधांशु कुमार ने बताया कि ऐसे कार्यक्रम छात्रों में आत्मविश्वास, अभिव्यक्ति और संवाद कौशल को बढ़ावा देते हैं। कहा कि भाषा केवल अभिव्यक्ति का साधन नहीं, बल्कि संस्कृति, संवेदना और पहचान की धुरी है। भारतीय भाषा उत्सव बच्चों को यह संदेश देता है कि विविधता ही भारत की सबसे बड़ी शक्ति है। स्कूलों में आयोजित गतिविधियों में पोस्टर प्रदर्शनी, समूह वाचन, नाट्य प्रस्तुति, भाषाई क्विज़ और बहुभाषी गीत भी शामिल रहे। छात्रों ने नई भाषाओं के शब्द, कविताएं और कहानियां सीखने में गहरी दिलचस्पी दिखाई। अंत में शिक्षकों ने छात्रों को विभिन्न भारतीय भाषाओं का सम्मान करने और बहुभाषी कौशल को जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया।

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