
डुमरांव में समावेशी शिक्षा पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण शुरु
डुमरांव में समावेशी शिक्षा के तहत तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ। इस दौरान शिक्षकों को विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शैक्षणिक जरूरतों के बारे में जानकारी दी गई। प्रशिक्षकों ने बताया कि शिक्षकों को लचीले शिक्षण विधियों को अपनाना चाहिए ताकि दिव्यांग बच्चों को समान अवसर मिल सके।
युवा के लिए ------- तीन दिवसीय सभी शिक्षकों को शिक्षण विधियों में लचीलापन अपनाना चाहिए विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शैक्षणिक जरूरतों को बताया डुमरांव, संवाद सूत्र। स्थानीय प्रखंड में समावेशी शिक्षा के तहत सामान्य शिक्षकों का तीन दिवसीय गैर आवासीय प्रशिक्षण गुरुवार से शुरू हुआ। यह प्रशिक्षण कन्या मध्य विद्यालय में आयोजित किया गया है, जो शनिवार तक चलेगा। प्रशिक्षण के प्रथम दिन अलग-अलग विषयों पर शिक्षकों को विस्तृत जानकारी दी गई। प्रशिक्षण सत्र का संचालन प्रतिनियुक्त प्रशिक्षक राहुल कुमार गुप्ता और जयप्रकाश सिंह द्वारा किया गया। इस दौरान प्रशिक्षकों ने कहा कि समावेशी शिक्षा का मूल उद्देश्य विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ना और उन्हें समान अवसर प्रदान करना है।

उन्होंने दिव्यांग बच्चों को दिए गए संवैधानिक अधिकारों, सुविधाओं और आरपीडब्ल्यू एक्ट 2016 के प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की। सत्र के दौरान दृष्टिहीनता, अल्प दृष्टि, बधिरता, विशिष्ट अधिगम अक्षमता, बौद्धिक दिव्यांगता सहित विभिन्न प्रकार की दिव्यांगताओं पर शिक्षकों को संवेदनशील बनाया गया। बताया गया कि प्रत्येक दिव्यांग बच्चे की जरूरत अलग होती है, इसलिए शिक्षकों को शिक्षण विधियों में लचीलापन अपनाना चाहिए ताकि वे कक्षा में सहज महसूस कर सकें। प्रशिक्षकों ने समावेशी कक्षा के व्यवहारिक पहलुओं पर भी चर्चा की। सहायक उपकरण, सरल भाषा, संकेत, गतिविधि-आधारित शिक्षण और सहयोगात्मक सीखने के माध्यम से विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को बेहतर सीखने का अवसर दिया जा सकता है। इसपर उदाहरणों के साथ प्रशिक्षण दिया गया। इस तीन दिवसीय प्रशिक्षण में शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। इस मौके पर पशुपतिनाथ गुप्ता, संजय कुमार राम, तबरेज आलम, राजीव रंजन पासवान, मुश्ताक अहमद शबनम, सोनी कुमारी, शिल्पा कुमारी व चित्तरंजन चौबे थे।

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