
उपेक्षा से मद्धिम पड़ने लगी कतकौली पार्क की चमक
बक्सर के कतकौली मैदान पर 1764 में अंग्रेजों और तीन नवाबों के बीच हुए युद्ध की याद में मनरेगा से 2021 में 9 लाख का पार्क बनाया गया था। लेकिन अब यह पार्क गंदगी और उपेक्षा का शिकार हो गया है। स्थानीय लोग चिंतित हैं कि यदि स्थिति नहीं बदली, तो पार्क अस्तित्व खो देगा।
गंदगी 1764 में बक्सर के कतकौली मैदान पर अंग्रेजों व तीन नवाबों के बीच हुआ था युद्ध इतिहास को जिंदा रखने के उद्देश्य से प्रशासन ने युद्ध स्थल पर कराया पार्क का निर्माण 09 लाख से बनाया गया था पार्क 2021 में मनरेगा से हुआ निर्माण फोटो संख्या- 18, कैप्सन- कथकौली लड़ाई का मैदान। बक्सर, हमारे प्रतिनिधि। उपेक्षा से ऐतिहासिक कतकौली मैदान की चमक मद्धिम पड़ने लगी है। युद्ध स्थल पर बना पार्क नशेड़ियों का न सिर्फ अड्डा बन गया है। बल्कि पार्क में चारों ओर गंदगी पसरी हुई है। बक्सर शहर से लगभग चार किलोमीटर दूर स्थित कतकौली मैदान पर 23 अक्टूबर 1764 को अंग्रेजों के सेनापति हेक्टर मुनरो और अवध के नवाब शुजाउद्दौला, बंगाल के नवाब मीर कासिम व सम्राट शाह आलम द्बितीय सेना के बीच युद्ध हुआ था।
लड़ाई जीतने के बाद पर अंग्रेजों ने विजय स्तंभ बनवाया था। लड़ाई का यह मैदान अब पूरी तरह उपेक्षित पड़ा हुआ था। उपेक्षित पड़े कतकौली के लड़ाई मैदान पर मनरेगा से पार्क का निर्माण कराया गया। मनरेगा से वर्ष 2021 में 9 लाख 88 हजार 200 की लागत से कतकौली मैदान पर पार्क का निर्माण कराया गया था। पार्क में पौधरोपण के साथ विजय स्तंभ को दुरुस्त किया गया था। लेकिन उपेक्षा के कारण पार्क की चमक धूमिल होने लगी है। पार्क में चारों ओर गंदगी फैली हुई है। पौधों की देखरेख नहीं हो रही है। लोगों का कहना है कि यदि यही स्थिति रही, तो पार्क अपना अस्तित्व खो देगा।

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