जच्चा-बच्चा किट की उपलब्धता की डीएस ने मांगी रिपोर्ट
स्वास्थ्य विभाग में 533 जच्चा-बच्चा किट के वितरण में अनियमितता सामने आई है। 2025 में तीन बार में कुल 533 किट उपलब्ध कराए गए थे, लेकिन वितरण के समय रजिस्टर पर हस्ताक्षर नहीं हुए। उपाधीक्षक ने संबंधित रिपोर्ट की मांग की है और सबूत उपलब्ध कराने के लिए 24 घंटे का समय दिया है।

पेज तीन के लिए ---------- हड़कंप 533 किट अनुमंडल अस्पताल को कराया गया था उपलब्ध 02 हजार की कीमत की सामग्री थी एक जच्चा-बच्चा किट में बक्सर, हमारे संवाददाता। स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टरों की मनमानी से लेकर अन्य अनियमितता की लगातार मामले प्रकाश में आते रहते है।
अनियमितता का मामला
इसी क्रम में 533 जच्चा-बच्चा किट के वितरण में अनियमितता का मामला सामने आ रहा है। इसे गंभीरता से लेते हुए अनुमंडल अस्पताल की डीएस ने संबंधित अधिकारी व कर्मी से किट उपलब्धता के संबंध में रिपोर्ट की मांग की है। प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2025 के अगस्त-सितंबर माह में तीन बार में कुल 533 जच्चा-बच्चा किट विभाग के स्तर से उपलब्ध कराया गया था। इस किट में दो ग्राम घी, ड्राई फ्रुट, चॉकलेट, खीर बनाने की सामान, चावल सहित अन्य खाद्य सामग्री थी। पूरे किट की कीमत करीब दो हजार रुपए के आसपास है।
महिलाओं को वितरण
प्रसव के बाद अस्पताल से छुट्टी लेकर जब महिलाएं अपने घर जाने लग रही थी। तब उन्हें यह उपहार स्वरूप देना था। अस्पताल सूत्रों ने बताया कि इसके वितरण के लिए रजिस्टर तैयार कर प्रसव वाली महिलाओं का नाम लिख दिया गया है। लेकिन, वितरण के समय ना तो कोई फोटोग्राफ लिया गया है और ना ही वितरण पंजी पर किसी भी महिला का हस्ताक्षर नहीं है। महज इसे एक कोरम पूरा किया गया है। यह सभी बातें उजागर होते ही अनुमंडल अस्पताल की उपाधीक्षक डॉ. प्रेमा कुमारी ने प्रसव कक्ष प्रभारी उमा कुमारी से संबंधित रिपोर्ट की मांग की है। उन्होंने निर्देश देते हुए कहा कि चौबीस घंटे के अंदर पूरी सूची उपलब्ध कराये। इसे साथ ही साक्ष्य भी उपलब्ध कराया जाए कि किन-किन महिलाओं को यह किट उपलब्ध कराया गया है। वहीं यह बात सामने आते ही अनुमंडल अस्पताल में हड़कंप मच गया है। (बक्सर से नवीन पाठक)
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