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बक्सरहाल-ए-गांव : कोरोना काल में गांव में छीने रोजगार, किसान हुए लाचार

हिन्दुस्तान टीम,बक्सरPublished By: Newswrap
Tue, 01 Jun 2021 10:50 AM
हाल-ए-गांव : कोरोना काल में गांव में छीने रोजगार, किसान हुए लाचार

चौसा। संवाद सूत्र

2020 के बाद 2021 में दूसरी बार कोरोना वायरस के संक्रमण के पुनः देशभर में दस्तक देने से अन्य जगहों के अलावा प्रखण्ड मुख्यालय में स्थित चौसा गांव के लोग भी इस जानलेवा रोग के प्रकोप से पूरी तरह से डर गये। डर के इस माहौल में राज्य सरकार के द्वारा विगत पांच मई से पूरे राज्य में 15 मई तक के लॉकडाउन लगा दिया तो ये डरे सहमे लोग पुनः अपने-अपने घरों में कैद हो गए।

आवश्यक वस्तुओं को छोड़कर सारी दुकानों के बंद होने से एक तरफ जहां लोगों को अपनी जरूरत का सामान मिलना मुश्किल हो गया, वहीं रोजगार धंधे बंद होने से चौसा के लोगों के सामने भी बेरोजगारी के संकट मंडराने लगे। ऐसी परिस्थिति में लोग करे तो क्या क्या करें। सरकार के निर्देशों का पालन करना जरूरी था। लाकडाउन की वजह से लोगों के घरों में कैद हो जाने और बारह बजे तक आवश्यक वस्तुओं की दुकानों को छोड़कर बाजारों के भी बंद रहने सड़कों पर सन्नाटा पसरने लगा।

चौसा में दर्जन भर से भी कम लोग ही आये कोरोना की गिरफ्त में

दूसरी बार तेज रफ्तार से आने वाले कोरोना वायरस के संक्रमण से यहां के लोगों में भी डर का आलम था। परन्तु, सजगता और सतर्कता की वजह से चौसा में बहुत कम ही लोग इसकी गिरफ्त में आए। बताया गया है कि मात्र दर्जन भर से भी कम लोग ही यहां कोरोना पाजिटिव पाए गये। इसमें किसी की मौत नहीं हुई। इस वजह से लोगों को राहत मिली है। वैसे, सरकार के निर्देश पर चौसा के 15 वार्डों में पंचायत की मुखिया आशा देवी के द्वारा उनके पति बृजबिहारी सिंह की देखरेख में सेनिटाइजर का छिड़काव किया गया है। इसके अलावा पंचायत के लोगों के बीच मास्क का वितरण भी शुरू कर दिया गया है।

युवा वर्ग के लोगों में नहीं दिखा कोरोना का भय:

कोरोना वायरस के बढ़ते हुए संक्रमण और लाकडाउन की मियाद बढ़ाए जाने के बावजूद कई युवाओं में इस कोरोना संक्रमण और उसके खतरे का भय नहीं दिखाई दिया। यही कारण था कि लाक डाउन के बावजूद कई युवा सड़कों और बाजारों में घुमते रहे। हालांकि, पुलिस और प्रशासन को देखते ही सड़कों से गायब हो जाते। हां, सुबह-शाम युवाओं के अलावा हर वर्ग के लोगों की कुछ भीड़ गांव के बाज़ार, गली और चौक-चौराहों पर जरुर दिखाई देती। इधर कोरोना के घटते हुए संक्रमण से लोगों का उत्साह भी अब बढ़ने लगा है। इस वजह से अब चौसा की सड़कों पर पहले से ज्यादा चहल-पहल दिखाई देने लगी है।

प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर इलाज की सुविधा

कोरोना संक्रमण के इस कठिन दौर में भी लोगों को प्रखण्ड मुख्यालय के यादव मोड़ पर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र यहां के लोगों के लिए इलाज का मुख्य केंद्र रहा। कोरोना की जांच और वैक्सीनेशन के बावजूद अस्पताल में तैनात चिकित्सकों और स्वास्थ कर्मियों से लोगों को मदद मिलती रही। इसके अलावा निजी चिकित्सकों से भी लोगों को राहत मिलती दिखाई दी।

पढ़ाई ठप होने से बच्चे और युवा बेहाल

लगातार दूसरे साल भी स्कूल, कालेज और अन्य शिक्षण संस्थानों के बंद कर दिए जाने से चौसा के बच्चों की भी पढ़ाई पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। एक साल से भी ज्यादा समय से स्कूलों के बंद रहने छोटे-छोटे जो ज्ञान बटोरे थे, वे भी लगभग भूल चुके हैं। इस वजह से बच्चों के माता-पिता और अन्य अभिभावकों में चिंता व्याप्त है। इस वजह से लोग कोरोना को खूब कोस रहे हैं। परन्तु, कोरोना के संक्रमण से बचाव के लिए सरकार के द्वारा किए जा रहे प्रयास की सराहना भी कर रहे हैं।

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