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बीएड कॉलेज में नामांकन शुरू नहीं होने से निजी में हो रहा शोषण

हिन्दुस्तान टीम,बक्सरPublished By: Newswrap
Wed, 01 Sep 2021 11:40 AM
 बीएड कॉलेज में नामांकन शुरू नहीं होने से निजी में हो रहा शोषण

डुमरांव। निज संवाददाता

बीएड में नामांकन के लिए पात्रता परीक्षा पास छात्र-छात्राओं की काउंसलिं के बाद संबंधित विश्वविद्यालय द्वारा नाम लिखवाने के लिए सूची जारी कर दी गई है। किसी को सरकारी बीएड कॉलेज मिल रहा है तो किसी को निजी। सरकारी कॉलेज जिसे मिल रहा है, उसका तो बल्ले-बल्ले है, लेकिन जिसे निजी मिल रहे हैं, बेचारे माथा पकड़ लेते हैं। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि डुमरांव बीएड कॉलेज में नामांकन शुरू हो गया रहता तो क्षेत्र के कम से कम दो सौ छात्र-छात्राओं का नामांकन होता और वे निजी कॉलेज में जाने से बच जाते।

नामांकन राशि अलग-अलग

मिली जानकारी के अनुसार विश्वविद्यालय द्वारा पास छात्र-छात्राओं के नामांकन के लिए निजी और सरकारी बीएड कॉलेजों में नामांकन की सूची जारी कर दी गई है। नामांकन के लिए छात्र-छात्रा कॉलेजों की दौड़ लगा रहे हैं। सरकारी बीएड कॉलेजों में राज्य सरकार ने जो नामांकन की राशि निर्धारित की है, उसके अनुसार पैसा जमा कराया जा रहा है। ठीक इसके विपरित जो निजी बीएड कॉलेज हैं, उनका हर कॉलेज में नामांकन शुल्क अलग-अलग है। जो सरकारी कॉलेजों से बहुत अघिक है। ऐसे में निर्धन छात्र-छात्राओं को पैसा जुटाने में पसीने छूट रहे हैं।

दो सौ गरीब छात्र-छात्राओं का होता कल्याण

डुमरांव में बीएड कॉलेज का भवन बनकर तैयार है। लगभग 20 करोड़ की लागत से बने इस डीएड कॉलेज में अबतक नामांकन की स्वीकृति नहीं मिल पाई है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि प्रबंधन यदि इस पर ध्यान दिया रहता तो इस वर्ष नामांकन शुरू हो गया रहता। वर्ष 2017 में ही एनसीटीई भूवनेश्वर ने केरला की टीम को निरीक्षण के लिए भेजा था। निरीक्षण के दौरान टीम ने भवन बन जाने के बाद स्वीकृति के लिए अनुशंसा पत्र भेजने की बात कही थी। इतना ही नहीं डायट के भवन के हैंडओवर होने के बाद 100 सीट बढ़ाने के लिए अनुशंसा पत्र देने की बात कही थी। न अनुशंसा पत्र भेजा गया और नहीं इसे चालू करने की स्वीकृति मिली।

मुखर होने लगे हैं बुद्धिजीवी

मेधावी छात्र-छात्रा सरकारी स्तर पर जिले में बीएड कॉलेज नहीं होने का दंश झेल रहे हैं। छात्र-छात्रा एवं उनके अभिभावक इसको लेकर उच्च अधिकारियों से मिलने की बात कर रहे हैं। शीघ्र ही एक शिष्टमंडल डीएम एवं एसडीओ डुमरांव से मिल वस्तु स्थिति से अवगत कराते हुए एक मांग पत्र सौंपने वाला है। इस संबंध में डा. मनीष कुमार, शिक्षाविद् ब्रह्मा पांडेय, शिवजी पाठक, सत्यनारायण प्रसाद, श्रद्धानंद तिवारी, रामनाथ तिवारी सहित अन्य का कहना है कि भवन नहीं था, तो इसका रोना रोया जा रहा था, अब बन गया है तो स्वीकृति के लिए कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है।

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