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24 नवंबर, 2020|11:42|IST

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कोरोना काल में परिवार नियोजन पर जोर, जागरूक कर रहीं आशा

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बक्सर। कार्यालय संवाददाता

जनसंख्या नियंत्रण को लेकर कोरोना काल में भी सरकार द्वारा बेहतर प्रयास किया जा रहा है। इस दिशा में स्वास्थ्य विभाग ने कई फहल की है। आशा, एएनएम और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से लोगों को जागरुक किया जा रहा है साथ ही परिवार नियोजन के साधनों के बारे में बताया जा रहा है।

बच्चों में अंतराल रखने के लिए अस्थायी साधन एवं सीमित परिवार के लिए स्थायी साधनों का इस्तेमाल किया जा सकता है। सरकार की तरफ से परिवार नियोजन में पुरुषों की भागीदारी को भी बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। पुरुष नसबंदी महिला नसबंदी की अपेक्षा सरल एवं आसान है। एक घण्टे में ही बिना चीड़फाड़ के नसबंदी की प्रक्रिया पूरी हो जाती है। इससे किसी भी प्रकार की यौन दुर्बलता नहीं होती है। वहीं, बच्चों में अंतराल रखने के लिए कॉपर टी भी एक असरदार एवं सुरक्षित साधन है।

15 से 49 वर्ष के दंपती पर है परिवार नियोजन की जिम्मेदारी :

अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी सह परिवार नियोजन कार्यक्रम के नोडल पदाधिकारी डॉ. कमल किशोर राय ने बताया स्वास्थ्य विभाग का मुख्य उद्देश्य आम लोगों में परिवार नियोजन को लेकर जागरूक करना है। जहां एक ओर गर्भनिरोधक साधनों से कुल प्रजनन दर में कमी आएगी, वहीं छोटा व खुशहाल परिवार बनेगा। परिवार नियोजन के साधनों के इस्तेमाल की ज़िम्मेदारी 15 साल से 49 साल तक के योग्य दंपति के कंधों पर ही होती है। इसके लिए कोरोनकाल में भी आशा एवं एएनएम द्वारा घर-घर जाकर योग्य दंपतियों को परिवार नियोजन के स्थायी एवं अस्थायी साधनों के विषय में जागरूक किया जा रहा है। परिवार नियोजन के अस्थायी साधन जैसे कंडोम, माला एन, छाया व ईजी पिल्स एवं अन्य गर्भनिरोधक गोली लोगों को घर ही मुहैया कराई जा रही है।

वर्ष 2025 तक प्रजनन दर 2.2 करने का लक्ष्य:

डॉ. कमल किशोर राय ने बताया "सैंपल रजिस्ट्रेशन सर्वे-2016 के आंकड़ों के अनुसार बिहार की कुल प्रजनन दर 3.3 है। मिशन विकास परिवार के तहत वर्ष 2025 तक सूबे के प्रजनन दर को 2.2 तक लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, साथ ही परिवार नियोजन कार्यक्रमों को मजबूती प्रदान करने के लिए मिशन विकास परिवार के तहत कई सेवाओं को शामिल किया गया है। लेकिन, राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-4 के आंकड़ों को देखा जाए तो जिले में 15 साल से 49 साल तक की 33.3 प्रतिशत महिलाएं किसी ना किसी गर्भनिरोधक साधन का उपयोग करती हैं। जबकि 29.8 प्रतिशत महिलाएं नवीन गर्भनिरोधक साधन का इस्तेमाल करती हैं।

अंतरा एवं छाया के लिए किया जा रहा जागरूक :

कोरोनकाल में नवीन गर्भनिरोधक साधन अंतरा एवं छाया के विषय में लोगों को जागरूक करने पर भी बल दिया गया है। बच्चों में अंतराल एवं अनचाहे गर्भ से बचाव के लिए दो नवीन गर्भ निरोधक- ‘अंतरा एवं ‘छाया भी उपलब्ध है। ‘अंतरा एक गर्भ निरोधक इंजेक्शन है जिसे एक या दो बच्चों के बाद गर्भ में अंतर रखने के लिए दिया जाता है। यह इंजेक्शन साल में चार बार दिया जाता है। सरकार द्वारा अंतरा इंजेक्शन लगवाने पर लाभार्थी को 100 रूपये एवं प्रेरक को भी 100 रूपये दिए जा रहे हैं। ‘छाया गर्भ निरोधक गोली है जिसका सेवन हर चार दिन में करना होता है और एक महीने तक यह गोली खानी होती है।

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  • Web Title:Emphasis on family planning in Corona period making hope aware