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20 सितम्बर, 2020|11:47|IST

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कोरोना संकट: मूर्तिकारों को है दुर्गापूजा का इंतजार

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बक्सर। निज संवाददाता

वैश्विक महामारी कोविड संकट के बीच अक्टूबर में पड़ने वाले दुर्गापूजनोत्सव को लेकर अभी तक संशय बरकरार है और मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित किए जाने को लेकर उहोपोह की स्थिति है। हालांकि फंकाकशी के बीच दुर्गापूजा की बेसब्री से इंतजार कर रहे मूर्तिकार पूरी तरह आशन्वित हैं। उन्हें उम्मीद है कि

श्रावणी समेत अन्य पर्व-त्योहारों की तरह दुर्गापूजा पर प्रतिबंध नहीं रहेगा और उन्हें प्रतिमा बनाने का मौका मिलेगा।

मां दुर्गा की मूर्ति निर्माण को लेकर पश्चिम बंगाल से भी मूर्तिकार पहुंचते हैं। लेकिन लॉकाडाउन के कारण वे भी अभी तक नहीं पहुंचे हैं। इधर स्थानीय कारीगर सरकारी निर्णय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। जाहिर है कि दर्जन भर यहां के स्थानीय मूर्तिकार मां दुर्गा की प्रतिमा बनाते हैं। जिसकी आमदनी से उनके जीवन नैया पार लगती है।

दर्जन भर मूर्तिकार बनाते हैं मां दुर्गा की प्रतिमाएं : शहर में तकरीबन दर्जन भर मूर्तिकार मां दुर्गा की प्रतिमाओं का निर्माण करते हैं। इनके द्वारा निर्मित प्रतिमाओं को इटाढ़ी व चौसा समेत अन्य कस्बाई व ग्रामीण क्षेत्रों में मांग होती हैं। जबकि बक्सर व डुमरांव आदि शहरी क्षेत्रों में पश्चिम बंगाल से आने वाले तपन पाल व मदन पाल की बनाईं प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। इससे प्रति साल इन्हें अच्छी-खासी कमाई होती है। इसी तरह स्थानीय मूर्तिकारों को भी उनके जीवन-यापन का खर्चा निकल जाता है। स्थानीय मूर्तिकारों की माने तो वे औसतन छह से दस मूर्तियां बनाते हैं। जिससे उन्हें 50 हजार से लेकर एक-डेढ़ लाख तक की आमदनी हो जाती है।

चालीस मूर्तियों का किए थे पिछले साल निर्माण : शहर के सोहनीपट्टी स्थित कुम्हार टोली के रहने वाले मूर्तिकार विश्वनाथ प्रजापति ने बताया कि यहां के विजय प्रजापति, टुनटुन प्रजपति, शिवशंकर प्रजापति, मुक्तेश्वर प्रजापति, उमा कान्त प्रजापति व बहादुर प्रजापति के अलावा अन्य कारीगर मां दुर्गा की प्रतिमाएं बनाते हैं। इसके अलावा सारिमपुर में मूर्तियों का निर्माण किया जाता है। उन्होंने बताया कि पिछले साल 35 प्रतिमाओं का आर्डर मिला था। लेकिन इस बार अभी तक कोई आर्डर नहीं मिला है, लेकिन उन्हें भरोसा है कि दुर्गा पूजा मनाने की छूट मिलेगी तथा पूजनोत्सव मनेगा।

एक माह का समय काफी : मूर्तिकारों ने बताया कि वैसे तो सामान्य दिनों में श्रावण महीना से ही उन्हें आर्डर मिलना शुरू हो जाता है। जिसके आलोक में वे सितंबर में प्रतिमा निर्माण प्रारंभ कर देते थे। परंतु उन्हें एक माह का वक्त मिलेगा तो भी वे प्रतिमाओं को बनाने का कार्य पूरा कर लेंगे। उनका कहना था कि दीपावली में मां लक्ष्मी की पूजा को लेकर भी वे मूर्तियों के साथ खिलौने व मिट्टी के दीए आदि का निर्माण करते हैं।

ठप हो जाएंगे सभी कार्य : मूर्तिकारों ने कहा कि दुर्गापूजा व दीपावली की आमदनी से उनके बच्चों की पढ़ाई से लेकर घर में पड़ने वाले शादी-विवाह अथवा अन्य उत्सव का खर्च निकलता है। लॉकाडाउन के कारण वे पूरी तरह बेरोजागर होकर निठल्ला बैठे हैं। जिससे पहले के बचे-खुचे पैसे भी खाने-पीने व इलाज आदि में चट हो गए हैं। उनकी जिंदगी फंकाकशी में कट रही है तथा कर्ज में डूबने के साथ भूखमरी की नौबत आ गई है। ऐसे में यदि दुर्गापूजा में प्रतिमा निर्माण का मौका मिलेगा तो भी शादी-विवाह आदि कार्य की बात बेमानी है।

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  • Web Title:Corona Crisis Sculptors await Durga Puja