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कड़ाके की ठंड में मवेशियों की देखभाल बनी चुनौती

कड़ाके की ठंड में मवेशियों की देखभाल बनी चुनौती

संक्षेप:

पेज पांच के लिएपेज पांच के लिए ---------- सुरक्षित रखें गाय-भैंस के कम दूध देने से पशुपालकों को नुकसान कड़ाके की ठंड से जनजीवन प्रभावित, लोग परेशान फोटो संख्या- 14, कैप्सन- डुमरांव के दक्षिण टोला...

Dec 21, 2025 08:08 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, बक्सर
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पेज पांच के लिए ---------- सुरक्षित रखें गाय-भैंस के कम दूध देने से पशुपालकों को नुकसान कड़ाके की ठंड से जनजीवन प्रभावित, लोग परेशान फोटो संख्या- 14, कैप्सन- डुमरांव के दक्षिण टोला मोहल्ले में पशुपालक के दरवाजे पर बंधे मवेशी। डुमरांव, संवाद सूत्र। अनुमंडल क्षेत्र में लगातार सूर्य के दर्शन नहीं होने से पशु, पक्षी व मवेशी के साथ आम लोगों की परेशानी बढ़ गयी हैं। बाजार में चहल-पहल कम होने से व्यवसायियों का व्यवसाय भी प्रभावित हैं। तो, मवेशियों के दूध में कमी होने से पशुपालकों को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता हैं। मवेशियों को ठंड से बचाना पशुपालकों के लिए चुनौती बन गई है।

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ठंड और धुंध के कारण सड़कों पर गाड़ियों की रफ्तार थम गयी हैं। दिन में भी लाइट जलाकर वाहन चलाने के लिए चालक विवश हैं। ठंड के कारण बुजुर्ग और बच्चों को अधिक परेशानी हैं। सरकारी अस्पतालों में मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ हैं। वहीं स्थानीय पशुपालक अमरेंद्र कुमार, पिंटू राय, त्रिलोकी यादव व मुकेश कुशवाहा ने बताया कि उनकी गाय सुबह-शाम दस लीटर दूध देती थी। लेकिन, ठंड की वजह से अब एक से डेढ़ लीटर कम दूध दे रही है। जबकि, भैंस आठ लीटर की जगह अब केवल छह लीटर दूध देने लगी है। ऐसे में दूध की आपूर्ति कम हो जाने से उनकी आय में कमी आ गयी है। बुजुर्ग पशुपालक भगवानजी यादव ने बताया कि इस मौसम में मवेशी आहार लेना व पानी पीना कम कर देते हैं। इसलिए उन्हें गुनगुना पानी पिलाया जा रहा है। अकालूपुर के राजेश कुमार बताते हैं कि उनकी गाय आसपास के इलाके में चरने जाती है। ठंड इतनी ज्यादा है कि उन्हें सुरक्षित रखना मुश्किल हो गया है। पक्षियों पर भी पड़ रही है ठंड की मार तापमान की गिरावट का असर पेड़ पर अपना घोसला बनाकर रहने वाले पक्षियों के ऊपर भी देखने को मिल रहा है। सर्दी के मौसम में सबसे अधिक कबूतर व तोते समेत अन्य पक्षियों के बच्चे बीमार होते हैं। पक्षी ठंड से खुद को बचाने के लिए पंख का सहारा लेते हैं जिसके कारण ठंड उनके शरीर को छू भी नहीं पाती। लेकिन, कबूतर व तोते समेत अन्य पक्षियों के बच्चों के पंख विकसित होने में समय लगता है। ऐसे में वह ठंड की चपेट में आ जाते हैं। छोटे पंख होने के कारण वह ठंड से अपनी रक्षा नहीं कर पाते। वह ठंड से बेहाल होकर जमीन पर गिर जाते हैं। क्या कहते हैं पशु चिकित्सक पशु चिकित्सक ने बताया कि ठंड में पशुपालक दुधारू मवेशियों को अच्छे से देखभाल करें। उन्हें संतुलित पौष्टिक आहार दे। नियमित रूप से ऐसा करने से मवेशियों के अंदर दूध देने की क्षमता पूर्व की तरह रहेगी। गौशाला और खटालों को चारों ओर से टाट के पर्दे लगाना चाहिए। ताकि ठंड से बचाव हो। साथ ही मवेशियों के शरीर को बोरा से ढककर रखे। अधिक ठंड बढ़ने पर गौशाला के अंदर अंगीठी जलाये। लेकिन, रात्रि पहर उसे बुझा दें। डॉ. अमितेश कुमार, पशु चिकित्सक डुमरांव