Hindi NewsBihar NewsBuxar NewsCold Wave Threatens Vegetable Crops with Frost and Blight in Buxar District
रबी की बोई जा चुकी फसल के लिए बेहतर है मौसम

रबी की बोई जा चुकी फसल के लिए बेहतर है मौसम

संक्षेप:

बक्सर जिले में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के कारण सब्जी की फसल पर पाला और झुलसा का खतरा बढ़ गया है। खेतों में नमी के चलते रबी की बुआई में देरी हो रही है, जिससे किसानों को नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि आलू, बैंगन, टमाटर और मिर्च की फसलें सबसे अधिक प्रभावित होंगी।

Dec 21, 2025 08:08 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, बक्सर
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शीतलहर सब्जी की फसल पर होगा पाला और झुलसा का प्रकोप जिले के कई हिस्सों में खेतों में बहुत ज्यादा नमी हो गई बक्सर, हिन्दुस्तान संवाददाता। कड़ाके की ठंड और घना कोहरा रबी की बोई जा चुकी फसल के लिए फायदेमंद है। लेकिन, जहां खेतों में नमी के चलते अभी तक बुआई नहीं हुई, वहां के किसानों के लिए यह मुसीबत है। वहीं सब्जी की फसल के लिए पूरी तरह नुकसानदायक। फिलहाल जिले में शीतलहर का प्रकोप है। रविवार को न्यूनतम तापमान 9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं घना कोहरा गिर रहा है। सुबह से शाम तक कोहरा छाया रहता है।

जनजीवन अस्त-व्यस्त हो चुका है। सर्द मौसम का प्रभाव खेती-बारी पर भी पड़ रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ रामकेवल ने बताया कि जिन किसानों ने गेहूं, चना और मसूर की बुआई कर ली है, उन्हें चिंता करने की जरूरत है। उनके लिए यह फायदेमंद है। लेकिन, बीते अक्टूबर महीने के अंत में हुई बारिश के कारण जिले के कई हिस्सों में खेतों में बहुत ज्यादा नमी हो गई। उन हिस्सों में रबी की बुआई नहीं हो सकी। अभी बहुत जगहों पर गेहूं की बुआई चल रही है। अब जिस तरह का मौसम हो रहा है, उससे रबी की बुआई में और देरी होने का डर बढ़ गया है, क्योंकि ठंड और कोहरे के चलते खेतों में नमी और बढ़ेगी। डॉ रामकेवल ने कहा कि जनवरी में बुआई करने पर गेहूं का उत्पादन बुरी तरह प्रभावित होगा। किसानों को काफी नुकसान होगा। सब्जी की फसल के लिए खतरनाक है ठंड और कोहरा घना कोहरा और शीतलहर सब्जी की फसल के लिए काफी खतरनाक है। कृषि वैज्ञानिक डॉ रामकेवल ने बताया कि इस मौसम में सबसे ज्यादा खतरा आलू, बैंगन, टमाटर और मिर्च की फसल को है। इन फसल पर पाला का प्रभाव पड़ सकता है। इससे बचाव के लिए किसान मिट्टी की गुड़ाई नहीं करें। पाला पड़ने की आशंका हो तो हल्की सिंचाई कर दें। घुलनशील गंधक 80 प्रतिशत डब्लू पी का 3 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बना छिड़काव किया जा सकता है। खेतों के चारों कोनों पर शाम में धुआं किया जाना भी लाभकारी साबित होता है। ऐसे में झुलसा रोग भी फैलता है। इससे बचने के लिए सात दिनों के अंतराल पर फफूंदनाशी का छिड़काव करें।

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