Buxar News: 27 अगस्त को मनेगा त्रिपुर सुंदरी मां भगवती का वार्षिक पूजनोत्सव
Buxar News: डुमरांव के लालाटोली रोड स्थित राज राजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी मां भगवती मंदिर में 27 अगस्त को वार्षिक पूजनोत्सव मनाया जाएगा। इस अवसर पर विशेष पूजा, धार्मिक अनुष्ठान और विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। श्रद्धालुओं की भारी संख्या के पहुंचने की संभावना है।

Buxar News: श्रद्धा 10 महाविद्याओं की प्रतिमाओं से मंदिर सुशोभित, दूर-दराज से पहुंचते हैं श्रद्धालु वार्षिकोत्सव पर विशेष पूजा-अर्चना के साथ होगा विशाल भंडारा का आयोजन फोटो संख्या- 07, कैप्सन-डुमरांव के लाला टोली रोड स्थित मंदिर में स्थापित मां भगवती की प्रतिमा। डुमरांव, संवाद सूत्र। शहर के लालाटोली रोड स्थित ऐतिहासिक राज राजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी मां भगवती मंदिर में आगामी 27 अगस्त को वार्षिक पूजनोत्सव श्रद्धा और भक्ति के माहौल में मनाया जाएगा।
विशेष पूजा और आयोजन
वार्षिकोत्सव को लेकर मंदिर प्रबंधन और श्रद्धालुओं की ओर से तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। इस अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना, धार्मिक अनुष्ठान और विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। पूजनोत्सव में डुमरांव के अलावा आसपास के क्षेत्रों और दूर-दराज से भी काफी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। बताया जाता है कि राज राजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी का यह मंदिर धार्मिक और तांत्रिक साधना की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। पूरे शाहाबाद क्षेत्र में दस महाविद्याओं के पूजन का यह इकलौता प्रमुख तांत्रिक मंदिर होने की मान्यता है। तंत्र साधना और आध्यात्मिक साधना से जुड़े श्रद्धालु यहां विशेष अवसरों पर पहुंचते हैं।
माता की आराधना
मान्यता है कि सच्चे मन से मां की आराधना करने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मंदिर की सबसे बड़ी विशेषताओं में यहां स्थापित विभिन्न देवी-देवताओं की प्रतिमाएं शामिल हैं। प्रधान देवी राज राजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी के साथ बगलामुखी माता, तारा माता, दत्तात्रेय भैरव, बटुक भैरव, अन्नपूर्णा भैरव, काल भैरव और मातंगी भैरव की प्रतिमाएं भी मंदिर परिसर में स्थापित हैं। इसके अलावा काली, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, तारा, छिन्नमस्ता, षोडशी, मातंगी, कमला, उग्र तारा और भुवनेश्वरी सहित दस महाविद्याओं की प्रतिमाएं भी यहां विराजमान हैं। यही वजह है कि मंदिर तंत्र साधना के जानकारों और श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था का केंद्र बना हुआ है।
पुजारी की जानकारी
मंदिर के पुजारी किरण मिश्रा के अनुसार, करीब 450 वर्ष पूर्व इस मंदिर की स्थापना हुई थी। लंबे समय से यह मंदिर धार्मिक आस्था के साथ-साथ तांत्रिक साधना के केंद्र के रूप में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। मंदिर की परंपराएं भी अन्य मंदिरों से अलग हैं। यहां सामान्य रूप से कलश स्थापना नहीं की जाती है। मां को प्रसाद के रूप में सूखे मेवे चढ़ाने की विशेष परंपरा रही है। निस्तब्ध निशा में आवाज आने की मान्यता मंदिर से कई धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यताएं भी जुड़ी हुई हैं। श्रद्धालुओं के बीच यह मान्यता प्रचलित है कि पूर्ण रूप से तांत्रिक स्वरूप वाले इस मंदिर में निस्तब्ध निशा के दौरान देवी-देवताओं की प्रतिमाओं से आवाज सुनाई देती है। इसी तरह की अनेक मान्यताएं मंदिर के प्रति लोगों की आस्था को और मजबूत करती हैं। हालांकि इन मान्यताओं को लेकर श्रद्धालुओं की अपनी-अपनी आस्था है।
भंडारे की व्यवस्था
वार्षिक पूजनोत्सव को लेकर मंदिर परिसर में विशेष तैयारियां की जा रही हैं। सुबह से ही पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों का दौर शुरू होगा। मां भगवती के दर्शन और पूजन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे की भी व्यवस्था की जाएगी। वार्षिकोत्सव के दिन मंदिर परिसर भक्तिमय माहौल में डूबा रहेगा और मां राज राजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी के जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठेगा। (डुमरांव से अमरनाथ केशरी)


