ब्रेस्ट कैंसर: मोटापा और धूम्रपान से 30 की उम्र में ही आ रही बीमारी, स्तनपान कराने से कितना लाभ?
अध्ययन के मुताबिक, ब्रेस्ट कैंसर की मरीजों की संख्या हर महीने बढ़ रही है। ओपीडी में आने वाली मरीजों की हिस्ट्री में मोटापा, धूम्रपान, लगातार तनाव, शारीरिक सक्रियता की कमी और अस्वास्थ्यकर खानपान जैसे कारण सामने आए हैं।

Breast Cancer: मोटापा और धूम्रपान से महिलाएं कम उम्र में ही ब्रेस्ट कैंसर की चपेट में आ रही हैं। पीएमसीएच, आईजीआईएमएस, एम्स पटना और महावीर कैंसर संस्थान में पिछले पांच वर्षों में इलाज के लिए पहुंचीं महिला कैंसर मरीजों के अध्ययन में यह बात सामने आई है। जुलाई 2022 से जुलाई 2026 तक इन चार अस्पतालों में 3 लाख 56 हजार महिला कैंसर मरीज पहुंचीं, जिनमें करीब डेढ़ लाख ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित पाई गईं। इनमें 28 से 30 वर्ष की उम्र वाली महिलाओं की संख्या भी बड़ी है। सोसाइटी ऑफ अंकोलॉजी बिहार ने चारों अस्पतालों की ओपीडी में इलाज के लिए पहुंचीं महिला कैंसर मरीजों को अध्ययन में शामिल किया था।
हर महीने बढ़ रहीं मरीज
अध्ययन के मुताबिक, ब्रेस्ट कैंसर की मरीजों की संख्या हर महीने बढ़ रही है। ओपीडी में आने वाली मरीजों की हिस्ट्री में मोटापा, धूम्रपान, लगातार तनाव, शारीरिक सक्रियता की कमी और अस्वास्थ्यकर खानपान जैसे कारण सामने आए हैं। बड़ी संख्या में ऐसी महिलाएं भी ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित मिलीं, जिन्होंने मां बनने के बाद शिशु को स्तनपान नहीं कराया।
क्या कहते हैं डॉक्टर?
मोटापा और धूम्रपान महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का प्रमुख कारण बन रहा है। सिगरेट और तंबाकू के सेवन का असर शरीर के हार्मोनल संतुलन पर पड़ता है, जिससे महिलाएं कम उम्र में ही ब्रेस्ट कैंसर की शिकार हो रही हैं। -डॉ. पूजा सिंह, ओंकोलॉजिस्ट, पीएमसीएच
स्तनपान से एस्ट्रोजन का स्तर नियंत्रित रहता है
पीएमसीएच की स्त्री एवं प्रसूति विभाग की पूर्व चिकित्सक डॉ. आभा रानी ने बताया कि महिलाओं के स्तनपान कराने से शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर नियंत्रित रहता है। इससे कैंसर कोशिकाओं के बढ़ने की संभावना कम होती है। एस्ट्रोजन का स्तर बढ़ने पर यह स्तन कैंसर की कोशिकाओं के विकास को बढ़ावा दे सकता है। स्तनपान के दौरान स्तन के ऊतकों में बदलाव होता है, जिससे ऐसी कोशिकाएं बाहर निकल जाती हैं, जिनमें भविष्य में कैंसर होने की संभावना हो सकती है।
चिकित्सकों ने बताए बचाव के उपाय
● तंबाकू और सिगरेट छोड़कर शरीर का हार्मोनल संतुलन बेहतर रखें
● धूम्रपान से दूरी बनाएं और इसके धुएं के संपर्क में आने से भी बचें
● नियमित व्यायाम करें और संतुलित आहार लें
● स्तनों में गांठ, सूजन या किसी तरह का बदलाव महसूस होने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें
● संभव हो तो शिशु को लंबे समय तक स्तनपान कराएं
● 30 वर्ष की उम्र के बाद चिकित्सकीय सलाह के अनुसार मैमोग्राफी जांच कराएं
धूम्रपान से डीएनए को नुकसान
अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार, सिगरेट के धुएं में मौजूद कार्सिनोजेन कोशिकाओं के डीएनए को नुकसान पहुंचाते हैं। धूम्रपान शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को भी कमजोर करता है। वहीं, मोटापा शरीर में हार्मोनल असंतुलन पैदा करता है, जिससे ब्रेस्ट कैंसर की कोशिकाओं के विकास की आशंका बढ़ जाती है।


