बाढ़ ने झगड़ा-फसाद पर लगाया लगाम, 20 दिनों में मनेर दियारे से 1 भी मामला नहीं आया
बाढ़ आने पर पिछले 20 दिनों से झगड़े-फसाद की आवाज थम सी गई है। मनेर दियारे की छह पंचायतों के 18 गांव बाढ़ में घिरे हैं। 60 हजार की आबादी इसकी मार झेल रही है।

अमोल बजाज, मनेर
बिहार के बाढ़ प्रभावित इलाकों में झगड़ा-फसाद पर लगाम लगा है। मनेर के दियारे में जहां हर रोज जमीन विवाद, मामूली बातों पर कहासुनी होती थी और बात-बात पर लोग थाने पहुंच रहे थे वहां बाढ़ आने पर पिछले 20 दिनों से झगड़े-फसाद की आवाज थम सी गई है। मनेर दियारे की छह पंचायतों के 18 गांव बाढ़ में घिरे हैं। 60 हजार की आबादी इसकी मार झेल रही है। लेकिन थाने में इन गांवों से झगड़े, फसाद या भूमि विवाद का एक भी मामला दर्ज नहीं हुआ है। 60 हजार की आबादी मनेर प्रखंड और दियारा में पिछले 20 दिनों से बाढ़ की विभीषिका झेल रही है।
पुलिस के रिकॉर्ड बताते हैं कि सामान्य दिनों में इन क्षेत्रों से रोजाना दो से पांच आवेदन थाने में आते थे। इनमें घरेलू हिंसा, जमीनी विवाद, अवैध शराब, आपसी मारपीट, गली-नाली विवाद और छोटी चोरियों जैसी घटनाएं शामिल रहती थीं। मनेर थाने का रिकॉर्ड देखने पर पता चला कि 20 अगस्त से पहले इन इलाकों से 19 अगस्त कोदो, 18 को चार , 17 को एक और 16 अगस्त को चार मामले आए थे। जबकि 21 अगस्त से 10 सितंबर तक दियारा की मगरपाल, कित्ता चौहत्तर पूर्वी, पश्चिमी, मध्य, रामपुर तौफिर और सुअरमरवा पंचायत से एक भी प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई है।
सैकड़ों बीघे में लगी सब्जी की फसल बर्बाद
बाढ़ के बाद खेतों से जैसे-जैसे पानी निकल रहा है, किसानों का कलेजा फटता जा रहा है। मनेर के पश्चिमी दियारे के हुलासी टोला, रामपुर, भवानी टोला, सुअरमरवा, रामबाद, पतीला आदि गांवों में करीब 400 बीघे में लगी मक्का और सब्जी की खेती बर्बाद हो गई है।खेतों से पानी तो निकल गया, लेकिन भिंडी, नेनुआ, बैगन, झिंगनी आदि सब्जियों के पौधे गलकर सूख गए हैं। रामपुर तौफिर पंचायत के वार्ड-13 के वार्ड सदस्य सुजीत कुमार ने बताया कि उनके गांव में 100 बीघा से अधिक में सब्जी की खेती होती है। किसानों को उम्मीद थी कि बाढ़ का पानी निकलने के बाद पौधों को नुकसान नहीं होगा, लेकिन पानी घटने पर सभी पौधे गलकर सूख गए। उन्होंने बताया कि सभी छोटे किसान हैं, जिन्होंने कर्ज लेकर और अपनी जमापूंजी से खेती की थी। अब सभी के पैसे डूब गए हैं और उन पर कर्ज हो गया है। किसान सरकार से सहायता और मुआवजे की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
नाव की भुगतान के लिए कार्यालय का लगा रहे
बाढ़ में नाव चलाने वाले नाविक भुगतान के लिए प्रखंड और अंचल कार्यालय का चक्कर काट रहे हैं। इस्लामगंज के लक्ष्मण साहनी, पप्पू साहनी एवं माथुर साहनी ने बताया कि हमलोग बाढ़ में करीब एक महीना नाव चलाये हैं। नाव चलाने के लिए रोज 10 लीटर डीजल मिलता था। अभी तक कुछ भी पैसा नहीं मिला है। मुखिया जी पैसा देने के लिए प्रखंड कार्यालय बुलाये थे। लेकिन हमलोगों को पैसा नहीं मिला। रोज - रोज पैसा के लिए हैरान हो रहे हैं।
क्या कहते हैं थानेदार?
पिछले 15 - 20 दिनों में दियारा से एक भी मामला दर्ज नहीं किया गया है। न ही किसी विवाद का आवेदन आया है। इस दौरान कोई गिरफ्तारी भी बाढ़ प्रभावित इलाकों से नहीं हुई है। -रजनीश कुमार, थानाध्यक्ष , मनेर


