भैसों की दिलेरी देख उलटे पैर भागा टाइगर, मालिक की जान बचाने को बाघ से भिड़ गईं
पश्चिम चंपारण जिले में वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से सटे एक गांव में भैंसों ने दिलेरी दिखाते हुए एक बाघ से भिड़ गईं। तीनों भैंसों ने मिलकर टाइगर को उलटे पैर भागने को मजबूर कर दिया और अपने मालिक की जान बचा ली।

खतरा देख भले ही इंसान अपनों से भी मुंह मोड़ ले, लेकिन कई बार मूक पशु रिश्ते और वफादारी की कीमत जता बड़ी सीख दे जाते हैं। ऐसी ही एक घटना बिहार के पश्चिम चंपारण जिले से सामने आई। जहां अपने मालिक को बचाने के लिए भैंसें टाइगर से भिड़ गईं। बाघ ने शिकार बनाने के लिए एक किसान पर हमला कर दिया। खतरा देख तीन भैंसे तुरंत बाघ पर टूट पड़ीं। भैंसों की दिलेरी के आगे टाइगर के भी पसीने छूट गए। आखिरकार वह उलटे पांव भाग गया।
यह वाकया सहोदरा थाना क्षेत्र के शेरवा मंडिहा गांव का है। शेरवा मंडीहा निवासी साहेब यादव का पुत्र उपेंद्र कुमार (23) सोमवार सुबह सात भैंसों को चराने गया था। छोटे भाई भपेंद्र ने बताया कि उपेंद्र करीब 9:30 बजे पंडई नदी के घाट पर भैंसों को नहला रहा था। इसी दौरान झाड़ियों से निकले बाघ ने उस पर हमला कर दिया।
बाघ उपेंद्र को बुरी तरह नोंच कर उसकी जान लेने लगा। इतने में वहां मौजूद 3 तीन भैंसें टाइगर की ओर लपक गईं। भैंसों ने सींग मार-मारकर बाघ को घायल कर दिया। भैंसों ने एक खूंखार जंगली जानवर को पीछे हटने को मजबूर कर दिया। बाघ वहां से भागकर झाड़ियों में जा छिपा।
उपेंद्र के शोर मचाने पर ग्रामीण पहुंचे और उसे गौनाहा रेफरल अस्पताल ले जाया गया। उसे पेट और कमर में गहरे जख्म आए हैं। डॉक्टर सचिन कुमार ने बताया कि परिजन करीब दोपहर साढ़े 12 बजे घायल उपेंद्र को लेकर पहुंचे। वह अचेत अवस्था में था। लेकिन खतरे से बाहर है।
बाघ से भिड़ंत में तीनों भैंसें भी घायल हो गईं। रेंजर सुनील कुमार पाठक ने बताया कि घटनास्थल पर वन कर्मियों को भेजा गया है। बाघ की तलाश की जा रही है। घटना से गांव में दहशत है।
वीटीआर से सटा है इलाका
जिस जगह यह घटना हुई वह क्षेत्र वाल्मीकि नगर टाइगर रिजर्व से सटा हुआ है। वीटीआर में बाघों की संख्या लगभग 5 दर्जन है। जंगल के आसपास के क्षेत्र में अक्सर बाघों का इंसानों से आमना-सामना होता रहता है। वैसे तो बाघ इंसानों पर हमला नहीं करते हैं। लेकिन कभी-कभार कुछ बाघ आदमखोर हो जाते हैं तो वे इंसानों को अपना शिकार बनाने लगते हैं।
3 साल पहले मारा गया था आदमखोर बाघ
साल 2022 में वीटीआर का बाघ टी-105 आदमखोर बन गया था। उसने पश्चिम चंपारण जिले के अलग-अलग गांवों के 10 लोगों को शिकार बनाकर उनकी जान ले ली थी। वन विभाग की टीम ने उसे कई बार पकड़ने की कोशिश की लेकिन वो हाथ नहीं आया। नेपाल से विशेषज्ञ भी बुलाए गए। बाद में उसे गोली मारने का आदेश निकाला गया और शूटर्स बुलाए गए। टी-105 को अक्टूबर 2022 में मार गिरा दिया गया था।
लेखक के बारे में
Jayesh Jetawatजयेश जेतावत एक अनुभवी, जुझारू एवं निष्पक्ष पत्रकार हैं। बीते 10 सालों से स्थानीय मुद्दों को कवर कर रहे हैं। राजनीतिक, सामाजिक और आपराधिक घटनाओं की रिपोर्टिंग एवं संपादन में महारत हासिल है। बिहार में पर्यटन एवं इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी गहरी पकड़ रखते हैं। तकनीकी रूप से निपुण जयेश, तथ्यों की बारीकी से जांच कर समयसीमा के भीतर पाठकों तक सटीक खबरें एवं शोध-परक विश्लेषण पहुंचाते हैं। जनसरोकार के मुद्दे उठाना, पेशेवर नैतिकता का पालन करना, समाज एवं मानव कल्याण के प्रति जिम्मेदारी, इन्हें और भी योग्य बनाती है। भाषा पर इनकी अच्छी पकड़ है। जटिल मुद्दों को पाठकों एवं दर्शकों तक आसान शब्दों में पहुंचाना इनकी खूबी है।
जयेश जेतावत मूलरूप से मेवाड़ क्षेत्र (राजस्थान) के रहने वाले हैं। इन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से जनसंचार में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की। इसके बाद ईटीवी भारत में बतौर प्रशिक्षु समाचार संपादक के रूप में काम शुरू किया। फिर इंडिया न्यूज के डिजिटल सेक्शन में विभिन्न बीट कवर की। इसके बाद, वे2न्यूज में बतौर टीम लीडर तीन राज्यों की कमान संभाली। साल 2021 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े, तब से यहां बिहार की खबरों को कवर कर रहे हैं। जयेश ने टाइम्स ऑफ इंडिया, लाइव इंडिया न्यूज चैनल और सी-वोटर रिसर्च एजेंसी में इंटर्नशिप भी की। पटना से प्रकाशित मैगजीन राइजिंग मगध में समसामयिक विषयों पर इनके लेख छपते रहे हैं। समाचार लेखन के अलावा जयेश की साहित्यिक पठन एवं लेखन में रुचि है, सामाजिक मुद्दों पर कई लघु कथाएं लिख चुके हैं।


