बिहार में जिलाध्यक्षों की सूची बदलेगी कांग्रेस, जातीय संतुलन बनाने को किसका नाम कटवाएंगे राजेश राम?
Bihar Congress District President List: बिहार में 36 साल से सत्ता से दूर 6 विधायकों वाली कांग्रेस के 53 जिलाध्यक्षों की सूची पर 24 घंटे के अंदर बदलाव के बादल छा गए। प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने कहा है कि संशोधित सूची आएगी।
Bihar Congress District President List: बिहार के 38 जिलों में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने जिन 53 संगठन जिलों के जिलाध्यक्ष की नियुक्ति की सूची जारी की थी, उस लिस्ट पर 24 घंटे के अंदर बदलाव के बादल छा गए हैं। बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने जिलाध्यक्षों की सूची में ‘जिसकी जितनी हिस्सेदारी, उसकी उतनी भागीदारी’ का अभाव माना है और कहा है कि लिस्ट में संशोधन होगा। प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम का यह बयान इशारा कर रहा है कि पार्टी आलाकमान की तरफ से सूची जारी करने से पहले बिहार कांग्रेस को भरोसे में नहीं लिया गया। राजेश राम अब कह रहे हैं कि लिस्ट रिवाइज होगी। उनकी बात दिल्ली ने सुनी तो 53 जिलाध्यक्षों में कुछ नाम कटेंगे। वो नाम किसके होंगे, किस जाति से होंगे, यह सवाल अब पटना से दिल्ली तक सबको परेशान करेगा।
बीपीसीसी अध्यक्ष राजेश राम स्वयं इस मसले पर इधर-उधर दोनों तरफ की बातें करते दिख रहे हैं। सोमवार की रात उन्होंने जिलाध्यक्षों की लिस्ट खुद सोशल मीडिया पर पोस्ट करके सबको बधाई दी और पार्टी को मजबतू करने की बातें की। मंगलवार को जब पत्रकारों ने लिस्ट में जातीय समीकरणों और खास तौर पर अति पिछड़ी जातियों की अनदेखी पर सवाल पूछा तो राजेश राम बताने लगे कि संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल के पास उन्होंने आपत्ति दर्ज कराई है और सूची को संशोधन के बाद दोबारा जारी किया जाएगा। इस पूरे प्रकरण में मजेदार बात यह भी है कि बिहार कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अल्लावरु ने इस सूची को लेकर सोशल मीडिया पर खामोशी साध रखी है।
कांग्रेस के 53 नवनियुक्त जिलाध्यक्षों की सूची में 43 नए चेहरे हैं जबकि 10 पुराने अध्यक्ष को फिर से मौका दिया गया है। जातीय समीकरणों के हिसाब से इन 53 में 24 सवर्ण हैं, जिनकी हिस्सेदारी बिहार के जातीय सर्वे के मुताबिक आबादी में 15 फीसदी के करीब है। 36 फीसदी आबादी वाले अति पिछड़ा वर्ग को इस सूची में कोई तवज्जो नहीं मिली है। उनके मुकाबले 27 फीसदी आबादी के साथ ओबीसी जातियों को महत्व मिला है। दलित और मुसलमान को ठीक-ठाक संख्या में अध्यक्ष के पद मिले हैं। कांग्रेस की सूची में 10 ब्राह्मण, 10 यादव , 7 मुस्लिम, 7 दलित, 7 भूमिहार, 5 राजपूत, 3 कुशवाहा, 2 कायस्थ, 1-1 सिख और अन्य जातियां हैं।
कांग्रेस की लिस्ट से बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की राजनीति का केंद्र रही अति पिछड़ी जाति के नेता लुप्त हैं। खुद नीतीश कुमार की जाति कुर्मी और धानुक भी लिस्ट से बाहर है। बिहार में सत्ता से 36 साल से दूर कांग्रेस अब मात्र 6 विधायकों की पार्टी रह गई है। पार्टी में अनुशासन का हाल यह है कि अभी राज्यसभा चुनाव में उसके तीन विधायकों के वोट नहीं देने के कारण विपक्ष का इकलौता कैंडिडेट हार गया। जिलाध्यक्षों की सूची पर 24 घंटे के अंदर पटना और दिल्ली के बीच तालमेल की कमी सामने आ गई है। अब डैमेज कंट्रोल की तैयारी तो है, लेकिन बची हुई जातियों को जगह देने के लिए जिन-जिनके नाम कटेंगे, वो हनीमून से पहले तलाक जैसा सदमा देने वाले राजनीतिक अपमान के बदले क्या-क्या करेंगे, इसे कोई समझ नहीं सकता।


