आज तक गलत काम नहीं किया, जो मरी वो भाभी थी; भाजपा विधायक राजू सिंह ने कोर्ट से मांगी रिहाई
बिहार के साहिबगंज से भाजपा विधायक राजू कुमार सिंह ने दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट से गैर इरादतन हत्या मामले में रिहाई की मांग की है। इस केस में राजू सिंह को पिछले महीने दोषी करार दिया गया था। सजा के बिंदु पर सुनवाई पूरी हो गई है, कोर्ट शनिवार को फैसला सुनाएगा।

गैर इरादतन हत्या में दोषी बिहार के भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक राजू कुमार सिंह की सजा पर दिल्ली की अदालत शनिवार 4 जुलाई को फैसला सुनाएगी। कोर्ट ने सजा के बिंदु पर सुनवाई पूरी कर शुक्रवार को फैसला सुरक्षित रख लिया। मुजफ्फरपुर जिले के साहेबगंज से भाजपा विधायक राजू सिंह ने कोर्ट से अच्छे आचरण के आधार पर रिहाई की मांग की है। विधायक ने जज से कहा कि उन्होंने आज तक कुछ गलत काम नहीं किया। जिसकी मौत हुई, वो उनके भाई के दोस्त की पत्नी थी और उन्हें वह भाभी कहकर बुलाते थे।
वहीं, अगर राजू सिंह को इस केस में दो साल या उससे अधिक की सजा होती है तो उनकी विधायकी जा सकती है। यह मामला लगभग साढ़े 7 साल पुराना है जब दिल्ली में न्यू ईयर पार्टी में हर्ष फायरिंग से महिला डॉक्टर अर्चना गुप्ता की जान चली गई थी, जिसमें राजू सिंह दोषी करार दिए गए।
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई के दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष की ओर से शुक्रवार को दलीलें रखी गईं। स्पेशल जज विशाल गोगने ने दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद सजा पर फैसला सुरक्षित रख लिया। अदालत शनिवार को सजा सुनाएगी। कोर्ट ने उन्हें बीते 6 जून को दोषी करार दिया था।
भाजपा विधायक के आचरण की रिपोर्ट पर विचार
अदालत ने शुक्रवार को राजू कुमार सिंह के आचरण पर प्रोबेशन ऑफिसर की रिपोर्ट पर भी विचार किया। प्रोबेशन ऑफिसर की रिपोर्ट के आधार पर, वरिष्ठ वकील नंदिता राव ने बताया कि राजू कुमार सिंह पटना हाई कोर्ट से एक मामले में जमानत पर हैं। उन्हें एक अन्य मामले में बरी कर दिया गया है, जबकि तीसरा मामला कोर्ट में लंबित है।
उन्होंने यह भी बताया कि राजू सिंह की पत्नी रेणु सिंह ने प्रोबेशन ऑफिसर से कहा था कि उनके पति को किसी भी मामले में जेल नहीं भेजा गया है। इससे पता चलता है कि भाजपा विधायक पहले किसी मामले में दोषी नहीं पाए गए हैं।
लापरवाही से हुई महिला की मौत?
सीनियर वकील ने तर्क दिया कि यह महज एक हादसा था। लापरवाही की वजह से महिला डॉक्टर की जान चली गई थी। घटना के वक्त विधायक का परिवार भी डांस फ्लोर पर था। इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि महिला को किसकी गोली लगी थी। हवा में दो गोलियां चलाई गई थीं। किसी को भी निशाना साधकर फायरिंग नहीं की गई थी।
उन्होंने यह भी कहा कि कि दोषी विधायक ने किसी भी गवाह को प्रभावित नहीं किया। ना ही किसी को धमकाया और ना ही उसे खरीदा गया। राजू सिंह का परिवार है, बूढ़े माता-पिता हैं और उनका पिछला रिकॉर्ड अच्छा रहा है।
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सजा देनी है तो 2 साल से कम हो- वकील
सीनियर वकील ने अदालत में दावा किया कि राजू सिंह 6 बार के विधायक हैं और पूरी ईमानदारी से अपने क्षेत्र की सेवा कर रहे हैं। उन्हें एक मौका दिया जाए। अगर उन्हें इस केस में 2 साल से अधिक की सजा होती है तो उनकी विधायकी चली जाएगी। उनके पिछले आचरण को देखते हुए उन्हें सुधरने का मौका दिया जा सकता है।
वहीं, वकील राजीव मोहन, ऋषभ भाटी और रेहान खान की ओर से यह दलील दी गई कि दोषी को गोली चलाने के वैज्ञानिक तरीके की जानकारी नहीं थी। उन्हें यह नहीं पता था कि फायर करने के बाद गोली किस रास्ते से जाएगी। अगर बंदूक को 45 डिग्री के एंगल से चलाया जाए, तो गोली दूर तक जाएगी। अगर उसे 90 डिग्री के एंगल पर चलाया जाए, तो गोली कम दूरी तय करती है। विधायक को फिजिक्स के इस नियम के बारे में पता नहीं था।
वकील ने दलील दी कि उनके भविष्य को देखते हुए कोर्ट विधायक को 2 साल से कम की सजा दे सकती है। ताकि उनकी विधायकी बची रहे। जब कोर्ट ने पूछा कि क्या राजू सिंह कुछ कहना चाहते हैं, तो विधायक ने भी अदालत में अपनी बात रखी।
भाजपा विधायक राजू सिंह जज से क्या बोले?
भाजपा विधायक ने जज से कहा, "मैंने कभी कोई गलत काम नहीं किया है। मैं एक सामाजिक व्यक्ति हूं, जो समाज के बीच रहता हूं। मृतक महिला मेरे भाई के दोस्त की पत्नी थी। मैं उन्हें भाभी कहकर बुलाता था। मैं कोर्ट से अनुरोध करता हूं कि कम से कम सजा दी जाए।
सरकारी वकील ने किया रिहाई की दलील का विरोध
दूसरी ओर, सरकारी वकील ने राजू सिंह के वकीलों की दलील का अदालत में विरोध किया। सरकारी वकील ने कहा कि जिस महिला की मौत हुई, वो 45 साल की थी। उनकी जिंदगी अभी बाकी थी। जब यह घटना हुई तब उनकी 12 साल की बेटी और उनके पति वहीं पर थे। मां के सिर से खून बहते देखना बेटी के लिए एक गहरा सदमा है।
जान का खतरा नहीं तो विधायक के पास क्यों थी बंदूक?
उन्होंने कहा कि फायरिंग डांस फ्लोर के पास की गई थी। हमारे देश में खुशी के मौके पर गोली चलाना (हर्ष फायरिंग) एक बीमारी की तरह है। राजू सिंह उस समय बिहार नहीं बल्कि दिल्ली में थे। उन्हें कोई खतरा नहीं था। इसके बावजूद उनके पास हथियार था।
उन्होंने यह भी दलील दी कि घटना के बाद पीड़ित महिला के कपड़े और मोबाइल फोन छिपा दिए गए थे। बाद में पुलिस ने उन्हें बरामद किया। फिर आरोपी भाग गया। कुशीनगर हाईवे पर पकड़ा गया। हाईवे पर कपड़े फेंके गए थे। खून धोया गया था। डीजे वाले ने अपने बयान में यह बात कही।
कानून बनाने वाले ही कानून तोड़ेंगे?
सरकारी वकील का कहना है कि यह ऐसा मामला है, जहां कानून बनाने वाला ही कानून तोड़ने वाला बना है। दोषी 6 बार के विधायक हैं। उन्हें कानून की जानकारी थी। अभियोजन पक्ष ने कहा कि उन्हें प्रोबेशन पर रिहा करने से समाज में गलत संदेश जाएगा। उन्होंने कहा कि आरोपी के मन में कानून के प्रति कोई सम्मान नहीं है। उन्होंने कानून के दायरे से बाहर निकलने की हर संभव कोशिश की। ना तो उन्होंने और ना ही उनकी पत्नी ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की। यह उनकी अमानवीयता को दर्शाता है।
क्या है पूरा मामला?
31 दिसंबर 2018 की रात दिल्ली के फतेहपुर बेरी स्थित फार्म हाउस पर न्यू ईयर की पार्टी का आयोजन किया था। इसमें हर्ष फायरिंग से महिला डॉक्टर अर्चना गुप्ता गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। बाद में इलाज के दौरान उनकी अस्पताल में मौत हो गई। इस मामले में भाजपा विधायक राजू सिंह, उनकी पत्नी रेणु सिंह समेत 4 लोगों को आरोपी बनाया गया था।
भाजपा विधायक की पत्नी समेत 3 आरोपी बरी
दिल्ली पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ कोर्ट चार्जशीट दायर की। सेशन और ट्रायल होने के बाद 6 जून को राउज एवेन्यू कोर्ट ने राजू सिंह को गैर इरादतन हत्या और आर्म्स एक्ट में दोषी करार दिया। जबकि उनकी पत्नी और अन्य आरोपियों को बरी कर दिया गया।
(एजेंसी इनपुट के साथ)


